दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार दोपहर इमारत गिरने से हुए दर्दनाक हादसे ने लोगों को झकझोर दिया। करीब डेढ़ बजे हुई इस घटना में अब तक दो लोगों की मौत की खबर सामने आई है, जबकि कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया गया।
घटना को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सत्य निकेतन में हुए बिल्डिंग हादसे को बेहद दर्दनाक और चिंताजनक बताया। राहुल गांधी ने इस घटना के बहाने दिल्ली में छात्रों के रहने की व्यवस्था और हॉस्टल से जुड़ी समस्याओं को लेकर सरकार पर सवाल उठाए।
राहुल गांधी ने कहा कि राजधानी में बड़ी संख्या में छात्र बेहतर और सुरक्षित हॉस्टल की सुविधा नहीं मिलने के कारण मजबूरी में ऐसी जगहों पर रहने को मजबूर होते हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के लिए सुरक्षित और किफायती आवास की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है, ताकि उन्हें असुरक्षित इमारतों में रहने का जोखिम न उठाना पड़े।
सत्य निकेतन दिल्ली का ऐसा इलाका है जहां बड़ी संख्या में छात्र और युवा किराए पर रहते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा की तैयारी करने वाले कई छात्र भी यहां रहते हैं। ऐसे में इमारत गिरने की घटना के बाद इलाके में रहने वाले छात्रों और उनके परिवारों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
हादसे के तुरंत बाद राहत और बचाव टीमों ने मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने का काम शुरू किया। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए अभियान चलाया गया। घटनास्थल पर पुलिस और प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे और बचाव कार्य की निगरानी की गई।
इस घटना ने दिल्ली में पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी के कई इलाकों में छात्र और कामकाजी लोग किराए के मकानों में रहते हैं। ऐसे में इमारत की मजबूती, सुरक्षा मानकों और आपात स्थिति में बचाव के इंतजामों की जांच बेहद जरूरी मानी जाती है।
राहुल गांधी की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला राजनीतिक रूप से भी चर्चा में आ गया है। उन्होंने सरकार से छात्रों के लिए सुरक्षित हॉस्टल और बेहतर आवासीय सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत पर जोर दिया। उनका कहना है कि छात्रों को रहने के लिए सुरक्षित विकल्प नहीं मिलने की स्थिति में उन्हें अपनी जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर नहीं होना चाहिए।
फिलहाल सत्य निकेतन हादसे में राहत और बचाव अभियान सबसे बड़ी प्राथमिकता है। हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के सामने गहरा दुख है, वहीं मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश जारी है। घटना की पूरी तस्वीर राहत एवं बचाव अभियान पूरा होने और प्रशासन की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
यह हादसा एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि छात्रों और किरायेदारों के लिए सुरक्षित आवास सुनिश्चित करने के लिए क्या पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं। इमारतों की नियमित जांच और सुरक्षा मानकों का पालन समय रहते हो, तो ऐसे हादसों के खतरे को कम किया जा सकता है।
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