देश में सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अब इसके साथ बिजली को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की चुनौती भी सामने आ रही है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने हरित ऊर्जा गलियारा चरण-3 योजना का नया नाम PM DHARA रखा है। 30 सितंबर को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसके लिए 1,86,405 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश में अक्षय ऊर्जा से बनने वाली 135 गीगावाट तक बिजली को बिजली तंत्र तक पहुंचाने के लिए पारेषण व्यवस्था को मजबूत करना है। इसके साथ ही 50 गीगावाट घंटा क्षमता वाली बैटरी भंडारण व्यवस्था भी विकसित की जाएगी।
योजना के तहत 51,126 सर्किट किलोमीटर लंबी नई पारेषण लाइनें बिछाई जाएंगी। इसके अलावा 2,28,903 एमवीए क्षमता वाले उपकेंद्र तैयार किए जाएंगे। यानी आने वाले वर्षों में देश का बिजली ट्रांसमिशन नेटवर्क बड़े स्तर पर विस्तार लेने वाला है।
राजस्थान और गुजरात जैसे राज्यों में सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन की क्षमता तेजी से बढ़ रही है। लेकिन जिन इलाकों में बिजली का उत्पादन ज्यादा होता है, वहां से देश के दूसरे हिस्सों तक बिजली पहुंचाने के लिए पर्याप्त ट्रांसमिशन नेटवर्क जरूरी है। अगर उत्पादन की रफ्तार पारेषण ढांचे से आगे निकल जाती है, तो अतिरिक्त बिजली का पूरा इस्तेमाल करना मुश्किल हो सकता है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने योजना की जरूरत बताते हुए कहा कि अक्षय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ बिजली तंत्र को भी उसी हिसाब से तैयार करना होगा। सौर ऊर्जा दिन के समय उपलब्ध रहती है, जबकि रात में इसका उत्पादन नहीं होता। इसी तरह पवन ऊर्जा का उत्पादन भी मौसम और समय के अनुसार बदलता रहता है।
ऐसे में बिजली व्यवस्था को लगातार संतुलित बनाए रखने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क और स्टोरेज क्षमता दोनों जरूरी हैं।
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी के अनुसार, योजना के तहत 51,126 सर्किट किलोमीटर नई पारेषण लाइनें और 2,28,903 एमवीए क्षमता के उपकेंद्र तैयार किए जाएंगे। इसके साथ 50 गीगावाट घंटा बैटरी स्टोरेज भी विकसित किया जाएगा।
योजना के कुल खर्च में 1,36,378 करोड़ रुपये राज्यों के भीतर की पारेषण व्यवस्था पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 50,000 करोड़ रुपये बैटरी भंडारण के लिए रखे गए हैं। केंद्र सरकार की ओर से 54,082 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने की बात कही गई है।
इस योजना को वित्त वर्ष 2032-33 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। नई पारेषण परियोजनाओं को प्रतिस्पर्धी बोली के जरिए आगे बढ़ाया जाएगा और चयनित कंपनियां इन संपत्तियों का निर्माण, स्वामित्व, संचालन और रखरखाव करेंगी।
बैटरी स्टोरेज इस पूरी योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जब सौर और पवन ऊर्जा का उत्पादन ज्यादा होगा, तब अतिरिक्त बिजली को बैटरी में स्टोर किया जा सकेगा। जरूरत बढ़ने या उत्पादन कम होने के समय इस स्टोर की गई बिजली का इस्तेमाल किया जा सकेगा।
यह योजना पहले शुरू किए गए हरित ऊर्जा गलियारा चरण-1 और चरण-2 की अगली कड़ी है। अगस्त 2026 के अंत तक देश की कुल अक्षय ऊर्जा क्षमता 295.55 गीगावाट से अधिक हो चुकी थी, जिसमें सौर ऊर्जा की क्षमता 168.04 गीगावाट थी।
यानी जैसे-जैसे देश में अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ रही है, वैसे-वैसे उस बिजली को देश के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचाने के लिए मजबूत ट्रांसमिशन नेटवर्क की जरूरत भी बढ़ रही है। PM DHARA इसी जरूरत को पूरा करने के लिए बड़े स्तर पर पारेषण लाइन, उपकेंद्र और बैटरी स्टोरेज क्षमता विकसित करने की योजना है।
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