भारतीय महिला टेनिस के लिए सात नवंबर का दिन ऐतिहासिक बन गया। चेन्नई ओपन के कोर्ट पर दो भारतीय खिलाड़ियों ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसने देश के टेनिस इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया। वैष्णवी अडकर और रुतुजा भोसले ने शानदार प्रदर्शन करते हुए डब्ल्यूटीए टूर स्तर के महिला युगल फाइनल में जगह बना ली है। खास बात यह है कि दोनों भारतीय खिलाड़ियों की इस जोड़ी ने पहली बार किसी मुख्य डब्ल्यूटीए टूर टूर्नामेंट के युगल फाइनल में पहुंचने वाली ऑल-इंडियन जोड़ी बनने का गौरव हासिल किया है। सेमीफाइनल में उनका मुकाबला दूसरी वरीयता प्राप्त पोलैंड की वेरोनिका फाल्कोव्स्का और अमेरिका की अलाना स्मिथ से हुआ। मुकाबला बेहद रोमांचक रहा, जिसमें भारतीय जोड़ी ने 6-2, 2-6 और 10-8 से जीत दर्ज कर खिताबी मुकाबले का टिकट हासिल किया।
दरअसल, चेन्नई में खेले जा रहे इस टूर्नामेंट में वैष्णवी अडकर और रुतुजा भोसले लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही थीं। सेमीफाइनल में उनके सामने अनुभवी और दूसरी वरीयता प्राप्त जोड़ी की चुनौती थी। मुकाबले की शुरुआत से ही भारतीय खिलाड़ियों ने आक्रामक खेल दिखाया। दोनों ने अपने प्रतिद्वंद्वियों की गलतियों का फायदा उठाते हुए पहले सेट में 4-1 की बढ़त बना ली। तीसरे गेम में वैष्णवी अडकर ने अलाना स्मिथ की दूसरी सर्विस पर शानदार रिटर्न लगाया, जिसे वेरोनिका फाल्कोव्स्का वापस कोर्ट में नहीं पहुंचा सकीं। इस तरह भारतीय जोड़ी ने शुरुआती बढ़त हासिल की और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। शानदार तालमेल और सटीक शॉट्स की बदौलत भारतीय खिलाड़ियों ने पहला सेट 6-2 से अपने नाम कर लिया।
हालांकि, दूसरे सेट में मुकाबले की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। पोलैंड और अमेरिका की जोड़ी ने वापसी करते हुए भारतीय खिलाड़ियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया। वैष्णवी और रुतुजा को तीसरे तथा पांचवें गेम में विरोधियों की सर्विस तोड़ने के मौके मिले, लेकिन वे इन अवसरों का फायदा नहीं उठा सकीं। दूसरी तरफ फाल्कोव्स्का और स्मिथ ने अपनी रणनीति में बदलाव किया और लगातार बेहतर खेल दिखाया। भारतीय जोड़ी की लय भी कुछ कमजोर पड़ी, जिसका फायदा उठाकर विरोधी खिलाड़ियों ने दूसरा सेट 6-2 से जीत लिया। अब मुकाबला निर्णायक सुपर टाई-ब्रेक में पहुंच चुका था और दोनों जोड़ियों के सामने फाइनल में जगह बनाने की चुनौती थी।
निर्णायक सुपर टाई-ब्रेक में भारतीय खिलाड़ियों की परीक्षा और भी कठिन हो गई। फाल्कोव्स्का और स्मिथ ने शुरुआत में ही 3-0 की बढ़त बना ली। ऐसा लग रहा था कि मुकाबला भारतीय जोड़ी के हाथों से निकल सकता है, लेकिन वैष्णवी और रुतुजा ने हार नहीं मानी। दोनों ने धैर्य बनाए रखा और शानदार वापसी की। इसके बावजूद मुकाबला एक बार फिर रोमांचक मोड़ पर पहुंच गया, जब भारतीय जोड़ी 6-8 से पीछे हो गई। अब उनके सामने लगातार अंक हासिल करने की चुनौती थी। दबाव के इस क्षण में दोनों भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन संयम दिखाया। उन्होंने लगातार चार अंक हासिल किए और सुपर टाई-ब्रेक 10-8 से जीतकर इतिहास रच दिया। निर्णायक अंक मिलते ही भारतीय खेमे में खुशी की लहर दौड़ गई।
इस जीत का महत्व केवल चेन्नई ओपन के फाइनल में पहुंचने तक सीमित नहीं है। वैष्णवी अडकर और रुतुजा भोसले ऐसी पहली पूरी तरह भारतीय महिला जोड़ी बन गई हैं, जिसने मुख्य डब्ल्यूटीए टूर स्तर के किसी टूर्नामेंट के युगल फाइनल में जगह बनाई है। इससे पहले वर्ष 2005 में शिखा ओबरॉय और उनकी बहन नेहा सनफीस्ट ओपन तथा ग्वांगझू ओपन के फाइनल तक पहुंची थीं, लेकिन नेहा ने अमेरिका का प्रतिनिधित्व किया था। इसलिए उनकी जोड़ी को पूरी तरह भारतीय जोड़ी नहीं माना जाता।
भारतीय टेनिस की दिग्गज खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने अपने शानदार करियर में 43 युगल खिताब जीते थे, लेकिन उन्होंने इन खिताबी जीतों में किसी भारतीय खिलाड़ी के साथ जोड़ी नहीं बनाई थी। वहीं, अंकिता रैना और करमन थंडी ने वर्ष 2018 में डब्ल्यूटीए 125 स्तर का युगल खिताब जीता था। यह प्रतियोगिता मुख्य डब्ल्यूटीए टूर से एक स्तर नीचे होती है। ऐसे में वैष्णवी और रुतुजा की उपलब्धि भारतीय महिला टेनिस के लिए एक विशेष मुकाम रखती है।
इस ऐतिहासिक जीत के पीछे दोनों खिलाड़ियों का संघर्ष भी खास रहा। टूर्नामेंट के दौरान रुतुजा भोसले कूल्हे की परेशानी से जूझ रही थीं और उनकी तबीयत भी खराब हुई थी। इसके बावजूद उन्होंने कोर्ट पर अपना पूरा दमखम दिखाया। दोनों खिलाड़ियों ने मुश्किल परिस्थितियों में एक-दूसरे का साथ दिया और निर्णायक क्षणों में आक्रामक खेल जारी रखा। घरेलू दर्शकों के सामने मिली इस सफलता ने उनकी खुशी को और बढ़ा दिया।
अब सभी की निगाहें चेन्नई ओपन के फाइनल पर टिक गई हैं। वैष्णवी अडकर और रुतुजा भोसले के सामने अब खिताब जीतकर अपनी ऐतिहासिक उपलब्धि को यादगार बनाने का मौका होगा। सवाल यह है कि क्या यह भारतीय जोड़ी फाइनल में भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए चैंपियन बनने में सफल होगी? इतना जरूर है कि दोनों खिलाड़ियों ने फाइनल में पहुंचकर भारतीय महिला टेनिस के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया है।
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