Tuesday, September 22, 2026
HomeसंपादकीयPeri-Urban India: गांव भी नहीं, शहर भी नहीं—इन इलाकों का भविष्य कौन...

Peri-Urban India: गांव भी नहीं, शहर भी नहीं—इन इलाकों का भविष्य कौन तय करेगा?

Peri-Urban India यानी शहरों की सीमा से लगे वे इलाके जो तेजी से गांव से शहर में बदल रहे हैं, आने वाले भारत की शहरी तस्वीर का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इन क्षेत्रों में खेती की जमीन पर कॉलोनियां, अपार्टमेंट, सड़कें, वेयरहाउस और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। लेकिन सवाल यह है कि गांव और शहर के बीच तेजी से बदल रहे इन इलाकों का भविष्य कौन तय करेगा?

भारत में शहरीकरण (Urbanization) तेजी से बढ़ रहा है। बड़े शहरों की सीमाएं अब पुराने नगर क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं। शहरों के आसपास के गांव भी धीरे-धीरे आवासीय, औद्योगिक और व्यावसायिक क्षेत्रों में बदल रहे हैं।

यही क्षेत्र Peri-Urban Areas कहलाते हैं।

ये न पूरी तरह गांव हैं और न ही पूरी तरह शहर। यही वजह है कि इनके विकास, प्रशासन, जमीन, पानी, परिवहन और पर्यावरण से जुड़े सवाल आने वाले वर्षों में और महत्वपूर्ण होने वाले हैं।

Peri-Urban India क्या है?

Peri-Urban India से आशय उन क्षेत्रों से है जो किसी शहर के आसपास स्थित होते हैं और जहां ग्रामीण तथा शहरी दोनों प्रकार की गतिविधियां एक साथ दिखाई देती हैं।

इन क्षेत्रों में एक तरफ खेती, गांव और पारंपरिक स्थानीय अर्थव्यवस्था मौजूद रहती है, तो दूसरी तरफ नई कॉलोनियां, अपार्टमेंट, स्कूल, अस्पताल, बाजार, उद्योग, लॉजिस्टिक सेंटर और सड़क परियोजनाएं तेजी से विकसित होने लगती हैं।

सरल शब्दों में कहें तो यह गांव से शहर बनने के बीच का संक्रमण क्षेत्र है।

यही संक्रमण इन इलाकों को भारत के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण बनाता है।

शहरों के आसपास गांव तेजी से क्यों बदल रहे हैं?

शहरों की बढ़ती आबादी के साथ आवास, रोजगार और परिवहन की जरूरत बढ़ रही है। शहर के भीतर जमीन महंगी और सीमित होने के कारण विकास धीरे-धीरे आसपास के क्षेत्रों की ओर बढ़ता है।

नई सड़कें, एक्सप्रेसवे, मेट्रो, औद्योगिक क्षेत्र और रोजगार केंद्र इस बदलाव को और तेज कर सकते हैं।

इसके बाद जमीन का उपयोग बदलने लगता है।

जहां पहले खेती होती थी, वहां आवासीय परियोजनाएं आने लगती हैं। छोटे गांवों के आसपास बाजार विकसित होते हैं। सार्वजनिक और निजी परिवहन बढ़ता है।

इस तरह एक ग्रामीण क्षेत्र धीरे-धीरे शहरी विस्तार (Urban Expansion) का हिस्सा बन जाता है।

लेकिन समस्या यह है कि शहर का विस्तार अक्सर बुनियादी सुविधाओं की योजना से तेज होता है।

Peri-Urban Areas की सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

शहरों की सीमा से लगे इलाकों में सबसे बड़ी चुनौती अनियोजित शहरीकरण (Unplanned Urbanization) हो सकती है।

नई कॉलोनियां तेजी से बन जाती हैं, लेकिन कई बार सड़क, सीवर, जल निकासी, पेयजल, सार्वजनिक परिवहन और कचरा प्रबंधन जैसी सुविधाएं उसी गति से विकसित नहीं होतीं।

नतीजा यह होता है कि क्षेत्र दिखने में शहर जैसा लगने लगता है, लेकिन शहरी जीवन के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं अधूरी रह जाती हैं।

कहीं बारिश में जलभराव होता है तो कहीं गर्मियों में पानी की समस्या।

कहीं सड़क पर ट्रैफिक बढ़ता है तो कहीं सार्वजनिक परिवहन की कमी लोगों को निजी वाहनों पर निर्भर बनाती है।

यही Peri-Urban Development की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।

प्रशासनिक जिम्मेदारी भी बन रही है बड़ा सवाल

Peri-Urban क्षेत्रों की एक महत्वपूर्ण समस्या प्रशासनिक सीमाओं से जुड़ी है।

किसी गांव की भौगोलिक स्थिति शहर के बेहद करीब हो सकती है, लेकिन उसकी प्रशासनिक व्यवस्था अभी ग्रामीण हो सकती है। दूसरी ओर, आसपास विकास प्राधिकरण या नगर निकाय की योजनाएं लागू हो रही होती हैं।

ऐसे में नागरिकों के सामने सवाल होता है—

  • सड़क की जिम्मेदारी किसकी है?
  • नाली और जल निकासी कौन देखेगा?
  • कूड़ा प्रबंधन कौन करेगा?
  • पेयजल की व्यवस्था कौन करेगा?
  • स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक सुविधाएं कौन विकसित करेगा?
  • बढ़ती आबादी के लिए स्कूल और स्वास्थ्य सेवाएं कहां होंगी?

शहरीकरण के साथ प्रशासनिक जिम्मेदारी स्पष्ट करना भी उतना ही जरूरी है।

सिर्फ शहर की सीमा बढ़ा देना पर्याप्त नहीं है। उसके साथ नागरिक सुविधाओं और प्रशासनिक क्षमता का विस्तार भी होना चाहिए।

जमीन का बदलता इस्तेमाल और किसानों का भविष्य

Peri-Urban Development का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव Land Use Change पर पड़ता है।

शहर के करीब आने के साथ कृषि भूमि का मूल्य बढ़ सकता है और उस पर आवासीय या व्यावसायिक दबाव बढ़ सकता है।

जमीन बेचने से कुछ परिवारों को आर्थिक लाभ मिल सकता है, लेकिन इसके साथ एक दूसरा सवाल भी सामने आता है—जमीन बेचने के बाद भविष्य की स्थायी आय का आधार क्या होगा?

अगर कृषि भूमि लगातार कम होती है तो स्थानीय रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?

यही कारण है कि Urban Expansion और Agricultural Land के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।

हर खाली दिखाई देने वाली जमीन भविष्य की कॉलोनी नहीं हो सकती।

क्या हर खेत को शहर में बदलना जरूरी है?

शहरी विकास आवश्यक है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि शहर के आसपास मौजूद हर कृषि भूमि को निर्माण क्षेत्र में बदल दिया जाए।

कुछ क्षेत्र खाद्य उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। कुछ प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते हो सकते हैं। कुछ तालाब, हरित क्षेत्र या खुले क्षेत्र स्थानीय पर्यावरण और जल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

अगर इन्हें बिना दीर्घकालिक योजना के निर्माण में बदल दिया गया तो आने वाले वर्षों में जल संकट, जलभराव, गर्मी और पर्यावरणीय दबाव बढ़ सकता है।

इसलिए आधुनिक शहरी नियोजन में केवल यह तय करना पर्याप्त नहीं है कि कहां मकान बनेंगे।

यह भी तय करना होगा कि कहां निर्माण नहीं होना चाहिए।

Peri-Urban India और पानी का संकट

शहर के आसपास तेजी से बढ़ती आबादी के साथ पानी की मांग भी बढ़ती है।

अगर नई आबादी के लिए पर्याप्त जलापूर्ति व्यवस्था पहले से तैयार नहीं है तो भूजल पर निर्भरता बढ़ सकती है।

दूसरी तरफ, यदि तालाब, जलाशय और प्राकृतिक जल निकासी के रास्ते निर्माण की वजह से प्रभावित होते हैं, तो बारिश के दौरान जलभराव की समस्या बढ़ सकती है।

यानी एक ही क्षेत्र में गर्मियों में Water Scarcity और मानसून में Urban Flooding जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं।

यह केवल प्राकृतिक समस्या नहीं है।

यह Land Use Planning और Water Management से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है।

सार्वजनिक परिवहन क्यों जरूरी है?

Peri-Urban क्षेत्रों में रोजगार और शिक्षा के अवसर अक्सर शहर के मुख्य हिस्सों में होते हैं।

अगर सार्वजनिक परिवहन पर्याप्त नहीं है तो लोगों को निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ सकता है।

इससे ट्रैफिक, प्रदूषण, ईंधन खर्च और रोजाना आने-जाने का समय बढ़ सकता है।

इसलिए नए शहरी क्षेत्रों की योजना बनाते समय Public Transport और Connectivity को शुरुआत से शामिल करना जरूरी है।

सिर्फ सड़क बनाना पर्याप्त नहीं है।

लोगों को घर से स्कूल, अस्पताल, बाजार और रोजगार केंद्र तक सुरक्षित, सस्ता और सुविधाजनक परिवहन भी चाहिए।

बदलता Peri-Urban समाज

Peri-Urban India सिर्फ भौगोलिक बदलाव नहीं है। यह सामाजिक बदलाव भी है।

एक ही क्षेत्र में पारंपरिक ग्रामीण परिवारों के साथ नए अपार्टमेंट निवासी, किराएदार, प्रवासी श्रमिक, छोटे कारोबारी और सेवा क्षेत्र से जुड़े लोग रहने लगते हैं।

इससे स्थानीय बाजार, रोजगार, जीवनशैली और सामाजिक संबंधों में बदलाव आता है।

युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के नए अवसर खुल सकते हैं। महिलाओं के लिए भी बेहतर परिवहन, शिक्षा और रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

लेकिन यह तभी संभव है जब शहरी विस्तार के साथ सुरक्षित सड़कें, सार्वजनिक परिवहन, स्ट्रीट लाइट, स्वास्थ्य सेवाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसी सुविधाएं भी विकसित हों।

स्मार्ट सिटी से पहले स्मार्ट Peri-Urban Planning जरूरी

भारत में स्मार्ट सिटी, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल सेवाओं की चर्चा लगातार होती है।

लेकिन भविष्य के शहर केवल पुराने शहरों को स्मार्ट बनाने से नहीं बनेंगे।

शहरों के आसपास तेजी से विकसित हो रहे नए क्षेत्रों की योजना भी स्मार्ट होनी चाहिए।

इसका मतलब केवल डिजिटल तकनीक नहीं है।

Smart Peri-Urban Planning का मतलब है—

  • बेहतर भूमि उपयोग योजना
  • पर्याप्त पेयजल व्यवस्था
  • मजबूत सीवर नेटवर्क
  • प्रभावी कचरा प्रबंधन
  • सार्वजनिक परिवहन
  • जल निकासी की वैज्ञानिक व्यवस्था
  • हरित क्षेत्र
  • स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र
  • सुरक्षित सार्वजनिक स्थान
  • स्थानीय रोजगार के अवसर
  • कृषि और पर्यावरणीय क्षेत्रों का संरक्षण

यानी स्मार्ट विकास का केंद्र केवल तकनीक नहीं, बल्कि बेहतर जीवन गुणवत्ता होना चाहिए।

भविष्य का शहर शायद आज के गांव में बन रहा है

भारत के शहरी भविष्य को समझने के लिए केवल बड़े शहरों के पुराने इलाकों को देखना पर्याप्त नहीं है।

हमें उन गांवों और कस्बों को भी देखना होगा जो आज शहर की सीमा के आसपास तेजी से बदल रहे हैं।

आज जिस जगह खेत है, वहां कुछ वर्षों बाद आवासीय क्षेत्र हो सकता है।

आज जो गांव शहर से कुछ किलोमीटर दूर है, वह कल नगर निकाय का हिस्सा हो सकता है।

आज जिस सड़क पर सीमित यातायात है, वह कल शहर की महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी बन सकती है।

इसलिए आज की Peri-Urban Planning ही कल के शहर की गुणवत्ता तय कर सकती है।

Peri-Urban Development में स्थानीय लोगों की भूमिका

किसी क्षेत्र का विकास केवल सरकारी योजना या निजी निवेश से तय नहीं होना चाहिए।

स्थानीय समुदाय को भी विकास प्रक्रिया में शामिल करना जरूरी है।

किसानों, स्थानीय निवासियों, पंचायतों, नगर निकायों, विकास प्राधिकरणों, शहरी योजनाकारों और निजी क्षेत्र के बीच बेहतर समन्वय से विकास को अधिक संतुलित बनाया जा सकता है।

स्थानीय लोगों की जरूरतों को समझे बिना बनाई गई योजना कागज पर अच्छी दिखाई दे सकती है, लेकिन जमीन पर उसके परिणाम अलग हो सकते हैं।

आखिर Peri-Urban India का भविष्य कौन तय करेगा?

यह सवाल सिर्फ प्रशासन का नहीं है।

यह सरकार, स्थानीय निकायों, योजनाकारों, नागरिकों, किसानों और बाजार—सभी से जुड़ा सवाल है।

अगर फैसला केवल जमीन की कीमत और रियल एस्टेट की मांग के आधार पर होगा, तो अनियोजित विस्तार का खतरा बढ़ सकता है।

अगर योजना केवल सरकारी नक्शों तक सीमित रहेगी, तो स्थानीय जरूरतें पीछे छूट सकती हैं।

और अगर स्थानीय समुदाय की आवाज शामिल नहीं होगी, तो विकास के सामाजिक प्रभावों को समझना मुश्किल होगा।

इसलिए Peri-Urban India का भविष्य भागीदारी, दीर्घकालिक योजना और संतुलित विकास से तय होना चाहिए।

निष्कर्ष: सवाल शहर बनाने का नहीं, रहने योग्य शहर बनाने का है

भारत में शहरीकरण रुकने वाला नहीं है। शहर बढ़ेंगे, नए आवास बनेंगे, रोजगार केंद्र विकसित होंगे और ग्रामीण क्षेत्र धीरे-धीरे शहरी अर्थव्यवस्था से जुड़ेंगे।

लेकिन असली चुनौती शहर के विस्तार की नहीं, शहर के विस्तार की गुणवत्ता की है।

क्या नई कॉलोनियों के साथ स्कूल भी होंगे?

क्या आबादी बढ़ने से पहले पानी की व्यवस्था तैयार होगी?

क्या बारिश के पानी के लिए पर्याप्त प्राकृतिक और कृत्रिम जल निकासी होगी?

क्या सार्वजनिक परिवहन निजी वाहनों पर निर्भरता कम कर पाएगा?

क्या कृषि भूमि और पर्यावरणीय संसाधनों की रक्षा होगी?

और सबसे महत्वपूर्ण—क्या वहां रहने वाले लोगों को सिर्फ मकान मिलेंगे या वास्तव में बेहतर जीवन मिलेगा?

आज गांव और शहर के बीच खड़े ये क्षेत्र भारत के भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

गांव को शहर में शामिल करना एक प्रशासनिक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन उसे रहने योग्य, टिकाऊ और समावेशी शहर बनाना एक बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी है।

इसलिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि—

“ये इलाके गांव हैं या शहर?”

असल सवाल यह है—

“जब ये शहर बनेंगे, तो हम इन्हें कैसा शहर बनने देंगे?”

Loading

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!
🔴
संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल की बैठक लखनऊ गोमती नगर में सम्पन्न हुई • गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर आम आदमी पार्टी की तिरंगा पदयात्रा • डॉ. नेहा सोलंकी को मिला गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रमाणपत्र