ईरान जंग और गाजा संकट के बीच दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाला देश इंडोनेशिया अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की ‘Board of Peace’ पहल का स्थायी सदस्य बनने से पीछे हट गया है। इंडोनेशिया ने साफ कर दिया है कि वह स्थायी सदस्यता के लिए मांगी जा रही 1 अरब डॉलर की राशि नहीं देगा।
इंडोनेशिया के राष्ट्रपति Prabowo Subianto ने कहा कि उनका देश केवल शांति स्थापना के लिए सैनिक भेजने की प्रतिबद्धता रखता है, लेकिन स्थायी सदस्य बनने के लिए इतनी बड़ी रकम देना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गाजा के पुनर्निर्माण के लिए इंडोनेशिया जो भी मदद देगा, वह अपनी मर्जी से और मानवीय संस्थाओं के जरिए देगा।
फरवरी की शुरुआत में इंडोनेशिया सरकार के अंदर इस मुद्दे को लेकर भ्रम की स्थिति भी बनी रही। वित्त मंत्री ने कहा था कि गाजा की मदद के लिए रक्षा बजट से पैसा निकाला जा सकता है, जबकि विदेश मंत्री ने कहा कि पैसा देना अनिवार्य नहीं है। बाद में राष्ट्रपति ने स्थिति साफ करते हुए कहा कि इंडोनेशिया किसी दबाव में आकर फंड नहीं देगा।
वाशिंगटन डीसी में हुई ‘Board of Peace’ की बैठक में अमेरिका और खाड़ी देशों ने कुल 17 बिलियन डॉलर देने का वादा किया, लेकिन इंडोनेशिया ने किसी भी फंड का वादा नहीं किया। इंडोनेशिया का कहना है कि वह अंतरराष्ट्रीय बैठकों में शामिल रहेगा, लेकिन आर्थिक योगदान अपनी शर्तों पर ही करेगा।
![]()

