Saturday, October 10, 2026
Homeउत्तर प्रदेशLucknow News: ऐशबाग में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन, सुदामा...

Lucknow News: ऐशबाग में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन, सुदामा चरित्र ने मोहा मन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ऐशबाग स्थित डी.ए.वी. कॉलेज में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को भव्य समापन हुआ। श्री राधा रमण सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम के अंतिम दिन वृंदावन धाम से पधारे परम पूज्य श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं, सुदामा चरित्र, राजा परीक्षित के मोक्ष और भक्ति की महिमा का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के समापन अवसर पर हरिनाम संकीर्तन, भजन, विश्राम आरती, प्रसाद वितरण और भव्य भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।

Lucknow Shrimad Bhagwat Katha का ऐशबाग में हुआ समापन

श्री राधा रमण सेवा समिति की ओर से डी.ए.वी. कॉलेज, पंडित रास बिहारी तिवारी मार्ग, ऐशबाग में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। सात दिनों तक चले इस धार्मिक आयोजन में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और श्रीमद्भागवत के आध्यात्मिक संदेशों के माध्यम से धर्म, भक्ति, प्रेम और सदाचार का महत्व बताया गया।

वृंदावन धाम से आए श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को अपने जीवन में आध्यात्मिक मूल्यों को अपनाने और भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा बनाए रखने की प्रेरणा दी।

सुदामा चरित्र से समझाया सच्ची मित्रता और निस्वार्थ प्रेम का महत्व

श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिवस पर श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा जी के प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सुदामा चरित्र सच्ची मित्रता, विनम्रता, त्याग और निष्काम प्रेम का प्रतीक है।

महाराज जी ने सुदामा जी से जुड़े तंदुल प्रसंग और दुर्वासा ऋषि के शाप का उल्लेख करते हुए भक्ति, समर्पण और भगवान के प्रति विश्वास की महत्ता समझाई। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जीवन में प्रेम और श्रद्धा का विशेष स्थान है। मनुष्य को अपने संबंधों में स्वार्थ के बजाय आत्मीयता, विश्वास और सेवा की भावना को प्राथमिकता देनी चाहिए।

भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और राजा परीक्षित के मोक्ष का वर्णन

कथा के दौरान बाणासुर की पुत्री ऊषा और अनिरुद्ध के प्रसंग के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीलाओं का वर्णन किया गया। इसके साथ ही राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग के जरिए श्रीमद्भागवत कथा के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला गया।

महाराज श्री पुंडरीक गोस्वामी जी ने श्रद्धालुओं को बताया कि धार्मिक कथाओं का उद्देश्य केवल श्रवण करना नहीं, बल्कि उनसे मिलने वाली सीख को अपने दैनिक जीवन में अपनाना भी है। सत्य, सदाचार, करुणा और सेवा जैसे मूल्यों को जीवन का हिस्सा बनाकर समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।

दूध और दही के उदाहरण से बताया दृढ़ भक्ति का महत्व

भक्ति की स्थिरता को समझाने के लिए महाराज जी ने दूध और दही का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि मनुष्य को अपनी भक्ति को दृढ़ और स्थिर बनाना चाहिए, ताकि परिस्थितियां बदलने पर भी उसकी श्रद्धा और विश्वास कमजोर न पड़े।

भगवान श्रीकृष्ण की अष्ट पटरानियों से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से भी आध्यात्मिक भावों को समझाया गया। महाराज जी ने श्रद्धालुओं से सद्कर्म करने, धर्म के मार्ग पर चलने और जीवन में नैतिक मूल्यों को अपनाने का आह्वान किया।

शारदीय नवरात्रि पर मां दुर्गा की पूजा और कन्या पूजन का संदेश

कथा के दौरान आगामी शारदीय नवरात्रि को लेकर भी श्रद्धालुओं को धार्मिक संदेश दिया गया। श्री पुंडरीक गोस्वामी जी महाराज ने नौ दिनों तक मां दुर्गा की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करने और रामचरितमानस का पाठ करने की प्रेरणा दी।

उन्होंने नवमी तिथि पर कन्या पूजन और कन्या भोज की परंपरा का महत्व बताते हुए दो से दस वर्ष तक की कन्याओं का श्रद्धापूर्वक पूजन करने और उन्हें भोजन कराने की बात कही।

‘प्यारो-प्यारो मोहन’ भजन पर झूमे श्रद्धालु

श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भक्ति का विशेष वातावरण तब देखने को मिला, जब महाराज जी ने ‘प्यारो-प्यारो मोहन, वंशी वालो मोहन, मेरो माखन चुराय गयो रे’ भजन का भावपूर्ण गायन किया। भजन की धुन पर श्रद्धालु झूम उठे और कई भक्त भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में नृत्य करते नजर आए।

कथा स्थल पर भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों और हरिनाम संकीर्तन से वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन में भाग लेकर आयोजन के अंतिम दिन को यादगार बनाया।

51 तोतों को पिंजरे से किया गया मुक्त

आयोजक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर शुकदेव जी महाराज के स्वरूप से प्रेरित होकर 51 तोतों को पिंजरे से मुक्त किया गया। इसके बाद विश्राम आरती संपन्न हुई और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरित किया गया।

कार्यक्रम के समापन पर आयोजित भव्य भंडारे में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन धार्मिक उत्साह और आध्यात्मिक वातावरण के बीच हुआ।

आयोजक अमरनाथ मिश्र ने जताया आभार

आयोजक अमरनाथ मिश्र ने श्रीमद्भागवत कथा के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले श्रद्धालुओं, अतिथियों, सहयोगियों और स्वयंसेवकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य समाज में धर्म, भक्ति, सदाचार, सेवा और भारतीय संस्कारों का प्रसार करना है।

इस अवसर पर अमरनाथ मिश्र, राजेंद्र कुमार अग्रवाल, लोकेश अग्रवाल, अनिल कुमार अग्रवाल, मुन्ना, समीर मित्तल, नवीन गुप्ता, रोहित अग्रवाल, अमित अग्रवाल, अनुराग मिश्रा, आनंद रस्तोगी, शिवम अग्रवाल, आर.एन. सिंह, सुनील कुमार मिश्रा, कुश मिश्रा, दिव्यांशु शुक्ला और साकेत शर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।

लखनऊ के ऐशबाग में आयोजित इस सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, आध्यात्मिक चिंतन और सेवा के संदेश के साथ हुआ। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रेम, समर्पण, सदाचार और धार्मिक संस्कारों को अपने जीवन में अपनाने की प्रेरणा मिली।

Loading

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments

error: Content is protected !!
🔴
संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल की बैठक लखनऊ गोमती नगर में सम्पन्न हुई • गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर आम आदमी पार्टी की तिरंगा पदयात्रा • डॉ. नेहा सोलंकी को मिला गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड प्रमाणपत्र