ChatGPT में Ads का खतरा! OpenAI की पूर्व रिसर्चर ने User Privacy पर दी बड़ी चेतावनी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तेजी से बढ़ते दौर में टेक कंपनियां नए रेवेन्यू मॉडल की तलाश में हैं। इसी बीच OpenAI की पूर्व शोधकर्ता Zoe Hitzig ने ChatGPT में संभावित विज्ञापनों को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
उनका कहना है कि ChatGPT अब केवल एक चैटबॉट नहीं रहा, बल्कि यह यूजर्स की बेहद निजी और संवेदनशील जानकारियों का एक बड़ा संग्रह बन चुका है।
निजी बातचीत बन सकती है विज्ञापन का आधार?
हिटज़िग के अनुसार, लोग सोशल मीडिया की तुलना में एआई से ज्यादा ईमानदारी और खुलापन दिखाते हैं। यूजर्स स्वास्थ्य, रिश्तों, आस्था, पहचान और निजी उलझनों जैसे विषयों पर खुलकर सवाल करते हैं।
अगर भविष्य में इन्हीं बातचीतों के आधार पर विज्ञापन तैयार किए जाते हैं, तो यह यूजर्स को प्रभावित करने का एक नया माध्यम बन सकता है।
OpenAI का क्या है रुख?
मौजूदा जानकारी के अनुसार OpenAI ने संकेत दिया है कि वह विज्ञापन मॉडल की संभावनाओं का परीक्षण कर सकता है। कंपनी का कहना है कि यूजर्स की निजी बातचीत विज्ञापनदाताओं के साथ साझा नहीं की जाएगी और न ही डेटा बेचा जाएगा।
हालांकि, पूर्व शोधकर्ता का तर्क है कि जैसे ही विज्ञापन राजस्व का हिस्सा बनते हैं, संस्थागत प्राथमिकताएं समय के साथ बदल सकती हैं।
भविष्य की चिंता: व्यावसायिक दबाव
हिटज़िग ने यह भी कहा कि भले ही वर्तमान प्रबंधन स्पष्ट सीमाएं तय करे, लेकिन भविष्य में व्यावसायिक दबाव उन नियमों को कमजोर कर सकता है।
उन्होंने स्वतंत्र निगरानी तंत्र और कानूनी ढांचे की जरूरत पर जोर दिया, ताकि यूजर डेटा को सार्वजनिक हित के तहत सुरक्षित रखा जा सके।
क्या यूजर्स को फर्क पड़ेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में यूजर्स विज्ञापन आने के बावजूद मुफ्त एआई टूल्स का इस्तेमाल जारी रख सकते हैं। इसे ‘प्राइवेसी थकान’ की प्रवृत्ति भी कहा जा रहा है — जहां लोग असहजता के बावजूद सुविधा को प्राथमिकता देते हैं।
भरोसे का सवाल
ChatGPT अब केवल एक टेक्नोलॉजी टूल नहीं है। यह शिक्षक, सहायक, सलाहकार और विचार-विमर्श का मंच बन चुका है। ऐसे में प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन की संभावित एंट्री केवल एक कारोबारी निर्णय नहीं, बल्कि भरोसे और नैतिकता से जुड़ा मुद्दा भी बन गया है।
निष्कर्ष
ChatGPT में Ads को लेकर उठी बहस यह दिखाती है कि AI प्लेटफॉर्म का भविष्य केवल तकनीक पर नहीं, बल्कि भरोसे और पारदर्शिता पर भी निर्भर करेगा। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि कंपनियां राजस्व और यूजर प्राइवेसी के बीच संतुलन कैसे बनाए रखती हैं।

