ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं। अमेरिका ने सऊदी अरब और कतर में दो अतिरिक्त Patriot मिसाइल बैटरियां तैनात की हैं। इनका मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के महत्वपूर्ण तेल और प्राकृतिक गैस ठिकानों को संभावित हमलों से बचाने के लिए हवाई सुरक्षा मजबूत करना है।
रिपोर्टों के मुताबिक, एक Patriot यूनिट सऊदी अरब के एक बड़े तेल ठिकाने की सुरक्षा के लिए भेजी गई है, जबकि दूसरी यूनिट कतर की एक प्रमुख गैस सुविधा के आसपास तैनात की गई है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव की आशंका को लेकर खाड़ी देशों में चिंता बनी हुई है।
खाड़ी देशों को आशंका है कि अगर अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई करता है, तो जवाबी कार्रवाई में ईरान क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों के साथ-साथ सहयोगी देशों के महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे को भी निशाना बना सकता है। ऐसे में सऊदी अरब और कतर की तेल और गैस सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर अमेरिकी सैन्य तैयारियां बढ़ाई जा रही हैं।
Patriot मिसाइल डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल मुख्य रूप से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को रोकने के लिए किया जाता है। लेकिन इसी के साथ अमेरिकी मिसाइल रक्षा क्षमता को लेकर एक और चिंता सामने आई है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि ईरान से जुड़े संघर्ष के दौरान अमेरिका ने बड़ी संख्या में Patriot इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल किया है।
कुछ आकलनों के अनुसार, अमेरिकी भंडार में Patriot इंटरसेप्टर की संख्या अब 1,000 से कम रह गई है। इससे लंबे समय तक चलने वाले संभावित संघर्ष में मिसाइल रक्षा प्रणालियों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अलग-अलग आकलनों में वास्तविक स्टॉक की संख्या अलग बताई गई है और यह आंकड़ा लगातार बदल भी सकता है।
इस बीच अमेरिका की मध्य पूर्व में व्यापक सैन्य मौजूदगी भी बढ़ रही है। क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य संसाधनों की तैनाती की जा रही है। इसका उद्देश्य अमेरिकी सैनिकों, सहयोगी देशों और महत्वपूर्ण ठिकानों की सुरक्षा को मजबूत करना बताया जा रहा है।
खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सऊदी अरब और कतर वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इन सुविधाओं पर किसी बड़े हमले का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल सऊदी अरब और कतर में Patriot की अतिरिक्त तैनाती से संकेत मिलता है कि अमेरिका संभावित मिसाइल हमलों के खतरे को गंभीरता से ले रहा है। अब नजर इस बात पर है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव आगे किस दिशा में जाता है और क्या खाड़ी क्षेत्र में मौजूद महत्वपूर्ण ऊर्जा ढांचे को लेकर सुरक्षा तैयारियां और बढ़ाई जाती हैं।
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