भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इसी दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप GalaxEye ने अपना पहला कमर्शियल पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ‘दृष्टि’ सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया है। इस सैटेलाइट को दुनिया की अग्रणी स्पेस कंपनी SpaceX के फाल्कन-9 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया।
क्या है ‘दृष्टि’ सैटेलाइट की खासियत?
‘दृष्टि’ को दुनिया का पहला “ऑप्टोसार” (Optical + SAR) सैटेलाइट बताया जा रहा है। इसका मतलब है कि इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कैमरा और सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) दोनों तकनीकों को एक ही प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया है।
ऑप्टिकल तकनीक साफ और हाई-क्वालिटी तस्वीरें देती है
SAR तकनीक बादलों, धुंध और रात में भी काम करती है
इन दोनों के संयोजन से यह सैटेलाइट हर मौसम और हर समय निगरानी करने में सक्षम बनता है—जो इसे बेहद खास बनाता है।
तकनीकी क्षमता और फीचर्स
करीब 190 किलोग्राम वजनी यह सैटेलाइट भारत का अब तक का सबसे बड़ा निजी तौर पर विकसित पृथ्वी अवलोकन उपग्रह माना जा रहा है।
लगभग 1.5 मीटर रिज़ॉल्यूशन तक की तस्वीरें
हर 7–10 दिन में उसी स्थान की दोबारा निगरानी
AI आधारित डेटा प्रोसेसिंग सिस्टम
अंतरिक्ष में ही डेटा का प्रारंभिक विश्लेषण
कंपनी के मुताबिक, इससे डेटा प्रोसेसिंग तेज होगी और जमीन पर निर्णय लेने में मदद मिलेगी।
किन क्षेत्रों में होगा इस्तेमाल?
‘दृष्टि’ सैटेलाइट कई महत्वपूर्ण सेक्टर्स में गेमचेंजर साबित हो सकता है:
सीमा सुरक्षा और रक्षा निगरानी
आपदा प्रबंधन (बाढ़, चक्रवात)
कृषि और फसल निगरानी
इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग
बीमा और जोखिम आकलन
खास बात यह है कि खराब मौसम या बादलों के दौरान भी यह सैटेलाइट लगातार डेटा उपलब्ध कराएगा, जहां सामान्य सैटेलाइट फेल हो जाते हैं।
SpaceX के साथ लॉन्च—क्यों है खास?
इस मिशन को Falcon 9 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया, जो दुनिया के सबसे भरोसेमंद लॉन्च वाहनों में से एक माना जाता है। इससे भारतीय निजी कंपनियों की वैश्विक स्तर पर बढ़ती साख का भी संकेत मिलता है।
आगे की योजना
कंपनी के सह-संस्थापक सुयश सिंह के अनुसार, आने वाले 4 वर्षों में 8 से 12 सैटेलाइट्स का समूह (Constellation) तैयार करने की योजना है। इससे पृथ्वी की निगरानी और डेटा कलेक्शन क्षमता और अधिक मजबूत होगी।
निष्कर्ष
GalaxEye का ‘दृष्टि’ सैटेलाइट भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित हो सकता है। यह मिशन न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत को वैश्विक स्पेस मार्केट में एक मजबूत प्रतिस्पर्धी के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी एक अहम कदम है।
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