केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग के अधिकारियों से ईमानदार करदाताओं के लिए कर प्रक्रिया को और सरल बनाने तथा जानबूझकर कर चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि आयकर विभाग की भूमिका अब केवल टैक्स वसूली तक सीमित नहीं है, बल्कि पारदर्शिता, तकनीक, दक्षता और करदाताओं को बेहतर सेवाएं देना भी इसकी अहम जिम्मेदारी है।
टैक्स प्रशासन के लिए बताईं 5 प्रमुख प्राथमिकताएं
167वें आयकर दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में वित्त मंत्री ने उत्तरदायी कर प्रशासन के लिए पांच प्रमुख प्राथमिकताओं पर जोर दिया। इनमें पहचान (Identify), प्रतिक्रिया (Respond), निवारण (Resolve), समीक्षा (Review) और सुधार (Reform) शामिल हैं। उनका कहना था कि इन सिद्धांतों के आधार पर आयकर व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक आधारित बनाया जाएगा।
Income Tax Act 2025 से प्रक्रिया हुई आसान
निर्मला सीतारमण ने कहा कि आयकर अधिनियम 2025 लागू होने के बाद कर कानूनों को सरल बनाया गया है। इससे अनिश्चितता कम हुई है और कर अनुपालन (Compliance) की लागत भी घटी है। उन्होंने बताया कि नए कानून का उद्देश्य करदाताओं के लिए प्रक्रिया को आसान बनाना और टैक्स सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाना है।
ई-फाइलिंग पोर्टल की क्षमता में हुआ बड़ा सुधार
वित्त मंत्री ने कहा कि इस बार आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल की क्षमता पहले से कहीं अधिक मजबूत की गई है। विभाग ने एक ही दिन में 1 करोड़ से अधिक करदाताओं के लॉगिन और रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संभाला। व्यस्त समय में यह संख्या 1.6 करोड़ तक पहुंच गई, जिससे तकनीकी ढांचे की मजबूती का पता चलता है।
ITR दाखिल करने और रिफंड में आई तेजी
सरकार के अनुसार, 21 जुलाई तक मौजूदा वित्त वर्ष में 3.2 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल किए जा चुके हैं। इनमें से लगभग 94 प्रतिशत रिटर्न का सत्यापन और 60 प्रतिशत का निपटान किया जा चुका है। इसके अलावा 1.3 करोड़ से अधिक रिफंड दावों में से 96 प्रतिशत का सत्यापन और लगभग 40 प्रतिशत का भुगतान किया जा चुका है।
वित्त मंत्री ने कहा कि समय पर रिफंड मिलने से करदाताओं का भरोसा बढ़ता है और उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत होती है।
ईमानदार करदाताओं को मिलेगी सुविधा
निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य ईमानदार करदाताओं को अधिक से अधिक सुविधा देना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यदि किसी करदाता से वास्तविक गलती होती है तो उसे सुधारने का अवसर दिया जाना चाहिए। वहीं, जानबूझकर टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि आयकर अधिकारियों को अपने अधिकारों का उपयोग विनम्रता और संवेदनशीलता के साथ करना चाहिए, क्योंकि करदाता केवल टैक्स देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि देश के विकास का महत्वपूर्ण भागीदार भी है।
विवाद कम करने पर रहेगा फोकस
वित्त मंत्री ने कर विवादों को कम करने और कर व्यवस्था में निश्चितता बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभाग को केवल विवादों के समाधान तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करनी चाहिए जिससे विवाद पैदा ही न हों। इससे स्वैच्छिक कर अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा।
शिकायतों के निपटारे में भी सुधार
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के चेयरमैन रवि अग्रवाल ने बताया कि विभाग ने शिकायतों के निपटारे में भी उल्लेखनीय सुधार किया है। पिछले वित्त वर्ष में CPGRAMS के तहत प्राप्त अधिकांश शिकायतों का समाधान किया गया, जबकि ई-निवारण पोर्टल पर आई करीब 95 प्रतिशत शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण किया गया।
निष्कर्ष
सरकार का लक्ष्य आयकर प्रणाली को अधिक Tech-Driven, पारदर्शी और करदाता-अनुकूल बनाना है। नए कानून, मजबूत डिजिटल व्यवस्था, तेज रिफंड प्रक्रिया और विवादों को कम करने की रणनीति से आने वाले समय में करदाताओं को अधिक सुविधाजनक और भरोसेमंद टैक्स सिस्टम मिलने की उम्मीद है।
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