सर्दियों का मौसम आते ही हमारी दिनचर्या में कई बदलाव होने लगते हैं। ठंड बढ़ने के साथ जहां लोग गर्म कपड़ों और खानपान पर ज्यादा ध्यान देने लगते हैं, वहीं पानी पीने की मात्रा अक्सर कम हो जाती है। इतना ही नहीं, ठंड के कारण कई लोग बार-बार बाथरूम जाने से बचते हैं और पेशाब को काफी देर तक रोककर रखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यही छोटी-छोटी आदतें यूरिन इन्फेक्शन यानी यूटीआई का खतरा बढ़ा सकती हैं? खासकर महिलाओं को सर्दियों के दौरान इस समस्या को लेकर अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।
दरअसल, यूरिन इन्फेक्शन एक ऐसा संक्रमण है, जो मूत्र प्रणाली के किसी भी हिस्से को प्रभावित कर सकता है। ज्यादातर मामलों में यह संक्रमण आंतों में पाए जाने वाले बैक्टीरिया के कारण होता है। ये बैक्टीरिया मूत्रमार्ग के रास्ते मूत्राशय तक पहुंच जाते हैं और संक्रमण पैदा कर सकते हैं। महिलाओं में यह समस्या ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि उनका मूत्रमार्ग पुरुषों की तुलना में छोटा होता है। इसकी वजह से बैक्टीरिया को मूत्राशय तक पहुंचने में कम दूरी तय करनी पड़ती है।
अब बात करते हैं सर्दियों में इस समस्या के बढ़ने की। ठंड के मौसम में शरीर को गर्मियों की तुलना में प्यास कम महसूस होती है। ऐसे में कई लोग पूरे दिन में पर्याप्त पानी नहीं पीते। कुछ लोग केवल दो-तीन गिलास पानी पीकर ही दिन गुजार देते हैं और बाकी समय चाय या कॉफी का सेवन करते रहते हैं। शरीर में पानी की कमी होने पर पेशाब की मात्रा कम हो सकती है। इससे मूत्राशय में मौजूद बैक्टीरिया को पेशाब के जरिए बाहर निकालने की प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
दूसरी बड़ी वजह है पेशाब को लंबे समय तक रोककर रखना। सर्दियों में ठंडे बाथरूम में जाने से बचने के लिए कई लोग पेशाब आने के बावजूद उसे रोक लेते हैं। कुछ लोग काम की व्यस्तता के कारण भी घंटों तक बाथरूम नहीं जाते। लगातार ऐसा करना मूत्राशय के स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं माना जाता। इसलिए जब भी पेशाब आए, उसे अनावश्यक रूप से रोकने से बचना चाहिए। खासकर उन लोगों को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए, जिन्हें पहले भी बार-बार यूरिन इन्फेक्शन की समस्या हो चुकी है।
यूरिन इन्फेक्शन से बचाव में पानी पीने की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी गई है। एक शोध में पाया गया कि जिन महिलाओं को बार-बार यूरिन इन्फेक्शन होता था और जो सामान्य रूप से कम पानी पीती थीं, उनके पानी का सेवन बढ़ाने से संक्रमण की पुनरावृत्ति में कमी देखी गई। पर्याप्त पानी पीने से पेशाब बनने और बाहर निकलने की प्रक्रिया बेहतर रहती है। हालांकि, हर व्यक्ति की पानी की जरूरत अलग-अलग हो सकती है। यह उम्र, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य की स्थिति पर निर्भर करती है। इसलिए पूरे दिन नियमित अंतराल पर पानी पीना चाहिए।
यूरिन इन्फेक्शन के कुछ सामान्य लक्षण भी हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। इनमें बार-बार पेशाब आना, पेशाब करते समय जलन या दर्द होना, अचानक तेज पेशाब लगना, पेशाब का रंग धुंधला होना और पेट के निचले हिस्से में दर्द महसूस होना शामिल है। कुछ लोगों को पेशाब में खून भी दिखाई दे सकता है। यदि संक्रमण बढ़कर किडनी तक पहुंच जाए, तो बुखार, ठंड लगना, कमर या पीठ के एक तरफ दर्द और उल्टी जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
बचाव के लिए सबसे पहले पर्याप्त पानी पीने की आदत डालें। पेशाब को लंबे समय तक न रोकें और मूत्राशय को पूरी तरह खाली करने की कोशिश करें। व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें और बाथरूम का इस्तेमाल करने के बाद सही तरीके से सफाई करें। महिलाओं को विशेष रूप से आगे से पीछे की ओर सफाई करने की सलाह दी जाती है, ताकि आंतों के बैक्टीरिया मूत्रमार्ग तक न पहुंचें।
अगर आपको बार-बार यूरिन इन्फेक्शन हो रहा है, तो केवल घरेलू उपायों के भरोसे न रहें। डॉक्टर से जांच कराएं, क्योंकि बार-बार संक्रमण होने के पीछे अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारण भी हो सकते हैं। बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन बिल्कुल न करें। खासतौर पर बुखार, कंपकंपी, कमर दर्द या उल्टी जैसे लक्षण दिखाई देने पर देरी न करें।
कुल मिलाकर सर्दियों में पानी कम पीना और पेशाब रोकने जैसी छोटी आदतें यूरिन इन्फेक्शन का खतरा बढ़ा सकती हैं। इसलिए ठंड के मौसम में भी शरीर को हाइड्रेटेड रखना, समय पर बाथरूम जाना और साफ-सफाई का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
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