Sunday, July 5, 2026
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ओबरा D और अनपरा E परियोजना में देरी: NTPC पर सवाल, बिजली कर्मियों ने ज्वाइंट वेंचर खत्म करने की उठाई मांग

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की बहुप्रतीक्षित ओबरा D और अनपरा E ताप विद्युत परियोजनाओं में लगातार हो रही देरी को लेकर विवाद गहरा गया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री Yogi Adityanath से मांग की है कि इन परियोजनाओं को NTPC Limited के साथ बने ज्वाइंट वेंचर से हटाकर राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंपा जाए, ताकि समय पर सस्ती बिजली उत्पादन सुनिश्चित हो सके।


🔴 3 साल बाद भी निर्माण शुरू नहीं: बढ़ी चिंता

फरवरी 2023 में UP Global Investors Summit 2023 के दौरान इन परियोजनाओं के लिए एमओयू साइन हुआ था।

लेकिन 37 महीने बाद भी:

  • निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ
  • कोयला लिंकेज तय नहीं हुआ
  • प्रोजेक्ट ग्राउंड लेवल पर नहीं पहुंचा

👉 यह देरी ऊर्जा नीति और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।


⚡ बिजली कर्मियों का विरोध तेज, सत्याग्रह की चेतावनी

पावर कॉरपोरेशन द्वारा 1 अप्रैल से कर्मचारियों के निलंबन के निर्देशों के खिलाफ प्रदेशभर में बिजली कर्मियों ने जनसंपर्क अभियान चलाया।

संघर्ष समिति का साफ संदेश:

  • उत्पीड़न हुआ तो सामूहिक सत्याग्रह
  • सभी कर्मचारियों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश

📉 NTPC की प्राथमिकता से बाहर ओबरा D और अनपरा E?

संघर्ष समिति के अनुसार, NTPC Limited के हालिया ग्रोथ प्लान में इन परियोजनाओं का कोई जिक्र नहीं है।

👉 संकेत मिलते हैं कि कंपनी फिलहाल:

  • ग्रीन एनर्जी
  • न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स

पर फोकस कर रही है, जिससे ये ताप विद्युत परियोजनाएं पीछे छूट रही हैं।


🪨 कोयला लिंकेज नहीं: लागत बढ़ने का बड़ा खतरा

संघर्ष समिति का कहना है कि Northern Coalfields Limited से कोल पिटहेड लिंकेज न मिलने के कारण परियोजनाएं अटकी हुई हैं।

यदि दूर से कोयला मंगाना पड़ा तो:

  • 500–700 किमी ट्रांसपोर्ट
  • भारी लॉजिस्टिक खर्च
  • महंगी बिजली उत्पादन

👉 इसका सीधा असर आम जनता के बिजली बिल पर पड़ेगा।


💰 कॉस्ट ओवररन: सैकड़ों करोड़ बढ़ सकती है लागत

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार:

  • सामान्यतः ताप विद्युत परियोजनाएं 5 साल में पूरी होती हैं
  • 3 साल में काम शुरू न होना बड़ी विफलता है

👉 इससे कॉस्ट ओवररन का खतरा बढ़ गया है, जिससे परियोजना लागत सैकड़ों करोड़ रुपये तक बढ़ सकती है।


✅ उत्पादन निगम को सौंपने से क्या होगा फायदा?

संघर्ष समिति के मुताबिक:

✔ पहले से मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग
✔ तेजी से निर्माण कार्य
✔ बिजली उत्पादन लागत में कमी

👉 अनुमान: 40–50 पैसे प्रति यूनिट तक सस्ती बिजली


⚠️ तकनीकी और ऑपरेशन से जुड़े जोखिम

एक ही परिसर में अलग-अलग कंपनियों की परियोजनाएं होने से:

  • कोयला आपूर्ति में टकराव
  • रेलवे लाइन पर दबाव
  • ऐश डिस्पोजल की समस्या
  • संभावित कानूनी विवाद

👉 भविष्य में बड़े ऑपरेशनल संकट खड़े हो सकते हैं।


📊 प्रोजेक्ट डिटेल (High SEO Value Section)

ओबरा D परियोजना

  • क्षमता: 2×800 मेगावाट

अनपरा E परियोजना

  • क्षमता: 2×800 मेगावाट

👉 कुल क्षमता: 3200 मेगावाट
👉 लक्ष्य: उत्तर प्रदेश में सस्ती और स्थिर बिजली आपूर्ति


🎯 संघर्ष समिति की मुख्य मांगें

  • ज्वाइंट वेंचर मॉडल तुरंत खत्म किया जाए
  • परियोजनाएं राज्य विद्युत उत्पादन निगम को सौंपी जाएं
  • समयबद्ध और सस्ती बिजली उत्पादन सुनिश्चित किया जाए

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