लाइव सत्यकाम न्यूज, नई दिल्ली : केंद्रीय बजट 2026 को लेकर पावर सेक्टर में असंतोष देखने को मिल रहा है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) ने बजट को बिजली क्षेत्र और कर्मचारियों की अपेक्षाओं के विपरीत बताया है। फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि बजट में न तो सार्वजनिक विद्युत संस्थानों को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए और न ही कर्मचारियों को कोई राहत दी गई।
AIPEF के अनुसार, बजट से यह उम्मीद की जा रही थी कि सार्वजनिक क्षेत्र की विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) की लगातार बढ़ती वित्तीय समस्याओं को कम करने के लिए स्पष्ट नीति सामने आएगी, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया।
शैलेन्द्र दुबे ने ट्रांसमिशन सेक्टर में टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटेटिव बिडिंग (TBCB) के जरिए हो रहे निजीकरण पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह विषय राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, इसके बावजूद बजट में इस पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि देश में सस्ती और स्थायी बिजली उत्पादन के लिए नए सार्वजनिक क्षेत्र के बिजलीघरों की स्थापना को लेकर बजट पूरी तरह मौन रहा। उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण—तीनों ही अहम क्षेत्रों को लेकर बजट 2026 में कोई स्पष्ट दिशा दिखाई नहीं देती।
कर्मचारियों के मुद्दों पर प्रतिक्रिया देते हुए AIPEF चेयरमैन ने कहा कि बिजली कर्मचारियों सहित लाखों सरकारी कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली, आयकर छूट सीमा बढ़ाने और स्टैंडर्ड डिडक्शन में वृद्धि की उम्मीद थी, लेकिन बजट में इन मांगों को नजरअंदाज किया गया।
इसके अलावा, बजट में पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC) के पुनर्गठन की घोषणा पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया कि पुनर्गठन किस ढांचे के तहत होगा। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं यह कदम राज्यों के पावर सेक्टर को शर्तों के साथ निजीकरण की ओर ले जाने का प्रयास तो नहीं है।
AIPEF ने चेतावनी दी है कि यदि PFC और REC के पुनर्गठन के नाम पर बिजली क्षेत्र के निजीकरण की कोई भी कोशिश की गई, तो देशभर के बिजली कर्मचारी और अभियंता इसका संगठित और निर्णायक विरोध करेंगे।
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