Sarojini Naidu Birth Anniversary: देश की पहली महिला Governor थीं सरोजिनी नायडू
भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका को नई ऊंचाई देने वाली Sarojini Naidu का जन्म 13 फरवरी 1879 को हैदराबाद में हुआ था। वह कांग्रेस की पहली भारतीय महिला अध्यक्ष और स्वतंत्र भारत की पहली महिला राज्यपाल बनीं।
उनकी प्रभावशाली वाणी और कविताओं ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनचेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। Mahatma Gandhi ने उन्हें ‘नाइटिंगेल ऑफ इंडिया’ यानी ‘भारत कोकिला’ की उपाधि दी थी।
🏠 जन्म और शिक्षा
इंग्लैंड में रहते हुए उन्होंने महिलाओं के मताधिकार आंदोलनों को करीब से देखा, जिससे उनके विचारों में सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता आई।
💍 अंतरजातीय विवाह: एक क्रांतिकारी कदम
1898 में उन्होंने गोविंदराजुलु नायडू से विवाह किया। उस समय अंतरजातीय विवाह एक साहसिक कदम माना जाता था। विवाह के बाद उनके नाम के साथ ‘नायडू’ जुड़ गया।
✍️ कविता से स्वतंत्रता संग्राम तक
सरोजिनी नायडू उच्च कोटि की कवयित्री थीं। उनका पहला काव्य संग्रह The Golden Threshold (1905) प्रकाशित हुआ। इसके बाद The Bird of Time (1912) और The Broken Wings (1917) आए।
हालांकि, बाद के वर्षों में उनका ध्यान पूरी तरह स्वतंत्रता आंदोलन की ओर मुड़ गया। उनकी कविताओं में लय, रंग और कल्पना का अनूठा संगम था।
🇮🇳 साड़ी फाड़कर बनाया तिरंगा
22 जुलाई 1947 को संविधान सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने एक घटना का जिक्र किया। एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में जब भारत का आधिकारिक ध्वज उपलब्ध नहीं था, तब भारतीय महिला प्रतिनिधियों ने अपनी साड़ियों की पट्टियां फाड़कर तिरंगा तैयार किया।
यह घटना उस दौर की महिलाओं के देशप्रेम और साहस की मिसाल मानी जाती है।
🏛 कांग्रेस अध्यक्ष और पहली महिला Governor
1925 में वह Indian National Congress की अध्यक्ष चुनी जाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
स्वतंत्रता के बाद उन्हें संयुक्त प्रांत (वर्तमान उत्तर प्रदेश) की पहली महिला राज्यपाल नियुक्त किया गया। इस प्रकार वह देश की पहली महिला राज्यपाल बनीं।
👩⚖️ महिलाओं के अधिकारों की आवाज
उन्होंने विधवा पुनर्विवाह, महिला शिक्षा और मताधिकार जैसे मुद्दों पर खुलकर आवाज उठाई। एनी बेसेंट के साथ मिलकर उन्होंने ‘महिला भारतीय संघ’ की स्थापना में भी भूमिका निभाई।
🕊️ निधन
2 मार्च 1949 को उनका निधन हो गया। लेकिन उनकी विचारधारा और योगदान आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
निष्कर्ष
Sarojini Naidu केवल एक कवयित्री या राजनेता नहीं थीं, बल्कि वह महिलाओं की स्वतंत्रता और समानता की प्रबल समर्थक थीं। स्वतंत्र भारत की पहचान गढ़ने में उनका योगदान अमूल्य है।
उनकी जयंती हमें देशभक्ति, साहस और सामाजिक न्याय के मूल्यों को याद दिलाती है।


