भारतीय बैडमिंटन जगत से एक भावुक और चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। देश के स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी Satwiksairaj Rankireddy ने कहा है कि वह अपने बच्चों को बैडमिंटन खेलने के लिए प्रोत्साहित नहीं करेंगे। उनकी यह प्रतिक्रिया खेल जगत में चर्चा का विषय बन गई है।
दरअसल, भारत की मशहूर युगल जोड़ी Satwiksairaj Rankireddy और Chirag Shetty ने हाल ही में एक बातचीत के दौरान खिलाड़ियों को मिलने वाले सीमित सम्मान और पहचान को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की। खिलाड़ियों का कहना है कि थॉमस कप जैसी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करने के बाद भी उन्हें देश में वह पहचान नहीं मिली, जिसकी वे उम्मीद करते थे।
गौरतलब है कि भारत ने वर्ष 2022 में पहली बार Thomas Cup का खिताब जीता था। इसे भारतीय बैडमिंटन इतिहास की सबसे बड़ी उपलब्धियों में गिना जाता है। इसके बावजूद खिलाड़ियों का कहना है कि आम लोगों के बीच इस जीत को लेकर अपेक्षित उत्साह और पहचान देखने को नहीं मिली।
सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी ने बताया कि जब टीम जर्मनी से लंबी यात्रा के बाद हैदराबाद पहुंची, तो एयरपोर्ट पर किसी ने उन्हें पहचानने तक की कोशिश नहीं की। उन्होंने कहा कि किसी ने यह तक नहीं पूछा कि वे कौन सा मेडल जीतकर आए हैं। यह अनुभव उनके लिए काफी निराशाजनक था।
वहीं Chirag Shetty ने कहा कि खिलाड़ियों को किसी भव्य स्वागत की उम्मीद नहीं होती, लेकिन कम से कम उनके प्रदर्शन की सराहना जरूर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और खेल संस्थाएं प्रयास कर रही हैं, लेकिन देश में अभी भी खेल संस्कृति को लेकर जागरूकता की कमी है।
भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी H. S. Prannoy ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि थॉमस कप को दुनिया में उतनी पहचान नहीं मिलती, जितनी क्रिकेट विश्व कप या अन्य बड़े टूर्नामेंट्स को मिलती है। उनके मुताबिक इस टूर्नामेंट को और अधिक लोकप्रिय बनाने की जरूरत है।
सात्विक ने यह भी कहा कि खिलाड़ियों को सोशल मीडिया पर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि निजी कारणों से एक टूर्नामेंट छोड़ने पर उन्हें काफी नकारात्मक टिप्पणियां मिलीं, जिससे मानसिक दबाव बढ़ा। उन्होंने संकेत दिया कि वह सोशल मीडिया से दूरी बनाने पर विचार कर रहे हैं।
इस बीच युवा खिलाड़ी Ayush Shetty का नाम भी चर्चा में आया, जब टीम के खिलाड़ियों का एक मजेदार वीडियो वायरल हुआ। हालांकि यह वीडियो हल्के-फुल्के अंदाज में था, लेकिन इसके पीछे खिलाड़ियों की थकान और मानसिक दबाव भी साफ दिखाई दिया।
भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ियों की यह प्रतिक्रिया देश में गैर-क्रिकेट खेलों को मिलने वाले सम्मान और समर्थन को लेकर कई बड़े सवाल खड़े करती है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खिलाड़ियों को उचित पहचान और मानसिक सहयोग मिले, तो भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकता है।
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