पुणे में एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। यहां 26 साल का एक युवक खुद को भारतीय वायुसेना का जवान बताकर लोगों के बीच रौब झाड़ रहा था। वह न सिर्फ सैन्यकर्मी होने का दावा करता था, बल्कि एयरफोर्स की वर्दी भी पहनना चाहता था। लेकिन उसकी यही कोशिश उसके लिए भारी पड़ गई। एक टेलर की सतर्कता के चलते उसके फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हो गया और पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी की पहचान शुभम विलास अंबुरे के रूप में हुई है। वह महाराष्ट्र के बीड जिले का रहने वाला बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, शुभम पुणे जिले के शिरूर इलाके में एक सैलून में नाई का काम करता था। हालांकि, अपने गांव और आसपास के लोगों के सामने वह कथित तौर पर खुद को भारतीय वायुसेना का जवान बताता था।
एयरफोर्स की वर्दी सिलवाने पहुंचा था आरोपी
शुभम का फर्जीवाड़ा उस समय सामने आया, जब वह पुणे के लोहगांव स्थित गुरुद्वारा कॉलोनी में बालाजी टेलर्स की दुकान पर पहुंचा। बताया जा रहा है कि वह एयरफोर्स की वर्दी सिलवाना चाहता था। दुकान पर पहुंचने के बाद उसने टेलर को बताया कि वह भारतीय वायुसेना में तैनात है और उसे विभाग की यूनिफॉर्म सिलवानी है।
टेलर ने सामान्य प्रक्रिया के तहत उससे कुछ जानकारी मांगी और पहचान साबित करने के लिए ID कार्ड दिखाने को कहा। शुभम ने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी जेब से एक पहचान पत्र निकालकर टेलर को दे दिया।
लेकिन यहीं से कहानी ने अचानक मोड़ ले लिया।
ID कार्ड देखते ही टेलर को हुआ शक
टेलर ने जब शुभम का ID कार्ड देखा तो उसे उसमें कुछ गड़बड़ी नजर आई। कार्ड को लेकर टेलर संतुष्ट नहीं हुआ। उसे शक हुआ कि यह पहचान पत्र असली नहीं है। इसके बाद उसने मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंचाई।
पुलिस ने जब मामले की जांच शुरू की तो आरोपी के दावों पर सवाल उठने लगे। पूछताछ और जांच के दौरान कथित तौर पर सामने आया कि शुभम जिस पहचान पत्र का इस्तेमाल कर रहा था, वह किसी मृत सैन्यकर्मी की ID से जुड़ा था।
यानी एक ऐसे व्यक्ति की पहचान का कथित तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा था, जो अब इस दुनिया में नहीं है।
पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने शुभम अंबुरे को गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस उससे पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने यह पहचान पत्र कहां से हासिल किया और इसका इस्तेमाल कितने समय से किया जा रहा था।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी ने केवल अपने गांव में रौब जमाने के लिए खुद को एयरफोर्स जवान बताया था या इस फर्जी पहचान के जरिए उसने किसी अन्य व्यक्ति को भी धोखा दिया।
एक टेलर की सतर्कता से खुला फर्जीवाड़ा
इस पूरे मामले की सबसे अहम बात यह है कि अगर टेलर ने ID कार्ड को ध्यान से नहीं देखा होता तो शायद आरोपी का फर्जीवाड़ा कुछ और समय तक चलता रहता। वर्दी सिलवाने की उसकी कोशिश ने ही उसकी कथित फर्जी पहचान को उजागर कर दिया।
यह घटना यह भी दिखाती है कि किसी सरकारी विभाग, सेना या सुरक्षा बल से जुड़ी पहचान का दावा करने वाले व्यक्ति के दस्तावेजों की पुष्टि करना कितना जरूरी है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और जांच पूरी होने के बाद इस मामले में और भी खुलासे होने की संभावना है।
ध्यान रहे, आरोपी पर लगे आरोप जांच का विषय हैं और मामले में अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
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