Wednesday, July 8, 2026
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Swiggy Share Price Today: भारतीय निवेशकों की हिस्सेदारी 50% के पार, शेयर में आया जोरदार उछाल

ऑनलाइन फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स सेक्टर की प्रमुख कंपनी Swiggy एक बार फिर चर्चा में है। मंगलवार के कारोबारी सत्र में कंपनी के शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली। बाजार बंद होने तक शेयर में करीब 7 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया। इस तेजी की सबसे बड़ी वजह कंपनी की ओर से दी गई वह जानकारी रही, जिसमें बताया गया कि अब कंपनी में भारतीय निवेशकों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है।

यह बदलाव केवल निवेशकों के लिए ही नहीं बल्कि कंपनी के भविष्य के कारोबार और संचालन के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि कंपनी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल इससे प्रबंधन, नियंत्रण या मतदान अधिकारों में कोई बदलाव नहीं हुआ है।

शेयर में क्यों आई तेजी?

मंगलवार को कारोबार के दौरान Swiggy का शेयर करीब 6.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ लगभग 266 रुपये पर बंद हुआ। इस प्रदर्शन के साथ कंपनी का शेयर उस दिन बीएसई 500 इंडेक्स के सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों में शामिल रहा।

हालांकि, यदि पूरे वर्ष 2026 की बात करें तो कंपनी का शेयर अभी भी साल की शुरुआत के मुकाबले लगभग 29 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहा है। वहीं इसी अवधि में निफ्टी-50 इंडेक्स में करीब 6.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

50 प्रतिशत से अधिक हुई घरेलू हिस्सेदारी

कंपनी द्वारा शेयर बाजार को दी गई जानकारी के अनुसार 6 जुलाई तक Swiggy में विदेशी निवेश घटकर 49.76 प्रतिशत रह गया है। इसमें प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) और अन्य अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश शामिल हैं।

दूसरी ओर, भारतीय निवेशकों की हिस्सेदारी बढ़कर 50.24 प्रतिशत हो गई है। यही कारण है कि बाजार में यह चर्चा तेज हो गई कि कंपनी अब भारतीय स्वामित्व वाली कंपनी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

क्या अब Swiggy पूरी तरह भारतीय कंपनी बन गई है?

इस सवाल का जवाब फिलहाल ‘नहीं’ है।

Swiggy ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया है कि केवल विदेशी हिस्सेदारी घटने और घरेलू हिस्सेदारी बढ़ने से कंपनी का स्वामित्व या नियंत्रण स्वतः नहीं बदल जाता। कंपनी ने कहा कि उसके प्रबंधन, बोर्ड, शेयरधारकों के अधिकार, मतदान प्रणाली और संचालन में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है।

यदि भविष्य में इस संबंध में कोई बड़ा फैसला लिया जाता है तो उसकी जानकारी नियामकीय नियमों के तहत सार्वजनिक की जाएगी।

कंपनी को क्या मिलेगा फायदा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भविष्य में Swiggy को भारतीय स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनी का दर्जा मिल जाता है तो कंपनी को क्विक कॉमर्स यानी रैपिड डिलीवरी बिजनेस में कई परिचालन लाभ मिल सकते हैं।

ऐसी कंपनियों को कुछ मामलों में सूची आधारित (Inventory-led) मॉडल अपनाने का अवसर मिलता है। इससे खरीद, स्टॉक प्रबंधन, वेयरहाउसिंग और सप्लाई चेन पर अधिक नियंत्रण हासिल किया जा सकता है। इसका सीधा फायदा ग्राहकों को तेज डिलीवरी और कंपनी को बेहतर लाभप्रदता के रूप में मिल सकता है।

Instamart को लेकर भी चल रही तैयारी

Swiggy पहले ही अपने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Instamart का पुनर्गठन कर चुकी है। इसे एक अलग सहायक कंपनी के रूप में तैयार किया गया है।

बाजार के जानकारों का मानना है कि यह कदम भविष्य में बड़े कारोबारी बदलावों की तैयारी का हिस्सा हो सकता है। कंपनी के मुख्य वित्त अधिकारी राहुल बोथरा भी पहले संकेत दे चुके हैं कि लंबे समय में यह बदलाव कंपनी की लाभप्रदता बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है, हालांकि इसके लिए अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता होगी।

पहले नहीं मिला था शेयरधारकों का समर्थन

कुछ समय पहले Swiggy ने भारतीय स्वामित्व और नियंत्रण वाली कंपनी बनने से जुड़े कुछ संवैधानिक संशोधनों का प्रस्ताव रखा था। लेकिन उस समय शेयरधारकों ने इन प्रस्तावों को मंजूरी नहीं दी थी।

कंपनी का कहना था कि इन संशोधनों का उद्देश्य कॉरपोरेट गवर्नेंस को मजबूत करना था, न कि संस्थापकों का नियंत्रण बढ़ाना।

प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से मुकाबला

Swiggy की सबसे बड़ी प्रतिस्पर्धी कंपनियों में से एक Eternal पहले ही विदेशी हिस्सेदारी को लगभग 49.5 प्रतिशत तक सीमित रखकर भारतीय स्वामित्व वाली कंपनी की दिशा में आगे बढ़ चुकी है। इसका फायदा उसके क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म Blinkit को भी मिला है।

अब माना जा रहा है कि Swiggy भी उसी दिशा में अपने कदम बढ़ा रही है, जिससे आने वाले समय में कंपनी के संचालन और विस्तार की रणनीति और मजबूत हो सकती है।

निष्कर्ष

Swiggy में भारतीय निवेशकों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत से अधिक होना कंपनी के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। हालांकि कंपनी ने साफ किया है कि फिलहाल प्रबंधन और नियंत्रण में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन भविष्य में यह बदलाव उसके क्विक कॉमर्स कारोबार के लिए नए अवसर खोल सकता है। निवेशकों की नजर अब कंपनी के अगले कदम और नियामकीय प्रक्रियाओं पर बनी रहेगी।

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