जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल ने अपनी एयरलाइन के 2019 में बंद होने को लेकर बड़ा दावा किया है। मुंबई की एक अदालत में दायर अपनी याचिका में गोयल ने कहा है कि जेट एयरवेज का वित्तीय संकट किसी धोखाधड़ी की वजह से नहीं, बल्कि प्रतिकूल कारोबारी और आर्थिक परिस्थितियों के कारण पैदा हुआ था। उन्होंने धन शोधन मामले में खुद को आरोपों से मुक्त किए जाने की मांग की है। हालांकि प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने गोयल के दावों का विरोध किया है और उन पर सुनियोजित बैंक धोखाधड़ी तथा धन के गबन का आरोप लगाया है।
नरेश गोयल की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि जेट एयरवेज यानी जेट एयरवेज इंडिया लिमिटेड को अप्रैल 2019 तक गंभीर वित्तीय मुश्किलों का सामना करना पड़ा। गोयल का कहना है कि इसके पीछे कई ऐसी परिस्थितियां थीं, जिन पर एयरलाइन प्रबंधन का सीधा नियंत्रण नहीं था। इनमें विमान ईंधन की बढ़ती कीमतें, विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव और एयरलाइन सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियां शामिल थीं।
गोयल के मुताबिक, इन परिस्थितियों की वजह से एयरलाइन की वित्तीय देनदारियां लगातार बढ़ती गईं और कंपनी के लिए उन्हें पूरा करना मुश्किल होता चला गया। आखिरकार अप्रैल 2019 में जेट एयरवेज को अपना परिचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। इसके बाद एयरलाइन की मुश्किलें लगातार बढ़ती गईं और जेट एयरवेज का संचालन दोबारा सामान्य रूप से शुरू नहीं हो सका।
अपनी याचिका में गोयल ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जेट एयरवेज का संकट बाजार की प्रतिकूल परिस्थितियों का नतीजा था। उनका दावा है कि एयरलाइन के बंद होने के पीछे उनके या कंपनी के अन्य प्रबंधन सदस्यों द्वारा किया गया कोई धोखाधड़ी वाला आचरण जिम्मेदार नहीं था। यानी गोयल अदालत के सामने यह स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं कि कारोबारी विफलता और आपराधिक धोखाधड़ी को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
लेकिन इस मामले में ईडी का पक्ष बिल्कुल अलग है। जांच एजेंसी ने गोयल के दावों का विरोध करते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने एक सुनियोजित धोखाधड़ी की योजना बनाई थी। ईडी का आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया के जरिए एक प्रमुख भारतीय एयरलाइन को वित्तीय रूप से नुकसान पहुंचाया गया और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के साथ धोखाधड़ी की गई।
ईडी ने नरेश गोयल पर धन शोधन का भी आरोप लगाया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, जेट एयरवेज को केनरा बैंक की ओर से दिए गए 538.62 करोड़ रुपये के ऋण से जुड़ी कथित हेराफेरी के मामले में धन शोधन किया गया। एजेंसी का दावा है कि इस धन का इस्तेमाल ऐसे तरीके से किया गया, जिससे कथित तौर पर गोयल और उनके परिवार को फायदा पहुंचा।
नरेश गोयल को सितंबर 2023 में ईडी ने गिरफ्तार किया था। फिलहाल 77 वर्षीय गोयल चिकित्सा आधार पर जमानत पर हैं। उनके खिलाफ चल रहा मामला सिर्फ एयरलाइन के वित्तीय संकट तक सीमित नहीं है, बल्कि कथित बैंक धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से भी जुड़ा हुआ है।
गोयल ने ईडी के उन आरोपों को भी खारिज किया है, जिनमें सामान्य बिक्री प्रतिनिधि यानी GSA व्यवस्था के जरिए धन की कथित हेराफेरी की बात कही गई है। उनका कहना है कि एयरलाइन के वित्तीय संकट को धन शोधन का सबूत नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार जेट एयरवेज की आर्थिक स्थिति बिगड़ने के पीछे कारोबारी और उद्योग से जुड़ी परिस्थितियां थीं।
एयरलाइन उद्योग में विमान ईंधन की कीमतें किसी भी कंपनी की लागत पर बड़ा असर डाल सकती हैं। इसके अलावा विदेशी मुद्रा में उतार-चढ़ाव भी एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र में कई खर्च विदेशी मुद्रा से जुड़े होते हैं। इसके साथ ही घरेलू विमानन बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ने पर टिकट कीमतों और मुनाफे पर दबाव आ सकता है।
यही वे परिस्थितियां हैं जिन्हें नरेश गोयल अपनी याचिका में जेट एयरवेज के संकट की प्रमुख वजह बता रहे हैं। उनका तर्क है कि कंपनी का कारोबार मुश्किल परिस्थितियों में फंसा और बढ़ती देनदारियों के कारण संचालन जारी रखना संभव नहीं रहा।
दूसरी तरफ ईडी का आरोप है कि मामला केवल बाजार की परिस्थितियों से पैदा हुए कारोबारी नुकसान का नहीं है। जांच एजेंसी कथित वित्तीय अनियमितताओं को एक सुनियोजित धोखाधड़ी और धन शोधन नेटवर्क से जोड़ रही है। यही वजह है कि अदालत के सामने दोनों पक्षों के दावों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
अब इस मामले में अदालत को यह देखना होगा कि जेट एयरवेज के वित्तीय संकट की वास्तविक वजह क्या थी और क्या लगाए गए वित्तीय अनियमितताओं के आरोप आपराधिक जिम्मेदारी तय करने के लिए पर्याप्त हैं। नरेश गोयल की याचिका में जहां बाजार की परिस्थितियों को एयरलाइन के पतन की मुख्य वजह बताया गया है, वहीं ईडी कथित धोखाधड़ी और धन शोधन के अपने आरोपों पर कायम है।
कुल मिलाकर जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल का यह बयान मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी दलील के तौर पर सामने आया है। एक तरफ गोयल का कहना है कि एयरलाइन बाजार की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण संकट में आई और उन्होंने कोई धोखाधड़ी नहीं की, जबकि दूसरी तरफ ईडी का आरोप है कि इसके पीछे सुनियोजित वित्तीय धोखाधड़ी और धन शोधन का नेटवर्क था। अब इस पूरे मामले में अदालत की आगे की कार्यवाही और फैसले पर सबकी नजर रहेगी।
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