Wednesday, May 27, 2026
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CEC Gyanesh Kumar पर लगे आरोपों को Supreme Court के फैसले से झटका? SIR Verdict पर सियासत तेज

Supreme Court of India के हालिया फैसले ने चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को संवैधानिक रूप से वैध ठहराते हुए देश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। इस फैसले के बाद विपक्ष द्वारा लगाए गए “वोट चोरी” और मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar के खिलाफ महाभियोग की मांग पर सवाल उठने लगे हैं।

मुख्य न्यायाधीश Surya Kant और न्यायमूर्ति Joymalya Bagchi की पीठ ने अपने फैसले में साफ कहा कि निर्वाचन आयोग द्वारा अपनाई गई SIR प्रक्रिया जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के अनुरूप है। अदालत ने माना कि यह प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू की गई है।

दरअसल, विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया था कि मतदाता सूची से नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया के जरिए चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश हो रही है। कई विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त पर “वोट चोरी” जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इतना ही नहीं, संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाने की चर्चा भी तेज हो गई थी।

लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने निर्वाचन आयोग के अधिकारों और प्रक्रिया को कानूनी मान्यता दे दी है। अदालत ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती केवल मतदान प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता सूची की शुद्धता और विश्वसनीयता भी उतनी ही जरूरी है।

पीठ ने अपने फैसले में कहा कि निर्वाचन आयोग को संविधान और कानून के तहत यह अधिकार प्राप्त है कि वह मतदाता सूची की जांच करे और जरूरत पड़ने पर नागरिकता से जुड़े सीमित पहलुओं की समीक्षा भी कर सके। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम फैसला नहीं होगा, बल्कि केवल चुनावी पात्रता तक सीमित रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उन्हें न्यायिक समीक्षा का अधिकार रहेगा। यानी यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके साथ अन्याय हुआ है, तो वह अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।

फैसले में अदालत ने निर्वाचन आयोग द्वारा दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया को भी उचित ठहराया। कोर्ट ने कहा कि पहचान से जुड़े दस्तावेज तय करना आयोग के प्रशासनिक विवेक का हिस्सा है और इसका उद्देश्य मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाना है।

अदालत ने यह भी माना कि पिछले कुछ वर्षों में तेज शहरीकरण, पलायन और दोहरी प्रविष्टियों के कारण मतदाता सूचियों में कई त्रुटियां बढ़ी हैं। ऐसे में विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में जरूरी कदम है।

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने यह निर्देश भी दिया कि जिन मामलों में नागरिकता को लेकर विवाद है, उन्हें चार सप्ताह के भीतर केंद्र सरकार की सक्षम प्राधिकरण संस्था को भेजा जाए ताकि अंतिम निर्णय लिया जा सके। यदि कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक पाया जाता है, तो उसका नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले के बाद विपक्ष के लिए अपने पुराने आरोपों को सही ठहराना आसान नहीं होगा। वहीं विपक्ष अब भी चुनावी पारदर्शिता और मतदाता अधिकारों के मुद्दे को उठाने की तैयारी में है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने चुनाव आयोग को बड़ी राहत दी है और SIR प्रक्रिया को संवैधानिक समर्थन मिलने के बाद देश की राजनीति में इसका असर आने वाले चुनावों तक दिखाई दे सकता है।

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