प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति यानी CCEA ने भारतीय रेलवे की 10,783 करोड़ रुपये की लागत वाली तीन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इन परियोजनाओं के जरिए देश के पांच राज्यों में रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाई जाएगी। सरकार के मुताबिक, इन परियोजनाओं से करीब 656 किलोमीटर लंबे रेल नेटवर्क का विस्तार होगा और यात्री व माल परिवहन को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
स्वीकृत की गई तीनों परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों से होकर गुजरेंगी। इनके पूरा होने के बाद करीब 4,790 गांवों को बेहतर रेल कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है। इन गांवों में लगभग 56 लाख लोग रहते हैं। सरकार का कहना है कि नए और अतिरिक्त रेल ट्रैक बनने से इन क्षेत्रों में आवागमन आसान होगा और मौजूदा रेल नेटवर्क पर दबाव भी कम किया जा सकेगा।
इन परियोजनाओं में खड़गपुर-झारसुगुड़ा खंड और कटनी-पेंड्रा रोड खंड के बीच चौथी रेल लाइन का निर्माण शामिल है। इसके अलावा बिलासपुर यानी उसलापुर से पेंड्रा रोड के बीच तीसरी रेल लाइन बनाई जाएगी। इन मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं का उद्देश्य रेल लाइनों की क्षमता बढ़ाकर अधिक ट्रेनों को सुचारू रूप से चलाना और माल ढुलाई के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार करना है।
रेल मंत्रालय के मुताबिक, अतिरिक्त ट्रैक उपलब्ध होने से रेल परिचालन में सुधार होगा। इससे ट्रेनों के संचालन में होने वाली भीड़भाड़ को कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही परिचालन दक्षता बढ़ेगी और यात्रियों तथा माल ढुलाई से जुड़ी रेल सेवाओं की विश्वसनीयता बेहतर होने की उम्मीद है। लंबे समय में इन परियोजनाओं से संबंधित क्षेत्रों में रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।
इन परियोजनाओं का महत्व केवल रेल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटन के लिहाज से भी इन्हें अहम माना जा रहा है। सरकार के अनुसार, परियोजनाओं के तहत आने वाले मार्गों से तारातरणी मंदिर, श्रीक्षेत्र जगन्नाथ मंदिर, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम और अचानकमार टाइगर रिजर्व जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क बेहतर होगा।
इसके अलावा खुटाघाट बांध, मल्हार के पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर जैसे महत्वपूर्ण स्थानों को भी बेहतर रेल कनेक्टिविटी का फायदा मिलने की उम्मीद है। बेहतर रेल नेटवर्क से इन स्थानों पर आने-जाने वाले यात्रियों, पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए यात्रा सुविधाजनक हो सकती है।
माल ढुलाई के लिहाज से भी ये परियोजनाएं काफी महत्वपूर्ण हैं। प्रस्तावित रेल मार्गों का इस्तेमाल कोयला, सीमेंट, लौह और इस्पात जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं के परिवहन के लिए किया जाता है। अतिरिक्त रेल लाइन बनने से इन वस्तुओं को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने की क्षमता बढ़ेगी। सरकार का अनुमान है कि परियोजनाओं के पूरा होने के बाद हर साल करीब 2.7 करोड़ टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी।
सरकार ने इन परियोजनाओं के पर्यावरणीय फायदे भी बताए हैं। अनुमान के मुताबिक, रेल परिवहन की क्षमता बढ़ने और माल ढुलाई को बेहतर तरीके से संचालित करने से करीब 12 करोड़ लीटर तेल के आयात में कमी आ सकती है। इसके साथ ही करीब 62 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होने का अनुमान है। सरकार के अनुसार, यह कमी लगभग 2.48 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर होगी।
कुल मिलाकर CCEA की ओर से मंजूर की गई 10,783 करोड़ रुपये की ये तीन परियोजनाएं रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इनसे पांच राज्यों के 14 जिलों में रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी, हजारों गांवों को फायदा मिलेगा और माल ढुलाई की क्षमता में भी बड़ा इजाफा होगा। इसके साथ ही पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और पर्यावरण के क्षेत्र में भी इन परियोजनाओं के सकारात्मक प्रभाव की उम्मीद की जा रही है।
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