Tuesday, May 19, 2026
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पश्चिम एशिया संकट पर मोदी-मैक्रॉन की बातचीत, क्षेत्र में शांति बहाली के लिए कूटनीति पर जोर

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गुरुवार को फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron से फोन पर बातचीत कर क्षेत्र की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त की।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष पर चर्चा की और शांति बहाली के लिए संवाद (Dialogue) और कूटनीति (Diplomacy) के रास्ते को सबसे जरूरी बताया।

पीएम मोदी ने अपने पोस्ट में लिखा कि उन्होंने अपने मित्र राष्ट्रपति मैक्रॉन से बात की और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर साझा चिंताओं पर चर्चा की। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने के लिए संवाद और कूटनीति की दिशा में प्रयासों का समन्वय जरूरी है।

खाड़ी देशों के नेताओं से भी बातचीत

2 और 3 मार्च के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त अरब अमीरात, इज़राइल, सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन, ओमान, कुवैत और कतर के नेताओं से भी बातचीत की। इन चर्चाओं के दौरान उन्होंने हालिया हमलों की कड़ी निंदा की और क्षेत्र में रहने वाले भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कुशलक्षेम की जानकारी ली।

यह पहल इस बात को दर्शाती है कि भारत पश्चिम एशिया में बढ़ती अस्थिरता के बीच अपने प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहा है।

नेतन्याहू से भी की थी बातचीत

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से भी टेलीफोन पर बातचीत की थी। उस दौरान उन्होंने क्षेत्र में सभी प्रकार की शत्रुता को जल्द समाप्त करने और शांति बहाल करने की जरूरत पर जोर दिया था।

मैक्रॉन ने ईरान पर जताई चिंता

इस बीच राष्ट्रपति मैक्रॉन ने अपने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि मौजूदा स्थिति के लिए ईरान को काफी हद तक जिम्मेदार माना जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान ने एक खतरनाक परमाणु कार्यक्रम और उन्नत बैलिस्टिक क्षमताएं विकसित की हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ा है।

हालांकि मैक्रॉन ने अमेरिका और इज़राइल द्वारा शुरू किए गए संयुक्त सैन्य अभियान पर भी चिंता जताते हुए कहा कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे से बाहर लिया गया प्रतीत होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में भारत की सक्रिय कूटनीति क्षेत्र में तनाव कम करने और संवाद के रास्ते को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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