Sunday, July 5, 2026
Homeताजा खबर'ईथा' टाइटल विवाद खत्म! विठाबाई की बेटी ने श्रद्धा कपूर की फिल्म...

‘ईथा’ टाइटल विवाद खत्म! विठाबाई की बेटी ने श्रद्धा कपूर की फिल्म का किया समर्थन, पोते की आपत्ति को बताया गलत

बॉलीवुड अभिनेत्री श्रद्धा कपूर की आगामी बायोपिक ‘ईथा’ इन दिनों लगातार चर्चा में बनी हुई है। यह फिल्म महाराष्ट्र की महान लावणी और तमाशा कलाकार विठाबाई नारायणगांवकर के जीवन पर आधारित है। फिल्म की घोषणा के बाद इसके टाइटल को लेकर विवाद खड़ा हो गया था, लेकिन अब इस पूरे मामले में नया मोड़ आ गया है। विठाबाई की सबसे बड़ी बेटी ने सामने आकर फिल्म के नाम का समर्थन किया है और स्पष्ट कर दिया है कि परिवार को इस टाइटल से कोई आपत्ति नहीं है।

फिल्म के नाम को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब विठाबाई नारायणगांवकर के पोते मोहित नारायणगांवकर ने आपत्ति जताते हुए कहा कि फिल्म के शीर्षक में उनकी दादी का पूरा नाम शामिल किया जाना चाहिए। उनका मानना था कि इससे उनकी विरासत और पहचान अधिक सम्मानजनक तरीके से दर्शकों तक पहुंचेगी। इस बयान के बाद सोशल मीडिया और फिल्म जगत में इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई।

इस बीच कुछ सांस्कृतिक संगठनों और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भी अपनी राय रखी। उनका कहना था कि फिल्म के निर्माण से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन शीर्षक पर एक बार फिर विचार किया जाना चाहिए ताकि किसी तरह का भ्रम या विवाद पैदा न हो। हालांकि, यह बहस ज्यादा दिनों तक नहीं चली क्योंकि परिवार की ओर से नया बयान सामने आ गया।

विठाबाई नारायणगांवकर की सबसे बड़ी बेटी और प्रसिद्ध तमाशा कलाकार मंगला बनसोडे करावडीकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें फिल्म के टाइटल ‘ईथा’ से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने बेटे मोहित से भी इस विषय पर आगे कोई सार्वजनिक बयान न देने का अनुरोध किया है क्योंकि परिवार इस नाम को पूरी तरह स्वीकार करता है।

मंगला बनसोडे ने बताया कि उनकी मां जब महाराष्ट्र के अलग-अलग गांवों में तमाशा और लावणी प्रस्तुत करती थीं, तब स्थानीय लोग उन्हें प्यार से ‘ईथा’ कहकर बुलाते थे। यही कारण है कि फिल्म का यह शीर्षक उनकी लोकप्रिय पहचान से जुड़ा हुआ है और इसमें किसी प्रकार की आपत्तिजनक बात नहीं है।

उन्होंने यह भी बताया कि वह स्वयं सात वर्ष की उम्र से मंच पर प्रस्तुति देती रही हैं और बचपन से लोगों को अपनी मां को इसी नाम से पुकारते हुए सुनती आई हैं। फिल्म के निर्माण के दौरान उन्होंने यह ऐतिहासिक जानकारी निर्देशक को भी दी थी ताकि कहानी और शीर्षक दोनों वास्तविक तथ्यों के अनुरूप रहें।

मंगला बनसोडे ने फिल्म को लेकर अपनी खुशी भी व्यक्त की। उनका कहना है कि यह बायोपिक केवल उनकी मां के जीवन की कहानी नहीं है, बल्कि भारतीय लोककला, तमाशा और लावणी की समृद्ध परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। उन्हें विश्वास है कि दर्शक इस फिल्म के जरिए विठाबाई नारायणगांवकर के संघर्ष, समर्पण और कला के प्रति उनके जुनून को करीब से जान सकेंगे।

विठाबाई नारायणगांवकर महाराष्ट्र की सबसे सम्मानित लोक कलाकारों में गिनी जाती हैं। उन्होंने अपने लंबे कला जीवन में तमाशा और लावणी जैसी लोककलाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उन्हें दो बार राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित किया गया और महाराष्ट्र सरकार ने उन्हें ‘तमाशा सम्राज्ञी’ की उपाधि देकर उनकी कला का सम्मान किया।

अब जबकि टाइटल विवाद लगभग समाप्त हो चुका है, श्रद्धा कपूर की इस बहुप्रतीक्षित फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और भी बढ़ गई है। यह बायोपिक 28 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। उम्मीद की जा रही है कि यह फिल्म मनोरंजन के साथ-साथ भारतीय लोकसंस्कृति और एक महान कलाकार की प्रेरणादायक यात्रा को भी बड़े पर्दे पर प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करेगी।

Loading

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!
🔴
संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल की बैठक लखनऊ गोमती नगर में सम्पन्न हुई • गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर आम आदमी पार्टी की तिरंगा पदयात्रा • डॉ. नेहा सोलंकी को मिला गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रमाणपत्र