ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति की ओर से सनातन ध्वजवाहिका सपना गोयल के नेतृत्व में श्रावणी हरियाली अमावस्या के अवसर पर बुधवार को भव्य “वंदे मातरम् तिरंगा यात्रा” निकाली गई। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित इस यात्रा में बड़ी संख्या में मातृशक्तियों ने भाग लिया। इस दौरान राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन हुआ और “भारत माता की जय” तथा “वंदे मातरम्” के जयघोष से वातावरण देशभक्तिमय हो उठा।
तिरंगा यात्रा इंदिरा नगर स्थित लेखराज मेट्रो स्टेशन के समीप शिव शक्ति शनिदेव मंदिर से प्रारंभ होकर नीलगिरी चौराहे तक पहुंची। आयोजन के दौरान महिलाओं को तिरंगा दुपट्टा प्रदान कर सम्मानित भी किया गया।
सपना गोयल ने कहा कि धर्म और राष्ट्र एक-दूसरे के पूरक हैं और राष्ट्रगीत वंदे मातरम् देशवासियों में राष्ट्रभक्ति, एकता और राष्ट्रीय स्वाभिमान की भावना को मजबूत करता है। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह गीत भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देशवासियों के लिए प्रेरणा का महत्वपूर्ण स्रोत बना और आज भी राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में इसकी विशेष भूमिका है।
उन्होंने कहा कि भारत आज आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 जैसे व्यापक राष्ट्रीय लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में वंदे मातरम् जैसे राष्ट्रीय प्रतीक नागरिकों को अपने कर्तव्यों, जिम्मेदारियों और राष्ट्रहित के प्रति जागरूक करने का काम करते हैं।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि पूर्व पार्षद एवं भाजपा नेता दिलीप श्रीवास्तव ने वंदे मातरम् को भारतीय स्वाभिमान और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक बताया। आयोजन में बीना नौटियाल, रानी सिंह, विमला देवी, सुमन सिंह, लक्ष्मी सिंह, सभ्या पाण्डेय, सोनी यादव, ममता तिवारी, लिपिका, बेबी सिंह, ममता रावत, किरण रावत, दीक्षा, इंदु सिंह, रूबी सिंह, रीता पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में महिलाओं ने सहभागिता की।
16 अगस्त को होगा हरियाली तीज महोत्सव
सपना गोयल ने बताया कि आगामी 16 अगस्त को हरियाली तीज के अवसर पर सनातनी महिलाओं के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह आयोजन चिनहट में वीमार्ट के पास रजत डिग्री कॉलेज के सामने स्थित सनातन धाम लॉन परिसर में होगा।
मासिक आध्यात्मिक संगोष्ठी के अंतर्गत आयोजित होने वाले इस समारोह में “भगवान शिव का महा दरबार” मुख्य आकर्षण रहेगा। इसके साथ ही झूला उत्सव का आयोजन होगा, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं सावन के पारंपरिक झूले का आनंद लेंगी।
आयोजन के दौरान सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय महिलाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से “सनातनी हरा पटका” प्रदान किया जाएगा। वहीं बिना किसी सरकारी अनुदान के समाजसेवा में सक्रिय महिलाओं को “सामाजिक अलंकरण” से सम्मानित किए जाने की योजना है।
सुंदरकांड महाअभियान को व्यापक स्तर पर विस्तार देने का दावा
सपना गोयल ने बताया कि ईश्वरीय स्वप्नाशीष सेवा समिति का प्रमुख उद्देश्य भारतीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के माध्यम से समाज में सेवा, एकता और राष्ट्रभाव की भावना को मजबूत करना है। इसी उद्देश्य के तहत समिति द्वारा नियमित रूप से सुंदरकांड पाठ आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि मंगलवार और शनिवार को आसपास के मंदिरों में सामूहिक सुंदरकांड पाठ के साथ विभिन्न स्थानों पर धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। समिति के अनुसार, उसका सुंदरकांड अभियान उत्तर प्रदेश के 42 जिलों और देश के 10 राज्यों तक पहुंच चुका है।
समिति की ओर से बताया गया कि 10 मार्च 2024 को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर लखनऊ के झूलेलाल घाट पर पांच हजार से अधिक महिलाओं ने सामूहिक सुंदरकांड पाठ में भाग लिया था। इसके बाद 23 जून 2024 को नैमिषारण्य में भी बड़े स्तर पर सामूहिक सुंदरकांड महायज्ञ आयोजित किया गया, जिसमें लगभग पांच हजार महिलाओं की सहभागिता बताई गई।
समिति के अनुसार, उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के अलावा कोटद्वार स्थित सिद्धबली मंदिर, वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर, हरिद्वार की हर की पौड़ी, रुड़की के महादेव मंदिर, चित्रकूट के रामघाट, प्रयागराज के लेटे हनुमान मंदिर और कानपुर के आनंदेश्वर महादेव मंदिर परिसर में भी सामूहिक सुंदरकांड पाठ आयोजित किए जा चुके हैं। मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर परिसर में भी बड़ी संख्या में महिलाओं ने सामूहिक सुंदरकांड पाठ में सहभागिता की।
अयोध्या में जारी है मासिक सुंदरकांड पाठ
सपना गोयल के अनुसार, 11 सितंबर 2024 से अयोध्या में मासिक सुंदरकांड पाठ की श्रृंखला शुरू की गई। समिति की ओर से बताया गया कि आगामी 29 अगस्त को अयोध्या में 15वां सामूहिक सुंदरकांड पाठ आयोजित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि समिति “सेवा परमो धर्मः” को अपने कार्यों का आधार मानते हुए जरूरतमंदों की सहायता के लिए भी विभिन्न गतिविधियां संचालित करती है। सर्दियों में कंबल वितरण तथा धार्मिक एवं सामाजिक अवसरों पर भंडारे जैसे सेवा कार्य किए जाते हैं।
सपना गोयल ने कहा कि उनका लक्ष्य भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाते हुए देश को पुनः “विश्व गुरु” के रूप में प्रतिष्ठित करने की दिशा में सामाजिक सहभागिता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आयोजनों के साथ सेवा और राष्ट्रभाव को जोड़कर समाज में सकारात्मक चेतना का विस्तार किया जा सकता है।
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