मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स यानी BKC स्थित Jio World Plaza में कथित तौर पर फर्जी PMO पहचान पत्र के साथ पकड़े गए 24 वर्षीय रोहन पारिख का मामला अब अदालत तक पहुंच गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले हुई इस घटना के बाद पुलिस ने रोहन पारिख और उसके साथी दिलीप कुंडे को गिरफ्तार किया था। पुलिस रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद दोनों को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। अब आरोपियों ने जमानत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है और अपनी हिरासत जारी रखने की जरूरत पर सवाल उठाए हैं।
पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच के दौरान यह बात सामने आई कि कथित तौर पर फर्जी PMO पहचान पत्र और दूसरे दस्तावेज तैयार करने के लिए रोहन पारिख ने ChatGPT समेत AI टूल्स की मदद ली थी। पुलिस का आरोप है कि इन तकनीकी साधनों का इस्तेमाल दस्तावेज तैयार करने और उन्हें वास्तविक जैसा दिखाने के लिए किया गया। इस दावे के सामने आने के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया है, क्योंकि इसमें AI तकनीक के संभावित दुरुपयोग का पहलू भी जुड़ गया है।
घटना मुंबई के BKC इलाके में स्थित Jio World Plaza से जुड़ी है। बताया जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अगले दिन होने वाले कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था पहले से ही कड़ी थी। इसी दौरान कथित फर्जी PMO पहचान पत्र के साथ रोहन पारिख को पकड़े जाने के बाद सुरक्षा और पुलिस एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने उसके साथ दिलीप कुंडे को भी गिरफ्तार किया। दोनों को पूछताछ और जांच के लिए पुलिस हिरासत में रखा गया था।
पुलिस रिमांड की अवधि पूरी होने के बाद आरोपियों को अदालत के सामने पेश किया गया। इस दौरान पुलिस की ओर से आगे की हिरासत की मांग की गई, लेकिन अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डीएस खेडेकर की अदालत ने पुलिस की आगे की हिरासत की मांग को खारिज कर दिया। इसके बाद दोनों आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब दोनों की ओर से जमानत याचिका दाखिल की गई है।
जमानत मांगते हुए रोहन पारिख की ओर से कथित तौर पर यह तर्क दिया गया है कि उसकी वजह से किसी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं हुआ। साथ ही उसने यह दावा भी किया है कि उसे कुछ प्रतिबंधात्मक आदेशों की जानकारी नहीं थी। आरोपों पर अंतिम फैसला अभी अदालत को करना है, इसलिए आरोपी की ओर से दिए गए इन तर्कों को उसके बचाव के तौर पर देखा जा रहा है।
इस मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कथित फर्जी PMO पहचान पत्र तैयार करने और उसका इस्तेमाल करने के पीछे आखिर मकसद क्या था। पुलिस ने AI टूल्स के इस्तेमाल का जो दावा किया है, उसकी जांच भी मामले का अहम हिस्सा बन सकती है। अगर दस्तावेज वास्तव में डिजिटल माध्यमों की मदद से तैयार किए गए थे, तो जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि इन्हें किस उद्देश्य से बनाया गया और आरोपियों ने इनका इस्तेमाल कहां-कहां करने की कोशिश की।
वहीं, सुरक्षा के लिहाज से भी यह मामला गंभीर माना जा रहा है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम से ठीक एक दिन पहले संवेदनशील माने जाने वाले इलाके में कथित फर्जी पहचान पत्र के साथ किसी व्यक्ति के पकड़े जाने ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि मामले से जुड़े आरोपों की पुष्टि अदालत में होने वाली सुनवाई और जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी।
फिलहाल रोहन पारिख और दिलीप कुंडे न्यायिक हिरासत में हैं और उनकी जमानत याचिका पर अदालत में आगे सुनवाई होगी। रोहन पारिख का दावा है कि किसी को नुकसान नहीं हुआ और उसे प्रतिबंधात्मक आदेशों की जानकारी नहीं थी, जबकि पुलिस ने कथित फर्जी PMO ID और AI टूल्स के इस्तेमाल को जांच का अहम हिस्सा बताया है। अब अदालत में होने वाली सुनवाई यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि आरोपियों को जमानत मिलती है या उन्हें फिलहाल न्यायिक हिरासत में ही रहना होगा।
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