भारत में सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। टेक दिग्गज Amazon की लो-अर्थ ऑर्बिट यानी LEO Satellite Broadband परियोजना ने भारत को अपने सबसे महत्वपूर्ण संभावित बाजारों में शामिल बताया है। कंपनी का कहना है कि भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं और आने वाले समय में सैटेलाइट इंटरनेट लाखों लोगों तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
स्पेस पॉलिसी कॉन्फ्रेंस 2026 के दौरान Amazon LEO के अंतरराष्ट्रीय स्पेक्ट्रम प्रबंधन एवं रणनीति प्रमुख क्रिस होफर ने बताया कि कंपनी के लगभग 400 उपग्रह पृथ्वी की निचली कक्षा यानी लो-अर्थ ऑर्बिट में मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि कंपनी की निर्माण क्षमता इतनी तेज हो चुकी है कि वह हर सप्ताह 15 से अधिक नए उपग्रह तैयार कर रही है। उनके अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती अब उपग्रह बनाना नहीं बल्कि उन्हें अंतरिक्ष में भेजने के लिए पर्याप्त रॉकेट उपलब्ध कराना है।
क्रिस होफर ने बताया कि वर्ष 2019 में यह परियोजना केवल योजना के स्तर पर थी, लेकिन आज कंपनी ने इस दिशा में काफी प्रगति कर ली है और वैश्विक स्तर पर सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं का विस्तार तेजी से कर रही है।
उन्होंने भारत का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि देश में डिजिटल तकनीक को बढ़ावा देने वाली नीतियां और विशाल आबादी इसे सैटेलाइट ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बनाती हैं।
उनका कहना था कि भारत में अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं, जहां तेज और भरोसेमंद इंटरनेट कनेक्टिविटी पूरी तरह उपलब्ध नहीं है। ऐसे क्षेत्रों में सैटेलाइट इंटरनेट महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
सैटेलाइट इंटरनेट पारंपरिक मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क पर पूरी तरह निर्भर नहीं होता। इसमें पृथ्वी की निचली कक्षा में मौजूद उपग्रहों के माध्यम से इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराई जाती है। यही वजह है कि दूरदराज़ के गांवों, पहाड़ी इलाकों, जंगलों और ऐसे क्षेत्रों में भी इंटरनेट पहुंचाया जा सकता है जहां सामान्य नेटवर्क स्थापित करना मुश्किल होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे विशाल देश में सैटेलाइट इंटरनेट शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन कारोबार और सरकारी सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हालांकि, भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए कंपनियों को नियामकीय मंजूरी, स्पेक्ट्रम आवंटन और अन्य आवश्यक सरकारी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
भारत में पहले से ही कई वैश्विक और घरेलू कंपनियां सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में अवसर तलाश रही हैं। ऐसे में आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और भी बढ़ सकती है।
Amazon का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल व्यावसायिक विस्तार नहीं, बल्कि उन लोगों तक भी इंटरनेट पहुंचाना है जो अब तक डिजिटल कनेक्टिविटी से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए हैं।
यदि भविष्य में भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं का बड़े स्तर पर विस्तार होता है, तो इससे डिजिटल इंडिया अभियान को भी नई गति मिल सकती है और लाखों लोगों को बेहतर इंटरनेट सुविधा मिल सकेगी।
फिलहाल Amazon अपनी वैश्विक सैटेलाइट परियोजना का विस्तार कर रही है और भारत को इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है। अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी भारत में अपनी सेवाओं की शुरुआत कब और किस रूप में करती है।
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