प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन के बीच सोमवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में अहम द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों नेताओं की बातचीत में वैश्विक शांति और स्थिरता से लेकर व्यापार, निवेश, तकनीक, युवाओं की आवाजाही और दोनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग बढ़ाने जैसे कई मुद्दों पर चर्चा हुई। बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड लोकतांत्रिक मूल्यों, कानून के शासन, संवाद और कूटनीति में विश्वास रखते हैं। दोनों देश वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया इस समय कई गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है और ऐसे माहौल में वैश्विक संस्थाओं में सुधार जरूरी है। भारत और स्विट्जरलैंड इस बात पर सहमत हैं कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को मौजूदा वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए।
यूक्रेन और पश्चिम एशिया के संघर्षों का भी बातचीत में जिक्र हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने शांति की दिशा में किए जा रहे सार्थक प्रयासों का लगातार समर्थन किया है। उनका कहना था कि बातचीत और कूटनीति के माध्यम से विवादों का समाधान निकालने की दिशा में प्रयास जारी रहने चाहिए।
लेकिन दोनों देशों की बातचीत केवल वैश्विक मुद्दों तक सीमित नहीं रही। आर्थिक संबंधों को भी इस मुलाकात में खास महत्व मिला। भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ यानी ईएफटीए के बीच व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश को बढ़ावा देने और करीब 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों को समर्थन देने का लक्ष्य रखा गया है। इस समूह में स्विट्जरलैंड के अलावा नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस समझौते को भारत और यूरोपीय आर्थिक समूह के बीच एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदारी के रूप में रेखांकित किया। इसका उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं है, बल्कि निवेश, तकनीक, विनिर्माण, नवाचार और रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देना है।
100 अरब डॉलर का निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार का आंकड़ा किसी एक तत्काल निवेश परियोजना का दावा नहीं है, बल्कि समझौते के तहत 15 वर्षों की व्यापक निवेश और रोजगार प्रतिबद्धता से जुड़ा लक्ष्य है। इसके तहत स्विस और अन्य ईएफटीए कंपनियों के भारत में निवेश और विस्तार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न स्तरों पर सहयोग किया जाना है।
बैठक में युवाओं और पेशेवरों की आवाजाही पर भी जोर दिया गया। भारत और स्विट्जरलैंड ने प्रवासन और गतिशीलता से जुड़े सहयोग तथा युवा पेशेवरों के प्रशिक्षण और आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के युवाओं, विद्यार्थियों और पेशेवरों के लिए अवसरों को बढ़ाना है।
दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा शिक्षा, शोध और नवाचार तक भी बढ़ाया जा रहा है। स्विट्जरलैंड की उच्च तकनीक और शोध क्षमता तथा भारत की बड़ी प्रतिभाशाली युवा आबादी के बीच सहयोग को आने वाले समय में और मजबूत करने पर ध्यान दिया जा रहा है।
रक्षा और रणनीतिक सहयोग भी बातचीत का हिस्सा रहा। दोनों देशों के बीच रक्षा उत्पादन, सैन्य आदान-प्रदान और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा और महत्वपूर्ण तकनीकों जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग को आगे बढ़ाने की दिशा में बातचीत हुई है।
भारत और स्विट्जरलैंड के संबंध केवल मौजूदा आर्थिक समझौतों तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से राजनयिक, आर्थिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। वर्ष 2028 में दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों की 80वीं वर्षगांठ मनाएंगे। स्विस राष्ट्रपति की मौजूदा यात्रा को इसी लंबे संबंध को नई दिशा देने के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की भारत यात्रा ऐसे समय हुई है जब भारत-ईएफटीए व्यापार समझौते को लागू हुए एक वर्ष पूरा हो रहा है। इसलिए इस यात्रा में व्यापार और निवेश के साथ-साथ समझौते को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने और दोनों देशों के कारोबारियों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान रहा।
अब आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 100 अरब डॉलर के निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के लक्ष्य को किस तरह आगे बढ़ाया जाता है और दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक, शिक्षा, रक्षा और युवा गतिशीलता का सहयोग किस स्तर तक पहुंचता है।
कुल मिलाकर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विस राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की मुलाकात में वैश्विक शांति से लेकर आर्थिक साझेदारी तक कई महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए। एक तरफ दोनों देशों ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार और कूटनीति के जरिए शांति पर जोर दिया, तो दूसरी तरफ निवेश, रोजगार, व्यापार और युवाओं के अवसर बढ़ाने की दिशा में सहयोग को मजबूत करने का संकेत दिया। आने वाले समय में इन समझौतों और लक्ष्यों का वास्तविक प्रभाव दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा दे सकता है।
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