35 देशों की उम्मीद भारत पर, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने को लेकर बड़ी बैठक
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने के संकट के बीच भारत की भूमिका बेहद अहम हो गई है। यूनाइटेड किंगडम द्वारा आयोजित एक बहुराष्ट्रीय वर्चुअल शिखर सम्मेलन में भारत सहित लगभग 30 देशों को आमंत्रित किया गया है, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर चर्चा होगी।
भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार इस बैठक में भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिसरी हिस्सा लेंगे। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि भारत ईरान और अन्य देशों के संपर्क में है ताकि भारतीय जहाजों के लिए सुरक्षित और निर्बाध मार्ग सुनिश्चित किया जा सके।
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। भारत के लिए यह मार्ग और भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपने कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से आयात करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत अपने संतुलित कूटनीतिक संबंधों के कारण इस संकट में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। भारत के नरेंद्र मोदी की पश्चिम एशिया के कई देशों के साथ अच्छे संबंध हैं, जिसके कारण भारत मध्यस्थ की भूमिका में भी नजर आ सकता है।
बताया जा रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण बढ़ा है, जिससे कई तेल टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर असर पड़ा है।
भारत के लिए यह केवल अंतरराष्ट्रीय मुद्दा नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा का भी बड़ा मामला है, क्योंकि भारत के कच्चे तेल आयात का लगभग 40 से 50 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से होकर आता है। ऐसे में इस मार्ग का बंद होना भारत की अर्थव्यवस्था और ईंधन सप्लाई पर बड़ा असर डाल सकता है।
इस बैठक के बाद यह देखना अहम होगा कि क्या भारत इस संकट के समाधान में बड़ी कूटनीतिक भूमिका निभा पाता है या नहीं।
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