लाइव सत्यकाम न्यूज, लखनऊ : विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने ड्राफ्ट इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 तथा बिजली क्षेत्र के निजीकरण से जुड़े सभी प्रस्तावों को तत्काल वापस लेने की मांग की है। समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने कहा कि संसद सदस्यों की सलाहकार समिति, बिजली कर्मियों के संगठन और अन्य स्टेकहोल्डर्स द्वारा किए जा रहे चौतरफा विरोध के बावजूद केंद्र सरकार निजीकरण को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही है, जो पूरी तरह अनुचित है।
संघर्ष समिति ने बताया कि केंद्रीय विद्युत मंत्रालय द्वारा इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 के ड्राफ्ट पर संसद सदस्यों की सलाहकार समिति की अब तक दो बैठकें की जा चुकी हैं। पहली बैठक 18 दिसंबर 2025 को और दूसरी बैठक 03 फरवरी 2026 को आयोजित हुई। दोनों बैठकों में अधिकांश सांसदों ने प्रस्तावित अमेंडमेंट बिल का कड़ा विरोध किया है।
संघर्ष समिति ने बताया कि 18 दिसंबर की बैठक के मिनट्स सार्वजनिक किए जा चुके हैं, जबकि 03 फरवरी की बैठक में और अधिक तीव्र विरोध दर्ज किया गया है, हालांकि उसके मिनट्स अभी जारी नहीं किए गए हैं।
संघर्ष समिति के अनुसार सांसदों ने अमेंडमेंट बिल में सब्सिडी समाप्त किए जाने के प्रस्ताव पर गंभीर चिंता जताई है। साथ ही मल्टीपल डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंसी के प्रावधान को लेकर आशंका व्यक्त की गई है कि निजी कंपनियां केवल मुनाफे वाले क्षेत्रों में ‘चेरी पिकिंग’ करेंगी, जिससे सरकारी वितरण कंपनियों को भारी वित्तीय नुकसान होगा।
संघर्ष समिति ने बताया कि इससे पहले 12 जनवरी 2026 को केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने बिजली क्षेत्र में कार्यरत सभी फेडरेशनों और ट्रेड यूनियनों के साथ इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 पर बैठक की थी। इस बैठक में ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन सहित सभी कर्मचारी संगठनों ने एक स्वर में बिल का विरोध करते हुए इसे वापस लेने की मांग की थी।
संघर्ष समिति ने कहा कि जब संसद सदस्यों की सलाहकार समिति और बिजली कर्मचारियों के सभी प्रमुख संगठन इस बिल का विरोध कर रहे हैं, तब केंद्र सरकार को जनप्रतिनिधियों और कर्मचारी संगठनों की भावनाओं का सम्मान करते हुए इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को तत्काल वापस लेना चाहिए।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार संपूर्ण पावर सेक्टर के निजीकरण के लिए एक साथ कई प्रस्ताव लाकर राज्यों पर शर्तें थोपना चाहती है, जो संविधान के संघीय ढांचे के खिलाफ है।
संघर्ष समिति ने बताया कि एक ओर अमेंडमेंट बिल के जरिए निजी कंपनियों को सरकारी डिस्कॉम के नेटवर्क के उपयोग की छूट दी जा रही है, वहीं दूसरी ओर केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दिए जाने वाले वित्तीय पैकेज को निजीकरण की शर्तों से जोड़ा जा रहा है।
इन शर्तों के तहत राज्यों को तीन विकल्प दिए जा रहे हैं—
राज्य डिस्कॉम की 51 प्रतिशत इक्विटी निजी कंपनियों को बेचना,
26 प्रतिशत इक्विटी बेचकर प्रबंधन निजी कंपनी को सौंपना, या राज्य डिस्कॉम को बेचने के उद्देश्य से स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करना।
संघर्ष समिति ने बताया कि यही निजीकरण मॉडल 20 जनवरी 2026 को जारी की गई नेशनल इलेक्ट्रिसिटी पॉलिसी 2026 में भी शामिल किया गया है तथा 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट में भी इसी प्रकार की सिफारिशें की गई हैं।
संघर्ष समिति ने स्पष्ट किया कि ये सभी प्रस्ताव विद्युत वितरण कंपनियों के निजीकरण से जुड़े हैं, जिन्हें बिजली कर्मी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।
इस बीच, पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन के आज 434 दिन पूरे हो गए। इस अवसर पर बिजली कर्मियों ने प्रदेश के सभी जनपदों और परियोजनाओं पर व्यापक विरोध प्रदर्शन जारी रखा।
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