गोल्ड लोन और हाउसिंग लोन की मांग बढ़ने के चलते नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों यानी NBFCs के रिटेल लोन कारोबार में अगस्त के दौरान तेज वृद्धि दर्ज की गई। भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त में NBFCs का रिटेल क्रेडिट सालाना आधार पर 22 प्रतिशत बढ़ा, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में इसकी वृद्धि दर 13.6 प्रतिशत थी।
इस वृद्धि में सबसे बड़ा योगदान गोल्ड लोन का रहा। RBI के आंकड़ों के अनुसार, सोने के आभूषणों के बदले दिए जाने वाले लोन में अगस्त के दौरान सालाना आधार पर 69.1 प्रतिशत की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही गोल्ड लोन का बकाया बढ़कर करीब 3.65 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। लगातार बढ़ती मांग के कारण गोल्ड लोन NBFCs के रिटेल क्रेडिट सेगमेंट में सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में शामिल रहा।
सोने के बदले लोन लेने का विकल्प उन लोगों के लिए आसान माना जाता है जिन्हें कम समय में पैसों की जरूरत होती है। बैंक या अन्य संस्थानों की तुलना में गोल्ड लोन की प्रक्रिया कई मामलों में अपेक्षाकृत आसान और तेज हो सकती है। सोने की कीमतों में तेजी और आर्थिक जरूरतों के चलते भी इस तरह के कर्ज की मांग बढ़ी है।
RBI के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि सिर्फ गोल्ड लोन ही नहीं, बल्कि हाउसिंग लोन में भी सुधार हुआ है। अगस्त में NBFCs के हाउसिंग लोन में सालाना आधार पर 12.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। एक साल पहले इसी अवधि में हाउसिंग लोन की वृद्धि दर केवल 3.8 प्रतिशत थी। इससे संकेत मिलता है कि NBFCs के जरिए आवासीय कर्ज की मांग में भी मजबूती आई है।
NBFCs के कुल क्रेडिट कारोबार में भी अगस्त के दौरान अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। आंकड़ों के मुताबिक, NBFCs द्वारा दिए गए कुल क्रेडिट में सालाना आधार पर 15.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि एक साल पहले यह वृद्धि दर करीब 10 प्रतिशत थी। इसके साथ ही NBFCs का कुल बकाया क्रेडिट लगभग 60.64 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
रिटेल क्रेडिट के अन्य हिस्सों में भी तस्वीर सकारात्मक रही। व्हीकल लोन की वृद्धि दर अगस्त में 15.4 प्रतिशत पर मजबूत बनी रही। इसका मतलब है कि वाहन खरीदने के लिए NBFCs से लिए जाने वाले कर्ज की मांग भी बनी हुई है। वहीं कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन में सालाना आधार पर 56.4 प्रतिशत की बड़ी वृद्धि दर्ज की गई।
रिटेल लोन में आई यह तेजी NBFC सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पिछले साल की तुलना में इस साल रिटेल क्रेडिट की वृद्धि दर में बड़ा सुधार देखने को मिला है। गोल्ड लोन, हाउसिंग लोन, व्हीकल लोन और कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बढ़ती मांग ने NBFCs के कुल क्रेडिट कारोबार को मजबूत करने में योगदान दिया है।
हालांकि, गोल्ड लोन में 69.1 प्रतिशत की वृद्धि सबसे ज्यादा ध्यान खींच रही है। करीब 3.65 लाख करोड़ रुपये का बकाया गोल्ड लोन यह दिखाता है कि सोने के बदले कर्ज लेना लोगों के बीच एक महत्वपूर्ण वित्तीय विकल्प बना हुआ है। वहीं हाउसिंग लोन में वृद्धि के आंकड़े भी NBFCs के लिए सकारात्मक संकेत दे रहे हैं।
RBI के आंकड़ों से कुल मिलाकर यह संकेत मिलता है कि अगस्त में NBFC सेक्टर में कर्ज वितरण की गतिविधियां पिछले साल के मुकाबले मजबूत हुई हैं। रिटेल लोन की तेज वृद्धि और कुल क्रेडिट में सुधार से NBFCs के कारोबार में बेहतर गति दिखाई दे रही है। आने वाले महीनों में गोल्ड, हाउसिंग और अन्य रिटेल लोन की मांग इस क्षेत्र की वृद्धि की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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