क्या शतावरी का पानी पीने से पीरियड्स का दर्द और ऐंठन कम हो सकती है? महिलाओं की सेहत से जुड़ा यह सवाल इन दिनों चर्चा में है। आयुर्वेद में शतावरी को महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी एक पारंपरिक जड़ी-बूटी माना जाता है। इसे मासिक धर्म, प्रजनन स्वास्थ्य और शरीर के सामान्य स्वास्थ्य को सहारा देने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है। लेकिन क्या इसका पानी पीने से हार्मोन संतुलित होते हैं, पीरियड्स नियमित होते हैं और गर्भधारण की संभावना बढ़ती है? इन दावों को समझना जरूरी है।
महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव, तनाव, नींद की कमी, खानपान और जीवनशैली का असर मासिक चक्र पर पड़ सकता है। कई महिलाओं को पीरियड्स से पहले पेट में ऐंठन, कमर दर्द, थकान, चिड़चिड़ापन या मनोदशा में बदलाव महसूस होता है। कुछ महिलाओं के पीरियड्स अनियमित भी हो सकते हैं। ऐसी परेशानियों के लिए घरेलू और पारंपरिक उपाय अपनाए जाते हैं, जिनमें शतावरी भी शामिल है।
शतावरी, जिसे अंग्रेजी में एस्पैरागस रेसिमोसस कहा जाता है, आयुर्वेद में लंबे समय से इस्तेमाल की जाने वाली जड़ी-बूटी है। इसे महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, पारंपरिक उपयोग और किसी बीमारी के इलाज के लिए वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित प्रभाव, दोनों अलग-अलग बातें हैं। इसलिए शतावरी को पीरियड्स की हर समस्या का पक्का इलाज मानना सही नहीं होगा।
शतावरी पर कुछ शुरुआती वैज्ञानिक अध्ययन हुए हैं। वर्ष 2026 में प्रकाशित एक छोटे नियंत्रित अध्ययन में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी पीसीओएस से प्रभावित 70 महिलाओं को शामिल किया गया था। 12 सप्ताह तक शतावरी के मानकीकृत अर्क का अध्ययन किया गया। इसमें कुछ प्रजनन-संबंधी मापों और तनाव के स्तर में बदलाव दर्ज किए गए, लेकिन हार्मोन के स्तर और अंडाशय के आकार में महत्वपूर्ण अंतर नहीं मिला। यह अध्ययन शुरुआती जानकारी देता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि शतावरी का पानी पीरियड्स का दर्द दूर करता है या गर्भधारण की क्षमता बढ़ाता है।
महिलाओं की यौन सेहत पर किए गए एक अन्य अध्ययन में भी शतावरी के मानकीकृत अर्क का परीक्षण किया गया। इसमें कुछ प्रतिभागियों के यौन स्वास्थ्य से जुड़े आकलनों में सुधार देखा गया। लेकिन यह अध्ययन पीरियड्स की ऐंठन के इलाज या गर्भधारण की सफलता को साबित करने के लिए नहीं था। इसलिए इन परिणामों को सीधे मासिक धर्म के दर्द या फर्टिलिटी पर लागू नहीं किया जा सकता।
अब सवाल है कि शतावरी का पानी कैसे पिया जाए? उपलब्ध जानकारी में शतावरी की जड़ या उसके अर्क के उपयोग का उल्लेख मिलता है, लेकिन पीरियड्स के दर्द के लिए शतावरी का पानी बनाने और पीने की कोई सर्वमान्य, प्रमाणित मात्रा स्थापित नहीं है। इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के इसकी खुराक तय करना या नियमित सेवन शुरू करना उचित नहीं है। खासकर गर्भवती महिलाएं, गर्भधारण की कोशिश कर रही महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं या पहले से कोई दवा ले रही महिलाएं इसका सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
पीरियड्स में ऐंठन से राहत के लिए पेट के निचले हिस्से पर गर्म पानी की थैली रखना, हल्की शारीरिक गतिविधि करना और पर्याप्त आराम लेना कुछ लोगों को मदद दे सकता है। यदि दर्द बहुत तेज हो, रोजमर्रा के काम प्रभावित हों, रक्तस्राव बहुत ज्यादा हो या पीरियड्स लगातार अनियमित रहें, तो इसे केवल घरेलू उपायों से संभालने के बजाय स्त्री रोग विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। इसके पीछे एंडोमेट्रियोसिस, पीसीओएस या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
कुल मिलाकर, शतावरी महिलाओं के स्वास्थ्य के संदर्भ में अध्ययन का विषय जरूर है, लेकिन पीरियड्स का दर्द, हार्मोन असंतुलन और बांझपन दूर करने के इसके दावों की पुष्टि के लिए अभी और मजबूत वैज्ञानिक प्रमाणों की जरूरत है। इसे चमत्कारी इलाज समझने के बजाय सावधानी और विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही इस्तेमाल करना चाहिए।
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