Thursday, May 7, 2026
Homeताजा खबर“खून का रिश्ता ही प्रेम नहीं होता” — बुजुर्ग मांओं की हालत...

“खून का रिश्ता ही प्रेम नहीं होता” — बुजुर्ग मांओं की हालत पर आचार्य प्रशांत का दर्द

मशहूर लेखक और आध्यात्मिक वक्ता Acharya Prashant ने बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी और परिवारों में बदलते रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आज के समय में कई बेटे अपनी मां को सम्मान और अपनापन देने के बजाय “बैडमिंटन की शटल” की तरह एक-दूसरे के पाले में भेजते रहते हैं। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

आचार्य प्रशांत ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में समाज की उस कड़वी सच्चाई की ओर ध्यान दिलाया, जिसे अक्सर परिवार छिपाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि बहुत कम बेटे ऐसे होते हैं जो वास्तव में अपनी मां की देखभाल और सम्मान करते हैं। कई मामलों में बुजुर्ग मां को परिवार के किसी कोने में अकेला छोड़ दिया जाता है या फिर कुछ महीनों के अंतराल पर एक बेटे से दूसरे बेटे के घर भेज दिया जाता है।

उन्होंने कहा कि अगर किसी मां के दो बेटे हों, तो अक्सर दोनों यही कोशिश करते हैं कि मां ज्यादा समय उनके पास न रहे। यह स्थिति बिल्कुल बैडमिंटन के खेल जैसी हो जाती है, जहां शटल को जल्दी से दूसरे कोर्ट में भेजना ही लक्ष्य होता है। आचार्य प्रशांत ने कहा कि मां के साथ ऐसा व्यवहार बेहद दुखद और संवेदनहीन है।

अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि जब किसी बुजुर्ग मां से पूछा जाता है कि वह बार-बार एक शहर से दूसरे शहर क्यों जाती हैं, तो वह अक्सर अपने बच्चों की सच्चाई छिपा लेती हैं। मां यही कहती है कि “हमें तो दोनों बेटों के घर का सुख मिलता है।” लेकिन हकीकत में कई बार उन्हें बहुओं और परिवार की अनदेखी या तानों का सामना करना पड़ता है।

आचार्य प्रशांत ने कहा कि समाज में यह धारणा गलत है कि केवल खून का रिश्ता होने से प्रेम अपने आप पैदा हो जाता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रेम एक अलग चीज है, जिसे व्यवहार, सम्मान और संवेदनशीलता से निभाना पड़ता है। रिश्ते सिर्फ जन्म से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और इंसानियत से मजबूत होते हैं।

सोशल मीडिया पर उनका यह वीडियो काफी चर्चा में है। कई लोगों ने उनकी बातों को समाज की सच्चाई बताया, जबकि कुछ लोगों ने कहा कि हर परिवार ऐसा नहीं होता। फिर भी बुजुर्गों की उपेक्षा का मुद्दा आज भी भारतीय समाज में गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बदलती जीवनशैली, नौकरी की भागदौड़ और संयुक्त परिवारों के टूटने की वजह से बुजुर्गों की स्थिति पहले जैसी नहीं रही। कई बुजुर्ग अकेलेपन और भावनात्मक उपेक्षा का सामना कर रहे हैं। ऐसे में आचार्य प्रशांत का यह बयान लोगों को रिश्तों और पारिवारिक जिम्मेदारियों पर सोचने के लिए मजबूर कर रहा है।

परिवार और समाज में बुजुर्गों का सम्मान भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे में माता-पिता की देखभाल केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नैतिक कर्तव्य भी है। आचार्य प्रशांत का यह संदेश आज के समाज के लिए एक बड़ी सीख के रूप में देखा जा रहा है।

Loading

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!
🔴
संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल की बैठक लखनऊ गोमती नगर में सम्पन्न हुई • गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर आम आदमी पार्टी की तिरंगा पदयात्रा • डॉ. नेहा सोलंकी को मिला गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रमाणपत्र