इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में भारत ने वैश्विक स्तर पर एक अहम उपलब्धि हासिल की है। सम्मेलन के दौरान ‘Delhi Declaration’ पर 70 से अधिक देशों ने हस्ताक्षर किए, जिससे कृत्रिम मेधा (AI) के क्षेत्र में साझा वैश्विक दृष्टिकोण बनाने में भारत की भूमिका और मजबूत हुई है।
सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री Ashwini Vaishnaw ने बताया कि हस्ताक्षर करने वाले देशों की संख्या 80 के पार जाने की संभावना है। पिछली बार यह आंकड़ा लगभग 60 देशों तक सीमित था।
250 अरब डॉलर से अधिक निवेश प्रतिबद्धता
मंत्री के अनुसार, शिखर सम्मेलन में बुनियादी ढांचे और तकनीकी विकास से जुड़े क्षेत्रों में 250 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता सामने आई है।
प्रदर्शनी में पांच लाख से अधिक आगंतुकों की उपस्थिति दर्ज की गई, जिसे आयोजन की बड़ी सफलता माना जा रहा है।
वैश्विक सहमति और पारदर्शिता
वैष्णव ने कहा कि दिल्ली घोषणापत्र पर व्यापक सहमति बनी है और सम्मेलन समाप्त होने के बाद इसका पूरा विवरण पारदर्शी तरीके से साझा किया जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि कई देशों के विदेश मंत्री इस पहल पर भारत सरकार के साथ चर्चा कर रहे हैं।
सेमीकंडक्टर और इंडस्ट्रियल विस्तार
आईटी मंत्री ने जानकारी दी कि उत्तर प्रदेश में अगले सेमीकंडक्टर संयंत्र की नींव रखी जाएगी। साथ ही Micron Technology की फैक्टरी में 28 फरवरी से वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने जा रहा है।
उन्होंने इसे देश के लिए एक बड़ा औद्योगिक कदम बताते हुए कहा कि यह संयंत्र लगभग 10 क्रिकेट मैदानों के बराबर क्षेत्र में फैला होगा।
AI मिशन 2.0 का लक्ष्य
भारत एआई मिशन 2.0 के तहत लगभग 20 लाख लोगों को एआई कौशल में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। मंत्री ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद भारतीय इंजीनियरों और शोधकर्ताओं ने उच्च गुणवत्ता वाले स्वदेशी मॉडल विकसित किए हैं, जिन्हें वैश्विक सराहना मिल रही है।
विपक्ष की आलोचना पर प्रतिक्रिया
विपक्ष की ओर से उठाए गए सवालों पर मंत्री ने कहा कि शिखर सम्मेलन को लेकर युवाओं में उत्साह स्पष्ट दिखाई दिया और इसे बाधित करने के प्रयासों को जनता ने स्वीकार नहीं किया।
निष्कर्ष
AI Summit 2026 के जरिए भारत ने न केवल तकनीकी क्षेत्र में निवेश आकर्षित किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर एआई नीति निर्माण में भी अपनी सक्रिय भूमिका दर्ज कराई है।
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