देश के रियल एस्टेट सेक्टर से घर खरीदारों के लिए राहत की खबर सामने आई है। दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता यानी IBC व्यवस्था के जरिए अटकी हुई रियल एस्टेट परियोजनाओं में फंसे 1.4 लाख से ज्यादा होम बायर्स को राहत मिली है। वर्षों से अपने घर का इंतजार कर रहे कई खरीदारों के लिए मजबूत डेवलपर्स का संकटग्रस्त प्रोजेक्ट्स को अपने हाथ में लेना एक नई उम्मीद लेकर आया है।
दरअसल, देश में ऐसी कई आवासीय परियोजनाएं हैं जो डेवलपर की आर्थिक परेशानियों, फंड की कमी या कानूनी विवादों के कारण लंबे समय से अधूरी पड़ी हैं। इन परियोजनाओं में पैसा लगाने वाले घर खरीदारों को वर्षों तक अपने घर का कब्जा मिलने का इंतजार करना पड़ा। ऐसे मामलों में IBC के तहत शुरू होने वाली दिवाला समाधान प्रक्रिया के जरिए परियोजनाओं को नए डेवलपर के हाथों में सौंपने का रास्ता खुलता है।
विश्लेषकों और उद्योग जगत के अधिकारियों के अनुसार, आर्थिक रूप से मजबूत डेवलपर्स अब संकटग्रस्त परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं। अदाणी रियल्टी और लोढ़ा जैसी बड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने भी दिवाला समाधान प्रक्रिया के जरिए कुछ संकटग्रस्त परियोजनाओं का अधिग्रहण किया है या उनका जिम्मा संभाला है।
जब किसी अटकी हुई परियोजना को नया डेवलपर मिलता है, तो उसके लिए नई पूंजी जुटाने और निर्माण कार्य को दोबारा शुरू करने की संभावना बढ़ जाती है। इससे उन घर खरीदारों को राहत मिल सकती है जो लंबे समय से अपने फ्लैट का इंतजार कर रहे हैं। कई मामलों में सबसे बड़ी चुनौती यही होती है कि अधूरी परियोजना को दोबारा पटरी पर कैसे लाया जाए और निर्माण पूरा होने तक वित्तीय व्यवस्था कैसे की जाए।
हालांकि, तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। IBC के जरिए कई खरीदारों को राहत मिलने के बावजूद बड़ी संख्या में मामले अभी भी समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, IBC के तहत स्वीकार किए गए 553 रियल एस्टेट दिवाला मामलों से करीब 2.5 लाख घर खरीदार जुड़े हुए हैं। इनमें से केवल लगभग 17 प्रतिशत मामलों का ही सफलतापूर्वक समाधान हो पाया है।
इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में खरीदारों के लिए प्रक्रिया अभी भी जारी है। लंबी कानूनी प्रक्रिया, विभिन्न पक्षों के बीच विवाद और परियोजनाओं की जटिल वित्तीय स्थिति समाधान की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है।
रियल एस्टेट परियोजनाओं के दिवाला मामलों में घर खरीदारों की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि उनके लिए यह सिर्फ एक निवेश नहीं बल्कि अक्सर जीवनभर की बचत और अपने घर का सपना होता है। ऐसे में किसी प्रोजेक्ट का दोबारा शुरू होना उनके लिए आर्थिक और भावनात्मक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण राहत लेकर आता है।
फिलहाल IBC के जरिए 1.4 लाख से अधिक होम बायर्स को मिली राहत यह दिखाती है कि संकटग्रस्त रियल एस्टेट परियोजनाओं को दोबारा शुरू करने में दिवाला समाधान प्रक्रिया की भूमिका हो सकती है। लेकिन करीब 2.5 लाख प्रभावित खरीदारों से जुड़े मामलों में सिर्फ 17 प्रतिशत समाधान का आंकड़ा यह भी बताता है कि अभी बड़ी संख्या में खरीदारों को अपने मामलों के अंतिम समाधान का इंतजार है।
यानी अटकी परियोजनाओं को मजबूत डेवलपर्स का सहारा मिलने से कई घर खरीदारों के लिए उम्मीद जगी है, लेकिन बाकी मामलों में तेज और प्रभावी समाधान अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
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