नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (NCCOEEE) के आह्वान पर देश के लगभग 27 लाख बिजली कर्मचारी और अभियंता 12 फरवरी को एक दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर रहेंगे। यह हड़ताल पावर सेक्टर के निजीकरण, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 के विरोध में आयोजित की जा रही है।
हड़ताल की प्रमुख मांगें
संघर्ष समिति के अनुसार हड़ताल की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को वापस लिया जाए
- प्रस्तावित नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 निरस्त की जाए
- पावर सेक्टर में निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगे
- पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण को रद्द किया जाए
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) बहाल की जाए
- आउटसोर्सिंग पर रोक लगाकर नियमित पदों पर सीधी भर्ती की जाए
- आउटसोर्स कर्मचारियों का नियमितीकरण किया जाए
किसानों और ट्रेड यूनियनों का भी समर्थन
संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि पहली बार बिजली कर्मचारियों के आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा और 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का समर्थन मिला है। बिजली कर्मचारी, अभियंता, मजदूर संगठन और किसान संगठनों की संयुक्त भागीदारी से यह हड़ताल स्वतंत्र भारत के इतिहास की सबसे बड़ी औद्योगिक कार्रवाइयों में से एक हो सकती है।
निजीकरण पर गंभीर चिंता
संघर्ष समिति ने कहा कि बिजली क्षेत्र में वितरण, उत्पादन और TBCB (टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग) के जरिए ट्रांसमिशन के निजीकरण की प्रक्रिया गरीब उपभोक्ताओं, छोटे एवं मध्यम उद्योगों और आम जनता के हितों के खिलाफ है। उनका कहना है कि निजीकरण से बिजली दरों में वृद्धि और सेवा की गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
आउटसोर्सिंग और छंटनी का मुद्दा
समिति ने आरोप लगाया कि पावर सेक्टर में नियमित प्रकृति के कार्यों के लिए बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग की जा रही है। कर्मचारियों की मांग है कि:
- संविदा कर्मियों की छंटनी रोकी जाए
- उन्हें नियमित किया जाए
- नियमित पदों पर नई भर्तियां की जाएं
शैलेन्द्र दुबे की अपील
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने देशभर के बिजली कर्मचारियों और अभियंताओं से 12 फरवरी की हड़ताल में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन कर्मचारियों के अधिकारों और सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा के लिए ऐतिहासिक साबित होगा।
लखनऊ में शक्ति भवन पर होगा बड़ा प्रदर्शन
संघर्ष समिति के अनुसार 12 फरवरी को प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं में बिजली कर्मचारी कार्यालयों से बाहर आकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।
राजधानी लखनऊ में सभी कार्यालयों के बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता दोपहर 12 बजे शक्ति भवन मुख्यालय पहुंचकर व्यापक प्रदर्शन करेंगे। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान भी शामिल होंगे।
संभावित असर
राष्ट्रव्यापी हड़ताल के चलते कई राज्यों में बिजली सेवाएं प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आपातकालीन सेवाओं को बाधित नहीं किया जाएगा।

