मुंबई में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ता जा रहा है। कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया है कि बड़ी संख्या में लोग अपने नाम दोबारा मतदाता सूची में दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 लेकर भटक रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि कई इलाकों में बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO घर-घर सत्यापन के लिए पहुंचे ही नहीं और लोगों के नाम अनुपस्थित बताकर सूची से बाहर कर दिए गए।
मुंबई में SIR की ड्राफ्ट मतदाता सूची सामने आने के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची में नहीं दिखाई देने की बात सामने आई है। रिपोर्टों के अनुसार, मुंबई में पिछली सूची की तुलना में करीब 35 लाख मतदाता ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं हैं। हालांकि, ड्राफ्ट सूची से नाम गायब होना अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हट जाना नहीं है और पात्र मतदाताओं को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया जा रहा है।
कांग्रेस विधायक का आरोप है कि कई मतदाताओं को अब अपना नाम दोबारा शामिल कराने के लिए फॉर्म-6 की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अगर BLO ने घर-घर जाकर सही तरीके से सत्यापन किया होता, तो लोगों को इस तरह परेशान नहीं होना पड़ता। हालांकि, ये आरोप कांग्रेस विधायक के हैं और इनके हर हिस्से की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
महाराष्ट्र में SIR के दौरान भी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं हुए। अधिकारियों के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में पिछली सूची के करीब 9.79 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 7.72 करोड़ नाम ही ड्राफ्ट रोल में शामिल हुए। करीब 2.07 करोड़ मतदाता ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं थे। अधिकारियों ने इसके पीछे अनुपस्थिति, स्थायी रूप से स्थान बदलना, मृत्यु और अन्य कारण बताए हैं।
मुंबई के मामले में भी अनुपस्थित मतदाताओं की संख्या को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ड्राफ्ट सूची में मुंबई के करीब 35 फीसदी मतदाता कम दिखाई देने की बात सामने आई है। इसके बाद चुनाव कार्यालय की ओर से मतदाताओं को अपने नाम की स्थिति जांचने और जरूरत पड़ने पर दावा या आपत्ति दर्ज कराने के लिए कहा गया है।
इस बीच महाराष्ट्र में दावा और आपत्ति दर्ज कराने की समयसीमा भी बढ़ाई गई है। चुनाव आयोग ने पहले 30 सितंबर तक की समयसीमा तय की थी, जिसे बढ़ाकर 12 अक्टूबर कर दिया गया है। यानी जिन पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, उन्हें अपना पक्ष रखने और नाम शामिल कराने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है।
फॉर्म-6 नए मतदाता के पंजीकरण और मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। महाराष्ट्र में SIR के बाद नाम छूटे लोगों को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत इसका इस्तेमाल करने का रास्ता उपलब्ध है। चुनाव कार्यालय ने नाम छूटे मतदाताओं तक पहुंचने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में भी अभियान चलाने की जानकारी दी है।
चुनाव आयोग की ओर से यह भी कहा गया है कि SIR प्रक्रिया में छूटे पात्र मतदाताओं की मदद के लिए BLO घर-घर जाकर दस्तावेज लेने की व्यवस्था कर सकते हैं। सुनवाई की प्रक्रिया को भी आसान बनाने और जरूरत वाले मामलों में BLO के जरिए दस्तावेज जुटाने की व्यवस्था की जानकारी दी गई है।
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची से बाहर हुए पात्र मतदाताओं के नाम कितनी तेजी से दोबारा शामिल किए जाते हैं। एक तरफ विपक्षी दल प्रक्रिया में गड़बड़ी और लापरवाही के आरोप लगा रहे हैं, वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि ड्राफ्ट सूची अंतिम सूची नहीं है और पात्र नागरिकों के लिए दावा-आपत्ति की प्रक्रिया खुली है।
फिलहाल मुंबई में SIR को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं होने का मुद्दा चर्चा में बना हुआ है। अब 12 अक्टूबर तक आने वाले दावों और आपत्तियों तथा उनके निस्तारण के बाद ही तस्वीर ज्यादा स्पष्ट होगी कि कितने मतदाताओं के नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल किए जाते हैं।
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