कभी शहर की पहचान उसकी सड़कों, बाजारों और गलियों से होती थी, जहां लोग पैदल चलते हुए एक-दूसरे से मिलते थे, दुकानों तक पहुंचते थे और अपने आसपास की जिंदगी को करीब से महसूस करते थे। लेकिन आज तेजी से बढ़ते शहरीकरण और वाहनों की बढ़ती संख्या ने शहरों की तस्वीर बदल दी है। आधुनिक शहरों में कार, बाइक और ट्रैफिक के लिए जगह तो लगातार बढ़ती दिखाई देती है, लेकिन पैदल चलने वाले लोगों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक रास्ते अक्सर कम पड़ जाते हैं।
सवाल यह है कि शहर आखिर किसके लिए बनाए जा रहे हैं—वाहनों के लिए या लोगों के लिए?
फुटपाथ हैं, लेकिन चलने के लिए नहीं
शहरों में पैदल यात्रियों की सबसे बड़ी समस्या फुटपाथों की कमी और उनकी खराब स्थिति है। जहां फुटपाथ बने भी हैं, वहां अक्सर दुकानों का सामान, पार्किंग, ठेले, निर्माण सामग्री या अन्य अतिक्रमण रास्ता रोक देते हैं। कई जगह फुटपाथ इतने टूटे हुए होते हैं कि पैदल चलने वाला व्यक्ति सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हो जाता है।
इस स्थिति में पैदल चलना केवल असुविधाजनक नहीं रहता, बल्कि जोखिम भरा भी हो जाता है।
सड़क पर वाहन प्राथमिकता बन गए
शहरी विकास की योजनाओं में लंबे समय तक वाहनों की गति और सड़क की क्षमता को प्राथमिकता दी जाती रही है। चौड़ी सड़कें, फ्लाईओवर और एक्सप्रेसवे जरूरी हो सकते हैं, लेकिन यदि उसी सड़क पर पैदल यात्री के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग, फुटपाथ और पर्याप्त समय वाला सिग्नल नहीं है, तो शहर का विकास अधूरा माना जाएगा।
एक शहर की सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि वहां कार कितनी तेजी से चल सकती है, बल्कि इससे भी कि एक बुजुर्ग, बच्चा, महिला या दिव्यांग व्यक्ति वहां कितनी आसानी से पैदल चल सकता है।
पैदल यात्री सबसे कमजोर क्यों?
सड़क पर कार और दोपहिया वाहन के बीच पैदल यात्री सबसे असुरक्षित होता है। वाहन चालक के पास सुरक्षा के लिए कई साधन होते हैं, लेकिन पैदल चलने वाले के पास केवल उसका शरीर और सड़क पर उपलब्ध थोड़ी-सी जगह होती है।
जब फुटपाथ खत्म हो जाता है और उसे व्यस्त सड़क पर चलना पड़ता है, तो दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। खासकर स्कूलों, बाजारों, अस्पतालों, बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों के आसपास पैदल यात्रियों की संख्या अधिक होती है। ऐसे क्षेत्रों में पैदल यात्री केंद्रित योजना की जरूरत और भी ज्यादा है।
शहरों में पैदल चलना स्वास्थ्य का सवाल भी है
पैदल चलना केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यदि शहर में सुरक्षित पैदल मार्ग उपलब्ध हों, तो लोग छोटी दूरी के लिए वाहन पर निर्भरता कम कर सकते हैं। इससे ट्रैफिक, ईंधन की खपत और प्रदूषण पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
लेकिन जब किसी व्यक्ति को कुछ सौ मीटर की दूरी तय करने के लिए भी व्यस्त सड़क, अव्यवस्थित पार्किंग और टूटे फुटपाथ से गुजरना पड़े, तो स्वाभाविक रूप से वह वाहन को प्राथमिकता देगा।
यानी शहर का खराब पैदल ढांचा लोगों की जीवनशैली को भी प्रभावित करता है।
महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए समस्या ज्यादा बड़ी
हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता और जरूरत समान नहीं होती। बुजुर्गों को आराम से चलने के लिए समतल रास्ते चाहिए। बच्चों को सुरक्षित सड़क पार करने की जरूरत होती है। दिव्यांग लोगों के लिए रैंप और बाधारहित रास्ते जरूरी हैं। महिलाओं के लिए सुरक्षित, रोशन और सक्रिय सार्वजनिक स्थान महत्वपूर्ण हैं।
इसलिए पैदल यात्री सुविधाओं को केवल फुटपाथ बनाने तक सीमित नहीं किया जा सकता। एक अच्छा पैदल मार्ग ऐसा होना चाहिए जो सुरक्षित, निरंतर, समतल, रोशन और सभी के लिए सुलभ हो।
समाधान सड़क चौड़ी करना नहीं, सोच बदलना है
शहरों में पैदल चलने की समस्या का समाधान केवल नई सड़कें बनाने या पुरानी सड़कों को चौड़ा करने से नहीं होगा। इसके लिए शहरी नियोजन की प्राथमिकताओं में बदलाव आवश्यक है।
सबसे पहले फुटपाथों को अतिक्रमण से मुक्त और लगातार बनाए रखने की जरूरत है। सड़क पार करने के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग, पर्याप्त सिग्नल टाइम, रैंप, बेहतर स्ट्रीट लाइट और सार्वजनिक परिवहन तक आसान पैदल पहुंच सुनिश्चित करनी होगी।
इसके साथ ही अवैध पार्किंग पर प्रभावी कार्रवाई और पैदल मार्गों के रखरखाव की नियमित व्यवस्था भी जरूरी है।
शहर की असली खूबसूरती पैदल दिखाई देती है
एक अच्छा शहर वह नहीं जहां हर व्यक्ति अपनी कार लेकर हर जगह पहुंच सके। अच्छा शहर वह है जहां व्यक्ति चाहे तो अपने घर से बाजार, स्कूल, पार्क, मेट्रो स्टेशन या सार्वजनिक परिवहन केंद्र तक सुरक्षित रूप से पैदल जा सके।
शहरों को केवल ट्रैफिक के प्रवाह के लिए नहीं, बल्कि इंसानी जीवन के लिए डिजाइन किया जाना चाहिए। सड़क पर पैदल चलने वाला व्यक्ति कोई बाधा नहीं है। वह भी शहर का उतना ही महत्वपूर्ण नागरिक है जितना कोई वाहन चालक।
निष्कर्ष
आज शहरों में पैदल चलना मुश्किल होना केवल फुटपाथ की समस्या नहीं है। यह हमारी शहरी सोच और विकास की प्राथमिकताओं का सवाल है। यदि शहरों में रहने वाले लोगों को कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए भी वाहन पर निर्भर रहना पड़े, तो हमें अपने विकास मॉडल पर पुनर्विचार करना होगा।
शहर जितना पैदल यात्रियों के अनुकूल होगा, उतना ही वह मानवीय, स्वस्थ और रहने योग्य बनेगा।
अब समय आ गया है कि हम यह पूछें कि शहर में कितनी चौड़ी सड़क है, इससे पहले यह पूछें—क्या उस सड़क पर एक आम नागरिक सुरक्षित होकर पैदल चल सकता है?
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