अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये में मामूली सुधार देखने को मिला है। घरेलू शेयर बाजार में जोरदार तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच बृहस्पतिवार को रुपया दो पैसे मजबूत होकर 95.26 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। हालांकि, मजबूत अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 95.20 प्रति डॉलर के स्तर पर खुला। कारोबार के दौरान इसमें गिरावट आई और यह 95.38 प्रति डॉलर के निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, बाद में रुपये ने कुछ सुधार किया और पिछले बंद भाव के मुकाबले दो पैसे की बढ़त के साथ 95.26 प्रति डॉलर पर कारोबार समाप्त किया।
इससे पहले बुधवार को रुपया 21 पैसे कमजोर होकर 95.28 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। लगातार दबाव के बीच बृहस्पतिवार को मिली यह मामूली मजबूती बाजार के लिए राहत की खबर रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और डॉलर की मजबूती के कारण आने वाले समय में रुपये पर दबाव बना रह सकता है। ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंका भी अमेरिकी डॉलर को मजबूती दे सकती है। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अमेरिका तथा ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत को लेकर उम्मीदें रुपये को सहारा दे सकती हैं।
इस बीच, छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.07 प्रतिशत बढ़कर 102.26 पर पहुंच गया। वहीं, वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 1.03 प्रतिशत गिरकर 114.13 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारत के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
घरेलू शेयर बाजार में भी बृहस्पतिवार को शानदार तेजी देखने को मिली। बीएसई सेंसेक्स 905.01 अंक उछलकर 74,151.04 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 237.90 अंक की बढ़त के साथ 22,936.75 पर पहुंच गया। शेयर बाजार की इस तेजी से रुपये को कुछ समर्थन मिला।
हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली चिंता का विषय बनी रही। बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने बृहस्पतिवार को भारतीय शेयर बाजार से शुद्ध रूप से 943.60 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए।
अब बाजार की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले कदम, डॉलर की चाल और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी। आने वाले दिनों में यही कारक तय कर सकते हैं कि रुपये की मजबूती बरकरार रहती है या उस पर दोबारा दबाव बढ़ता है।
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