मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका, रूस और ईरान के बीच कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि जल्द ही ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जा सकता है। ट्रंप ने कहा कि इस बार उन इलाकों और समूहों को भी निशाना बनाया जा सकता है जिन्हें पहले टारगेट नहीं किया गया था।
ट्रंप ने ईरान पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि एक समय था जब ईरान दूसरे देशों पर दबाव बनाने की कोशिश करता था, लेकिन अब वह खुद एक कमजोर और हारा हुआ देश बन चुका है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले कई दशकों तक ईरान इसी स्थिति में रहेगा, जब तक वह पूरी तरह झुक नहीं जाता।
इसी बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से फोन पर बातचीत की है। यह बातचीत उस समय हुई जब इजरायल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है।
क्रेमलिन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पुतिन ने हालात को और बिगड़ने से रोकने के लिए तुरंत संघर्ष विराम की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व से जुड़े मुद्दों का समाधान ताकत के इस्तेमाल से नहीं बल्कि बातचीत और कूटनीति के जरिए निकाला जाना चाहिए।
पुतिन ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई और उनके परिवार के सदस्यों की मौत पर गहरा दुख जताया और इस घटना की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे इंसानी नैतिकता और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताया।
क्रेमलिन ने यह भी बताया कि पुतिन खाड़ी सहयोग परिषद यानी जीसीसी देशों के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में बने हुए हैं और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए बातचीत जारी है।
वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने रूस के समर्थन के लिए पुतिन का आभार जताया। उन्होंने कहा कि रूस ने जिस तरह ईरान की संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए समर्थन दिया है, वह बेहद महत्वपूर्ण है।
इस बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची से फोन पर बातचीत की और पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की।
रूस ने अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे हमले अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों को कमजोर करते हैं। रूस का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो मॉस्को इस विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए भी तैयार है।
कुल मिलाकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रूस की कोशिश यही है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए हालात को शांत किया जाए।
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