भारत और वियतनाम ने अपने रिश्तों को नई रणनीतिक ऊंचाई देते हुए “एन्हांस्ड कंप्रिहेंसिव स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप” का ऐतिहासिक फैसला लिया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi और वियतनाम के राष्ट्रपति To Lam के बीच नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय वार्ता के बाद दोनों देशों ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, डिजिटल भुगतान, दुर्लभ खनिज, व्यापार और संस्कृति समेत 13 बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए। माना जा रहा है कि इस साझेदारी से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती दादागिरी को चुनौती मिल सकती है।
संयुक्त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वियतनाम भारत की एक्ट ईस्ट नीति और विजन महासागर का महत्वपूर्ण स्तंभ है। उन्होंने कहा कि दोनों देश कानून आधारित व्यवस्था, शांति, स्थिरता और क्षेत्रीय समृद्धि के लिए मिलकर काम करेंगे। यह बयान ऐसे समय आया है जब दक्षिण चीन सागर में चीन की सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं।
भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग पिछले कुछ वर्षों में तेजी से मजबूत हुआ है। दोनों देशों ने पहले ही पनडुब्बी खोज एवं बचाव तंत्र विकसित करने पर समझौता किया था। अब नई साझेदारी के तहत रक्षा उत्पादन, समुद्री सुरक्षा और सैन्य प्रशिक्षण में सहयोग और बढ़ाया जाएगा। सामरिक विशेषज्ञों का मानना है कि दक्षिण चीन सागर में चीन के दबाव का सामना कर रहे वियतनाम और हिंद महासागर क्षेत्र में संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे भारत का यह गठजोड़ क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकता है।
आर्थिक क्षेत्र में भी दोनों देशों ने बड़ा लक्ष्य तय किया है। भारत और वियतनाम के बीच द्विपक्षीय व्यापार पिछले दशक में दोगुना होकर 16 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। अब इसे वर्ष 2030 तक 25 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। कृषि, मत्स्य, पशु उत्पाद और दवा क्षेत्र में व्यापार आसान बनाने पर सहमति बनी है। इसके तहत भारत से अंगूर और अनार वियतनाम भेजे जाएंगे, जबकि वियतनाम का डूरियन और पोमेलो भारतीय बाजार में पहुंचेगा।
डिजिटल क्षेत्र में भी बड़ा फैसला लिया गया। भारत की यूपीआई प्रणाली को वियतनाम की त्वरित भुगतान प्रणाली से जोड़ने पर सहमति बनी है। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक और वियतनाम के केंद्रीय बैंक के बीच समझौता हुआ। इससे दोनों देशों के पर्यटकों, व्यापारियों और निवेशकों को सीमा पार भुगतान में आसानी होगी। माना जा रहा है कि इससे दक्षिण पूर्व एशिया में भारत की डिजिटल मौजूदगी और मजबूत होगी।
13 समझौतों में दुर्लभ खनिज तत्वों और नई तकनीक पर सहयोग को सबसे अहम माना जा रहा है। दुर्लभ खनिज आज सेमीकंडक्टर, बैटरी, रक्षा उपकरण और हाईटेक उद्योगों की रीढ़ हैं। चीन लंबे समय से इन संसाधनों पर प्रभाव बनाए हुए है। ऐसे में भारत और वियतनाम का यह समझौता वैश्विक सप्लाई चेन को सुरक्षित और विविध बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
सांस्कृतिक रिश्तों को भी नई मजबूती देने पर जोर दिया गया। भारत वियतनाम की प्राचीन चम्पा सभ्यता से जुड़े मंदिरों के संरक्षण में सहयोग कर रहा है। साथ ही चम्पा सभ्यता की पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण का भी निर्णय लिया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत और वियतनाम की यह साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक भू-राजनीतिक महत्व भी है। इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और चीन के विस्तारवाद के बीच यह गठबंधन आने वाले वर्षों में एशिया की रणनीतिक राजनीति को नया आकार दे सकता है।
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