पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के खतरे के बीच भारत सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजधानी दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए देश की ऊर्जा सुरक्षा और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई को लेकर बड़ा एक्शन प्लान तैयार किया है।प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और विदेश मंत्री एस जयशंकर सहित कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए। बैठक में पेट्रोल, डीजल, कच्चा तेल, एलपीजी गैस, बिजली और खाद की सप्लाई को किसी भी स्थिति में बाधित न होने देने पर विशेष जोर दिया गया।सरकार ने घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की सप्लाई को सामान्य बनाए रखने के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। घबराहट में की जा रही गैस बुकिंग अब कम हो रही है और सरकार ने कमर्शियल गैस का कोटा बढ़ा दिया है। अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों को गैस सप्लाई में प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।इसके साथ ही, पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन तेजी से देने के निर्देश भी दिए गए हैं ताकि लोगों को सिलेंडर पर निर्भर न रहना पड़े। गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए देशभर में छापेमारी भी जारी है।राहत की खबर यह है कि अमेरिका के टेक्सास से रसोई गैस लेकर एक बड़ा जहाज मंगलुरु बंदरगाह पहुंच चुका है, जिससे देश में गैस सप्लाई में सुधार होने की उम्मीद है।दरअसल, यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग पर तनाव बढ़ गया है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ा है। औद्योगिक डीजल की कीमतों में करीब 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।सरकार ने साफ कहा है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संकट से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है।
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