लखनऊ। भारत रत्न एवं उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित गोविंद बल्लभ पंत की जयंती के अवसर पर राजधानी लखनऊ में श्रद्धांजलि और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। इसके बाद बीरबल साहनी मार्ग स्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन में पंडित पंत और जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई।
समारोह में उत्तराखंड समाज के लोगों ने दोनों महान विभूतियों के योगदान को याद करते हुए उनके आदर्शों, विचारों और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। इस दौरान पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन के संरक्षण, संवर्धन, सौंदर्यीकरण और विकास पर भी विशेष जोर दिया गया।
लोकभवन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पंडित पंत को किया नमन
पंडित गोविंद बल्लभ पंत की जयंती पर लोकभवन, उत्तर प्रदेश में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम में उत्तराखंड समाज के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित अनेक गणमान्य लोगों ने भी पंडित गोविंद बल्लभ पंत को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर उनके राष्ट्रसेवा, जनसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति योगदान को याद किया गया।
लखनऊ के पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन में पंत और गिर्दा की जयंती
लोकभवन कार्यक्रम के बाद बीरबल साहनी मार्ग स्थित पंडित गोविंद बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन में पंडित गोविंद बल्लभ पंत और जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की जयंती मनाई गई।
कार्यक्रम का आयोजन पंडित गोविंद बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन समन्वय समिति के तत्वावधान में किया गया। समारोह का नेतृत्व समिति के अध्यक्ष गणेश चंद्र जोशी ने किया। कार्यक्रम में लखनऊ में रह रहे उत्तराखंड समाज के प्रबुद्धजन, सामाजिक प्रतिनिधि, साहित्यकार और मातृशक्ति मौजूद रही।
समारोह की शुरुआत पंडित गोविंद बल्लभ पंत और गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ को पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई।
कविता और साहित्यिक प्रस्तुतियों से याद किए गए गिर्दा
समारोह में वरिष्ठ कवि एवं लेखक के.एन. चंदोला, डॉ. करुणा पांडे और ज्ञान पंत ने अपनी काव्य रचनाओं एवं साहित्यिक प्रस्तुतियों के माध्यम से पंडित गोविंद बल्लभ पंत और गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद किया।
काव्य प्रस्तुतियों में उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, लोकजीवन और जनसरोकारों की झलक दिखाई दी। साहित्यिक कार्यक्रम ने समारोह को भावपूर्ण बनाने के साथ-साथ उत्तराखंड की सांस्कृतिक चेतना और लोक विरासत को भी रेखांकित किया।
पंडित गोविंद बल्लभ पंत का जीवन राष्ट्रसेवा की प्रेरणा
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि पंडित गोविंद बल्लभ पंत का जीवन राष्ट्रसेवा, जनसेवा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में उनके योगदान को आज भी याद किया जाता है।
वक्ताओं ने कहा कि पंडित पंत के विचार और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी उनकी प्रतिबद्धता वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
जनकवि गिर्दा ने उत्तराखंड की लोकसंस्कृति को दी आवाज
वक्ताओं ने जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ के योगदान को भी याद किया। उन्होंने अपनी कविताओं, लोकगीतों और जनभाषा के माध्यम से उत्तराखंड के जनजीवन, लोकसंस्कृति और सामाजिक चेतना को प्रभावशाली स्वर दिया।
गिर्दा की रचनाओं में पहाड़ के आम लोगों की संवेदनाओं, सामाजिक सरोकारों और संघर्षों की अभिव्यक्ति दिखाई देती है। समारोह में उनकी साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन के संरक्षण और विकास का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान पंडित गोविंद बल्लभ पंत पर्वतीय सांस्कृतिक उपवन के संरक्षण, संवर्धन, सौंदर्यीकरण और विकास का संकल्प लिया गया।
समिति के सदस्यों ने कहा कि इस उपवन को उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, साहित्य, कला, संगीत और परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि उपवन के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने के साथ ही नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
नई पीढ़ी तक पहुंचेगी उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसकी भाषा, लोककला, साहित्य, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से होती है। ऐसे में उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं को संरक्षित करना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना महत्वपूर्ण है।
वक्ताओं के अनुसार, पंडित गोविंद बल्लभ पंत के राष्ट्रसेवा के आदर्श और गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ की जनचेतना समाज को आज भी प्रेरित करती है। दोनों विभूतियों की विरासत को आगे बढ़ाना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उत्तराखंड समाज के अनेक गणमान्य लोग रहे मौजूद
समारोह में उपवन समिति के संयोजक टी.एस. मनराल, सचिव मंगल सिंह रावत तथा सदस्य के.एन. चंदोला, दीवान सिंह अधिकारी, हरीश चंद्र पंत, भवान सिंह रावत, भरत सिंह बिष्ट और महेंद्र सिंह रावत सहित उत्तराखंड समाज के अनेक प्रबुद्धजन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम को गणेश चंद्र जोशी, दीवान सिंह अधिकारी, ठाकुर सिंह मनराल, हरीश चंद्र पंत, भवान सिंह रावत, मंगल सिंह रावत, भरत सिंह बिष्ट और पुष्पा वैष्णव ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन महेंद्र सिंह रावत ने किया।
समापन अवसर पर उपस्थित लोगों ने पंडित गोविंद बल्लभ पंत और जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ को श्रद्धापूर्वक नमन किया और उनके विचारों, आदर्शों तथा सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
पंडित गोविंद बल्लभ पंत और जनकवि गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’ को शत-शत नमन।
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