श्रीलंका में एक सामूहिक कब्र की खुदाई के दौरान बड़ी संख्या में मानव अवशेष मिलने से देश के पुराने गृहयुद्ध की भयावह यादें फिर सामने आ गई हैं। जाफ़ना के पास चेम्मानी इलाके में चल रही खुदाई के दौरान अब तक 582 कंकाल बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें बच्चों और शिशुओं के कंकाल भी शामिल बताए जा रहे हैं। इस खोज ने उन परिवारों के सवालों को फिर सामने ला दिया है, जिनके परिजन श्रीलंका के लंबे गृहयुद्ध के दौरान लापता हो गए थे।
रिपोर्टों के मुताबिक, चेम्मानी में सामूहिक कब्र की खुदाई के दौरान मानव अवशेषों के साथ कई ऐसी चीजें भी मिली हैं, जो वहां दफन लोगों की पहचान और उनकी परिस्थितियों को समझने में अहम हो सकती हैं। खुदाई के दौरान खिलौने, दूध की बोतलें, स्कूल बैग, जूते और चूड़ियां जैसी वस्तुएं मिलने की बात कही गई है। इन सामानों के मिलने के बाद यह मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया है, क्योंकि इससे महिलाओं और बच्चों के भी वहां दफन होने की आशंका जताई जा रही है।
श्रीलंका में लंबे समय तक सरकारी सुरक्षा बलों और लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी LTTE के बीच गृहयुद्ध चला था। LTTE एक स्वतंत्र तमिल राज्य की मांग कर रहा था। यह संघर्ष कई दशकों तक जारी रहा और इसके दौरान बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने और लापता होने की घटनाएं सामने आई थीं। वर्ष 2009 में श्रीलंका का गृहयुद्ध समाप्त हुआ, लेकिन इसके बाद भी हजारों परिवार अपने लापता परिजनों की जानकारी का इंतजार करते रहे।
चेम्मानी में सामने आए मानव अवशेषों ने इसी पुराने सवाल को दोबारा चर्चा में ला दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, खुदाई के दौरान एक ऐसा इंसानी कंकाल भी मिला, जिसके दोनों हाथ छाती पर बंधे हुए थे। हालांकि, इस तरह के अवशेषों को देखकर किसी व्यक्ति की मौत की परिस्थितियों के बारे में निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। इसके लिए फॉरेंसिक जांच और वैज्ञानिक विश्लेषण जरूरी होगा।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल अब इन 582 कंकालों की पहचान को लेकर है। अगर वैज्ञानिक जांच के जरिए इन अवशेषों की पहचान हो पाती है, तो लंबे समय से अपने परिजनों की तलाश कर रहे परिवारों को महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है। डीएनए परीक्षण और अन्य फॉरेंसिक तकनीकों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जा सकती है कि बरामद अवशेष किन लोगों के हैं।
इस पूरी खुदाई में मिली वस्तुएं भी जांच का अहम हिस्सा हो सकती हैं। स्कूल बैग, दूध की बोतलें और खिलौने जैसी चीजें यह समझने में मदद कर सकती हैं कि वहां दफन लोगों में बच्चे या परिवार शामिल थे या नहीं। हालांकि, इन वस्तुओं के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले विशेषज्ञों की जांच जरूरी है।
चेम्मानी की सामूहिक कब्र का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल मानव अवशेषों की बरामदगी का मामला नहीं है, बल्कि श्रीलंका के गृहयुद्ध के दौरान लापता हुए लोगों की वर्षों पुरानी कहानी से जुड़ा हुआ है। जिन परिवारों को आज तक अपने रिश्तेदारों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली, उनके लिए ऐसी खुदाई उम्मीद और चिंता दोनों लेकर आती है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगे होने वाली फॉरेंसिक जांच में क्या सामने आता है। क्या इन 582 कंकालों की पहचान हो पाएगी? क्या इनमें वे लोग शामिल हैं, जो गृहयुद्ध के दौरान लापता हुए थे? और क्या चेम्मानी की यह खुदाई वर्षों पुराने उन सवालों का जवाब दे पाएगी, जिनका इंतजार कई परिवार आज भी कर रहे हैं? फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेंगे।
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