शेयर बाजार में दवा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज़ ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं। कंपनी ने इस तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज करते हुए 27 प्रतिशत की सालाना बढ़त के साथ 2,894 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध लाभ (Net Profit) हासिल किया है। हालांकि यह आंकड़ा बाजार विशेषज्ञों के अनुमान से थोड़ा कम रहा, लेकिन भारत में कारोबार की शानदार वृद्धि और नवाचार आधारित दवाओं की बढ़ती मांग ने कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती दी है। तिमाही नतीजों के बाद निवेशकों की प्रतिक्रिया मिश्रित रही और कंपनी के शेयरों में हल्की गिरावट भी देखने को मिली।
कंपनी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, जून 2026 को समाप्त तिमाही में समेकित शुद्ध लाभ बढ़कर 2,894 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह लगभग 2,280 करोड़ रुपये था। बाजार विश्लेषकों ने करीब 3,051 करोड़ रुपये के नेट प्रॉफिट का अनुमान लगाया था, इसलिए वास्तविक परिणाम उम्मीद से कुछ कम रहे। वहीं समायोजित (Adjusted) नेट प्रॉफिट 3.1 प्रतिशत बढ़कर 3,089 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो कंपनी की स्थिर आय क्षमता को दर्शाता है।
सन फार्मा की परिचालन आय (Operating Revenue) में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। पहली तिमाही के दौरान कंपनी की कुल ऑपरेटिंग आय 10.5 प्रतिशत बढ़कर 15,299 करोड़ रुपये रही। हालांकि यह आंकड़ा भी बाजार के अनुमान 15,625 करोड़ रुपये से थोड़ा कम रहा। इसके बावजूद कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 3 प्रतिशत बढ़कर 4,417 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 28.9 प्रतिशत रहा, जो विश्लेषकों के अनुमान से बेहतर था। हालांकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 31 प्रतिशत था, इसलिए मार्जिन में मामूली गिरावट दर्ज की गई।
भारत में कंपनी का प्रदर्शन सबसे मजबूत रहा। घरेलू बाजार में सन फार्मा की दवा बिक्री 16 प्रतिशत बढ़कर 5,475 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो कंपनी की कुल आय का लगभग 36.1 प्रतिशत हिस्सा है। कंपनी ने दावा किया कि वह देश की सबसे बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनी बनी हुई है। इसके साथ ही उसकी बाजार हिस्सेदारी भी बढ़कर 8.5 प्रतिशत हो गई है, जबकि पिछले वर्ष यह 8.2 प्रतिशत थी। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारतीय बाजार में कंपनी की पकड़ लगातार मजबूत हो रही है।
कंपनी के प्रबंध निदेशक कीर्ति गणोरकर ने तिमाही परिणामों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत के कारोबार और नवाचार आधारित दवाओं की मजबूत मांग ने कंपनी के प्रदर्शन को नई मजबूती दी है। उन्होंने बताया कि विशेष दवाओं (Specialty Medicines) की बिक्री में लगातार बढ़ोतरी हो रही है और अमेरिका समेत कई अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इन उत्पादों की मांग बनी हुई है। कंपनी भविष्य में भी अनुसंधान और नवाचार आधारित दवाओं पर विशेष ध्यान देने की रणनीति पर काम कर रही है।
नवाचार आधारित दवाओं की वैश्विक बिक्री भी इस तिमाही में 12.8 प्रतिशत बढ़कर 35.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई। यह कंपनी की कुल बिक्री का लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा है। कंपनी ने भारत, ब्राज़ील और दक्षिण अफ्रीका में सेमाग्लूटाइड उत्पादों को मिली मंजूरी को अपनी अनुसंधान क्षमता और जटिल पेप्टाइड दवाओं के विकास में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इन उत्पादों से कंपनी की आय में और बढ़ोतरी हो सकती है।
हालांकि अमेरिकी बाजार में कंपनी को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अमेरिका में दवा बिक्री 9.7 प्रतिशत घटकर 42.7 करोड़ अमेरिकी डॉलर रह गई। कंपनी के अनुसार, इसका मुख्य कारण जेनेरिक दवाओं के कारोबार में कमजोरी और लेनालिडोमाइड दवा की विशेष बिक्री अवधि समाप्त होना रहा। दूसरी ओर, उभरते बाजारों से कंपनी की आय 4.2 प्रतिशत बढ़कर 31.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर रही, जबकि अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों से प्राप्त आय लगभग स्थिर रहकर 21.8 करोड़ अमेरिकी डॉलर दर्ज की गई।
तिमाही परिणामों में 204 करोड़ रुपये का विशेष व्यय भी शामिल किया गया है। इसमें प्रस्तावित ऑर्गेनॉन अधिग्रहण से जुड़े 167 करोड़ रुपये और देश में नए श्रम कानूनों के अनुपालन पर 37 करोड़ रुपये का खर्च शामिल है। कंपनी ने बताया कि ऑर्गेनॉन के शेयरधारकों ने इस सौदे को मंजूरी दे दी है और आवश्यक नियामकीय स्वीकृतियां मिलने के बाद यह अधिग्रहण वित्त वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही तक पूरा होने की उम्मीद है। इस अधिग्रहण से कंपनी की वैश्विक मौजूदगी और उत्पाद पोर्टफोलियो को और मजबूती मिलने की संभावना है।
सन फार्मास्युटिकल लंबे समय से भारत की अग्रणी दवा कंपनियों में शामिल रही है और घरेलू बाजार के साथ-साथ अमेरिका, यूरोप तथा अन्य उभरते देशों में भी अपनी उपस्थिति लगातार मजबूत कर रही है। हालांकि अमेरिकी जेनेरिक कारोबार की चुनौतियां फिलहाल बनी हुई हैं, लेकिन भारत में मजबूत प्रदर्शन और नवाचार आधारित दवाओं की बढ़ती मांग कंपनी के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। तिमाही नतीजों के बाद कंपनी के शेयरों में लगभग 1.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और कारोबार के दौरान यह करीब 1,972 रुपये के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। आने वाले समय में निवेशकों की नजर कंपनी की वैश्विक विस्तार योजनाओं और आगामी तिमाहियों के प्रदर्शन पर बनी रहेगी।
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