Thursday, July 9, 2026
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बिजली क्षेत्र के निजीकरण के विरोध में 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल, तैयारियाँ तेज

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि बिजली क्षेत्र के निजीकरण, इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 और श्रम संहिताओं के विरोध में 12 फरवरी को प्रस्तावित राष्ट्रव्यापी हड़ताल की तैयारियाँ अब तेज़ी से आगे बढ़ रही हैं। इसके साथ ही, इस आंदोलन को देशभर के विभिन्न मजदूर संगठनों का व्यापक समर्थन मिल रहा है।

गौरतलब है कि दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच और संयुक्त किसान मोर्चा ने इस हड़ताल का आह्वान किया है। परिणामस्वरूप, पिछले 440 दिनों से संघर्षरत उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मियों में नया उत्साह और जोश देखने को मिल रहा है।

दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों का संयुक्त समर्थन

संयुक्त मंच में शामिल प्रमुख ट्रेड यूनियनें इस प्रकार हैं:

  • इंटक (INTUC)
  • एटक (AITUC)
  • सीटू (CITU)
  • एचएमएस (HMS)
  • एआईयूटीयूसी (AIUTUC)
  • सीसीटीयू (CCTU)
  • सेवा (SEWA)
  • एआईसीसीटीयू (AICCTU)
  • एलपीएफ (LPF)
  • यूटीयूसी (UTUC)

इन सभी संगठनों की एकजुटता के चलते, बिजली क्षेत्र में निजीकरण के खिलाफ संघर्ष और अधिक व्यापक रूप ले रहा है।

इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल 2025 और निजीकरण का विरोध

इसी बीच, बिजली कर्मचारियों एवं अभियंताओं की राष्ट्रीय समन्वय समिति (नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी इम्प्लाइज एंड इंजीनियर्स) ने भी केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025, उत्तर प्रदेश में चल रही निजीकरण की प्रक्रिया तथा पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली के समर्थन में 12 फरवरी की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का समर्थन किया है।

वहीं दूसरी ओर, समिति ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

जनसंपर्क अभियान और रणनीति बैठक

आंदोलन को सफल बनाने के उद्देश्य से आज प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं में बिजली कर्मियों द्वारा व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया गया।
इसके अलावा, संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने संयुक्त किसान मोर्चा और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर आंदोलन की रणनीति तय की।

इस बैठक के दौरान, आंदोलन को शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया।

25 करोड़ कर्मचारियों के समर्थन से संघर्ष और मजबूत

संघर्ष समिति के अनुसार, देशभर के लगभग 25 करोड़ कर्मचारियों और मजदूरों का समर्थन मिलने से उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मी निजीकरण के विरोध में और अधिक मजबूती के साथ संघर्ष को आगे बढ़ा रहे हैं।

अंततः, इसी क्रम में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं पर आज भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा।

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