हरियाणा के एक कारोबारी को सरकारी पद और प्रतिष्ठित जिम्मेदारी दिलाने का झांसा देकर कथित तौर पर 2.9 करोड़ रुपये की ठगी किए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि छह लोगों ने मिलकर केंद्र सरकार से जुड़ी एक फर्जी काउंसिल तैयार की और कारोबारी को हरियाणा में उसका चेयरपर्सन बनाने का भरोसा दिया। मामला सामने आने के बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत की, जिसके आधार पर छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
बताया जा रहा है कि कारोबारी को आरोपियों ने एक ऐसे सरकारी पद का सपना दिखाया, जिससे उसे प्रतिष्ठा के साथ कई तरह की सुविधाएं मिलने की बात कही गई। आरोपियों ने कथित तौर पर दावा किया कि केंद्र सरकार से जुड़ी एक काउंसिल में हरियाणा के चेयरपर्सन का पद खाली है और कारोबारी को इस पद पर नियुक्त कराया जा सकता है। शुरुआत में बातचीत इस तरह की गई कि कारोबारी को पूरा मामला वास्तविक और सरकारी प्रक्रिया का हिस्सा नजर आया।
आरोप है कि कारोबारी का भरोसा जीतने के लिए उसे प्रभावशाली लोगों से मुलाकात कराने और सरकारी स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ने का दावा किया गया। इसी क्रम में पांच सितारा होटल में इंटरव्यू तक आयोजित कराया गया। होटल में हुए इस कथित इंटरव्यू ने कारोबारी के भरोसे को और मजबूत कर दिया। उसे लगा कि वास्तव में उसकी नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही उसे सरकारी काउंसिल की जिम्मेदारी मिल सकती है।
इसके बाद कथित तौर पर अलग-अलग कारणों का हवाला देकर कारोबारी से रकम की मांग की जाने लगी। कभी नियुक्ति की प्रक्रिया, कभी काउंसिल से जुड़े खर्च और कभी अन्य औपचारिकताओं के नाम पर पैसे लिए जाने का आरोप है। कारोबारी ने आरोपियों पर विश्वास करते हुए अलग-अलग समय पर रकम दी। देखते ही देखते यह रकम करीब 2.9 करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
कारोबारी को उम्मीद थी कि इतनी बड़ी रकम खर्च करने के बाद उसे चेयरपर्सन का पद मिल जाएगा। लेकिन समय गुजरने के बावजूद नियुक्ति नहीं हुई। इसके बाद कारोबारी को पूरे मामले पर शक होने लगा। उसने आरोपियों से संपर्क कर अपनी रकम और नियुक्ति को लेकर जवाब मांगा। आरोप है कि इस दौरान उसे लगातार अलग-अलग बहाने दिए जाते रहे और मामला टलता चला गया।
इसके बाद कारोबारी ने मामले की सच्चाई जानने के लिए काउंसिल और उसके सरकारी संबंधों के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की। इसी दौरान उसे कथित तौर पर पता चला कि जिस काउंसिल और पद के नाम पर उससे इतनी बड़ी रकम ली गई, उसकी वास्तविकता संदिग्ध है। इसके बाद उसने पुलिस के पास पहुंचकर पूरी शिकायत दर्ज कराई और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों ने कारोबारी से संपर्क कैसे किया, फर्जी काउंसिल से जुड़े दस्तावेज किस तरह तैयार किए गए और 2.9 करोड़ रुपये की रकम किन-किन माध्यमों से ली गई। पुलिस पैसों के लेनदेन और आरोपियों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या इस कथित ठगी में केवल छह लोग शामिल हैं या इनके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। सरकारी पद और प्रभावशाली जिम्मेदारी दिलाने के नाम पर इससे पहले भी ठगी के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन इस मामले में रकम काफी बड़ी बताई जा रही है।
फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। एफआईआर दर्ज होने के बाद अब आरोपियों से पूछताछ और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोपों की पूरी सच्चाई पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
यह मामला लोगों के लिए एक चेतावनी भी है कि किसी सरकारी पद, नियुक्ति या सरकारी संस्था से जुड़े होने का दावा करने वाले व्यक्ति पर बिना सत्यापन के भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी भी नियुक्ति या सरकारी जिम्मेदारी के नाम पर बड़ी रकम मांगी जाए तो संबंधित विभाग से सीधे इसकी पुष्टि करना जरूरी है।
![]()

