गुजरात में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। अहमदाबाद और सूरत क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने कार्रवाई करते हुए 25 करोड़ 65 लाख रुपये से अधिक कीमत की हेरोइन और मेफेड्रोन यानी एमडी ड्रग्स जब्त की है। इस मामले में दिल्ली और उत्तर प्रदेश के रहने वाले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तस्करी की इस खेप को सामान्य खाद्य पदार्थों के पैकेटों में छिपाकर ले जाने की आशंका सामने आई है। अब पुलिस इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
जानकारी के मुताबिक, अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने सूरत क्राइम ब्रांच के साथ मिलकर यह संयुक्त कार्रवाई की। पुलिस ने अहमदाबाद-वडोदरा एक्सप्रेस हाईवे पर रामोल टोल नाके के पास एक महिंद्रा एक्सयूवी कार को जांच के लिए रोका। तलाशी के दौरान वाहन से भारी मात्रा में मादक पदार्थ बरामद किए गए। जब्त की गई हेरोइन और एमडी ड्रग्स की कुल कीमत 25 करोड़ 65 लाख रुपये से अधिक बताई गई है।
पुलिस की जांच में सामने आया कि नशीले पदार्थों को पुलिस की नजरों से बचाकर ले जाने के लिए कथित तौर पर ड्रिंक और किशमिश के पैकेटों का इस्तेमाल किया गया था। सामान्य सामान के बीच नशीले पदार्थ छिपाकर ले जाने का यह तरीका जांच एजेंसियों के लिए भी गंभीर चुनौती है। हालांकि, तस्करी में इस्तेमाल किए गए पैकेटों और बरामद पदार्थों से जुड़े सभी विवरण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
इस मामले में पुलिस ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश के रहने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी नशीले पदार्थ कहां से लेकर आए थे और इन्हें किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। इसके अलावा, पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क में और कितने लोग शामिल हैं और क्या आरोपी पहले भी ऐसी तस्करी की घटनाओं में शामिल रहे हैं।
इस मामले में विदेश से जुड़े संभावित संपर्कों की भी जांच की जा रही है। पुलिस को शक है कि इस नेटवर्क के तार अफगानिस्तान से जुड़े हो सकते हैं। हालांकि, इस संबंध में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच एजेंसियों को सबूत जुटाने होंगे। पुलिस अब नशीले पदार्थों की आपूर्ति, परिवहन और वितरण से जुड़े संभावित संपर्कों का पता लगाने में जुटी है।
गौरतलब है कि हेरोइन और मेफेड्रोन जैसे मादक पदार्थों की तस्करी युवाओं और समाज के लिए गंभीर चुनौती है। ऐसे मामलों में तस्करी के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना जरूरी होता है, ताकि केवल सामान पहुंचाने वालों ही नहीं, बल्कि इसके पीछे सक्रिय लोगों तक भी पहुंचा जा सके।
फिलहाल, पुलिस की जांच जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियां इस कथित ड्रग्स नेटवर्क के पीछे सक्रिय लोगों तक कब पहुंचती हैं और नशे के इस कारोबार से जुड़े कितने अन्य चेहरे सामने आते हैं।
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