एचडीएफसी बैंक के शेयरों में 8 अक्टूबर को दबाव देखने को मिला। सितंबर तिमाही के शेयरधारिता आंकड़ों में विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की हिस्सेदारी में 2.43 प्रतिशत अंक की कमी सामने आने के बाद बैंक का शेयर दिन के कारोबार में 1 प्रतिशत से ज्यादा गिर गया। कारोबारी सत्र के अंत में एचडीएफसी बैंक का शेयर 1.49 प्रतिशत की गिरावट के साथ 692.25 रुपये पर बंद हुआ।
सितंबर तिमाही के दौरान विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 41.82 प्रतिशत से घटकर 39.39 प्रतिशत रह गई। यानी विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बैंक में अपनी हिस्सेदारी 2.43 प्रतिशत अंक कम की। इसके उलट घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार सितंबर तिमाही में घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी करीब 43.44 प्रतिशत रही।
विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी में यह कमी ऐसे समय आई है जब एचडीएफसी बैंक के शेयर पहले से ही बाजार में दबाव में रहे हैं। 8 अक्टूबर को दिन के कारोबार में शेयर 690 रुपये के आसपास तक फिसला और बाद में 692.25 रुपये पर बंद हुआ। इस दौरान निवेशक बैंक की शेयरधारिता में हुए बदलाव के साथ-साथ नए नेतृत्व और आने वाले तिमाहियों के प्रदर्शन पर भी नजर बनाए हुए हैं।
बैंक के लिए इस समय सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रम नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनूप बागची की नियुक्ति भी है। बागची एचडीएफसी बैंक के पहले ऐसे सीईओ होंगे जो बैंक के आंतरिक नेतृत्व से नहीं आए हैं। वह इससे पहले आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रहे हैं और आईसीआईसीआई बैंक में भी वरिष्ठ जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उनकी नियुक्ति 27 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने की जानकारी दी गई है।
बागची के अनुभव को देखते हुए कई विश्लेषक उनकी नियुक्ति को बैंक के लिए महत्वपूर्ण बदलाव के तौर पर देख रहे हैं। हालांकि, नए नेतृत्व के सामने शुरुआती दौर में टीम और कामकाज से जुड़े बदलावों को व्यवस्थित करने की चुनौती भी रह सकती है। नुवामा के विश्लेषक आनंद दामा के अनुसार, शुरुआत में बागची को अपनी टीम को मजबूत करने पर ध्यान देना पड़ सकता है और लंबे समय में उनके अनुभव से नए विचार आने तथा प्रशासन से जुड़ी चिंताओं को कम करने में मदद मिल सकती है।
एचडीएफसी बैंक के हालिया कारोबारी आंकड़ों में जमा और कर्ज दोनों में अच्छी वृद्धि दिखाई दी है। सितंबर के अंत तक बैंक की जमा राशि में सालाना आधार पर करीब 18.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि सकल अग्रिम में करीब 16.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। ऐसे में निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि नए नेतृत्व के तहत बैंक इस वृद्धि को किस तरह आगे बढ़ाता है।
एचडीएफसी बैंक के शेयरों पर 2023 में मूल कंपनी एचडीएफसी के साथ हुए विलय के बाद से ही वृद्धि और मार्जिन को लेकर बाजार में चर्चा रही है। इस बीच बैंक में नेतृत्व से जुड़े बदलावों ने भी निवेशकों का ध्यान खींचा है। अनूप बागची की नियुक्ति के बाद बाजार अब यह देख रहा है कि वह बैंक की रणनीति, संचालन और निवेशकों के भरोसे को किस तरह आगे बढ़ाते हैं।
घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़ना और विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी घटना शेयरधारिता पैटर्न में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। सितंबर तिमाही में म्यूचुअल फंड की हिस्सेदारी भी बढ़कर 31.88 प्रतिशत हो गई। इससे पता चलता है कि विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी की दिशा इस तिमाही में अलग-अलग रही।
फिलहाल एचडीएफसी बैंक के शेयर में गिरावट को केवल एफआईआई हिस्सेदारी में कमी से जोड़ना पूरी तस्वीर नहीं बताता। शेयर पर व्यापक बाजार की स्थिति, बैंक के नेतृत्व में बदलाव, विलय के बाद की परिचालन चुनौतियां और आने वाले तिमाहियों के वित्तीय प्रदर्शन जैसे कई कारकों का असर पड़ रहा है। इसलिए निवेशकों के लिए शेयरधारिता आंकड़ों के साथ बैंक के आगामी परिणाम और नई प्रबंधन टीम की रणनीति पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा।
एचडीएफसी बैंक के लिए आने वाला समय नए नेतृत्व की दिशा तय करने वाला हो सकता है। अनूप बागची के सामने बैंक की वृद्धि को बनाए रखने, जमा और कर्ज के बीच संतुलन सुधारने तथा निवेशकों के भरोसे को मजबूत करने जैसी कई जिम्मेदारियां होंगी। वहीं विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी में आई कमी यह संकेत देती है कि बाजार में बैंक के भविष्य को लेकर अलग-अलग राय बनी हुई है। आने वाली तिमाहियों में बैंक का वास्तविक प्रदर्शन ही यह स्पष्ट करेगा कि नए नेतृत्व के तहत उसकी कहानी किस दिशा में आगे बढ़ती है।
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