दिवाली का त्योहार नजदीक आते ही देश की राजधानी दिल्ली में प्रदूषण ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली की हवा एक बार फिर जहरीली होती जा रही है और हालात ऐसे बन गए हैं कि लोगों को सांस लेने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मंगलवार को राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 350 दर्ज किया गया, जो पिछले 287 दिनों में सबसे खराब स्तर है। इससे पहले 20 जनवरी को दिल्ली का AQI 378 दर्ज किया गया था। दिवाली से पहले प्रदूषण का इस तरह बढ़ना स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय बन गया है।
राजधानी में प्रदूषण की स्थिति कितनी खराब हो चुकी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली के 57 निगरानी केंद्रों में से 10 केंद्रों पर हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी में पहुंच गई। वहीं, 35 निगरानी केंद्रों पर बेहद खराब और 12 केंद्रों पर खराब श्रेणी की हवा दर्ज की गई। यानी राजधानी का कोई भी निगरानी केंद्र ऐसा नहीं रहा, जहां हवा की गुणवत्ता अच्छी या संतोषजनक श्रेणी में दर्ज की गई हो। लगातार बिगड़ते हालात के कारण लोगों को आने वाले दिनों में और अधिक सावधानी बरतने की जरूरत है।
दिल्ली में सबसे ज्यादा प्रदूषण जहांगीरपुरी इलाके में दर्ज किया गया, जहां एयर क्वालिटी इंडेक्स 462 तक पहुंच गया। यह गंभीर श्रेणी में आता है। इस स्तर पर हवा में मौजूद प्रदूषक तत्व स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकते हैं। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और सांस संबंधी बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए ऐसी हवा ज्यादा खतरनाक साबित हो सकती है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से खांसी, सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी सीपीसीबी के निर्धारित मानकों के अनुसार, एयर क्वालिटी इंडेक्स शून्य से 50 के बीच होने पर हवा को अच्छी श्रेणी में रखा जाता है। 51 से 100 तक संतोषजनक, 101 से 200 तक मध्यम, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बेहद खराब और 401 से 500 तक गंभीर श्रेणी मानी जाती है। ऐसे में दिल्ली का औसत AQI 350 होना बताता है कि राजधानी की हवा बेहद खराब स्थिति में पहुंच चुकी है, जबकि जहांगीरपुरी का 462 का स्तर गंभीर श्रेणी में है।
दिवाली से पहले प्रदूषण की बढ़ती समस्या को देखते हुए सरकार ने भी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। राजधानी में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी ग्रैप के दूसरे चरण को लागू किया गया है। इसके तहत प्रदूषण फैलाने वाले कारकों पर नियंत्रण, सड़कों की सफाई, पानी का छिड़काव और निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल को कम करने जैसे उपायों पर जोर दिया जाता है। इसके अलावा संबंधित एजेंसियों को प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी दी जाती है।
दिल्ली में हर साल सर्दियों की शुरुआत के साथ वायु प्रदूषण की समस्या गंभीर होने लगती है। इसके पीछे वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा जलाना और मौसम से जुड़ी परिस्थितियां प्रमुख कारण मानी जाती हैं। हवा की गति कम होने और वातावरण में नमी बढ़ने पर प्रदूषक तत्व लंबे समय तक वातावरण में बने रह सकते हैं। इसके कारण प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ जाता है।
दिवाली के आसपास पटाखों का इस्तेमाल भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। हालांकि प्रदूषण के पीछे कई अन्य कारण भी जिम्मेदार होते हैं, लेकिन त्योहार के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं और जहरीले कण पहले से प्रदूषित हवा की स्थिति को और खराब कर सकते हैं। ऐसे में प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों की जिम्मेदारी भी बढ़ जाती है कि वे प्रदूषण कम करने में सहयोग करें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि जब हवा की गुणवत्ता बेहद खराब या गंभीर श्रेणी में हो, तो अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचना चाहिए। विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को सुबह-शाम खुले वातावरण में ज्यादा देर तक रहने से बचना चाहिए। सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या लगातार खांसी जैसी शिकायत होने पर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। घर के अंदर भी धूल और धुएं से बचाव के उपाय अपनाना जरूरी है।
फिलहाल दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति ने दिवाली से पहले ही खतरे की घंटी बजा दी है। 287 दिनों का रिकॉर्ड टूटना और जहांगीरपुरी में AQI का 462 तक पहुंचना राजधानी के लिए गंभीर संकेत है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार और संबंधित एजेंसियां दिवाली से पहले प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित कर पाएंगी या फिर इस बार भी दिल्लीवासियों को जहरीली हवा के बीच त्योहार मनाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
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