उत्तर प्रदेश के रामपुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने आधार पहचान प्रणाली से जुड़े अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। यहां सेंट मैरी स्कूल की कक्षा 10 में पढ़ने वाली जुड़वां बहनें खिजरा और तूबा जुबैर कई महीनों से अपने आधार कार्ड अपडेट कराने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन दोनों के बायोमेट्रिक विवरण में असामान्य समानता सामने आने के कारण उनका आधार अपडेट नहीं हो पा रहा था।
बताया जा रहा है कि दोनों बहनों के आधार से जुड़े बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान रेटिना और फिंगरप्रिंट में ऐसी समानता सामने आई कि पहचान प्रणाली में डुप्लीकेसी की समस्या पैदा हो गई। जब एक बहन का आधार अपडेट कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ती, तो दूसरी बहन का आवेदन कथित तौर पर डुप्लीकेसी के कारण निरस्त हो जाता। परिवार के सामने सबसे बड़ी परेशानी यह थी कि दोनों अलग-अलग व्यक्ति हैं, लेकिन बायोमेट्रिक प्रणाली उन्हें अलग पहचानने में मुश्किल का सामना कर रही थी।
मामला उस समय और गंभीर हो गया, जब दोनों छात्राओं को कक्षा 10 के पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रिया पूरी करने में परेशानी आने लगी। आधार में आवश्यक जानकारी अपडेट न होने के कारण उनकी पढ़ाई और शैक्षणिक दस्तावेजों से जुड़ी औपचारिकताओं पर असर पड़ने की चिंता परिवार को सताने लगी। कई प्रयासों के बावजूद जब समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो परिवार ने प्रशासन का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया।
इसके बाद परिवार रामपुर के जिलाधिकारी के पास पहुंचा और पूरे मामले की जानकारी दी। परिवार ने प्रशासन से अनुरोध किया कि दोनों बहनों की अलग-अलग पहचान को प्रमाणित करते हुए आधार अपडेट की समस्या का समाधान कराया जाए, ताकि उनकी पढ़ाई और कक्षा 10 के पंजीकरण में कोई बाधा न आए।
यह मामला इसलिए भी असामान्य माना जा रहा है क्योंकि आधार जैसी पहचान प्रणाली में बायोमेट्रिक विवरण किसी व्यक्ति की विशिष्ट पहचान स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण होते हैं। सामान्य परिस्थितियों में दो अलग-अलग लोगों के बायोमेट्रिक विवरण अलग होने की उम्मीद की जाती है। लेकिन जुड़वां बहनों के मामले में सामने आई समानता ने पूरी प्रक्रिया को जटिल बना दिया।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि केवल जुड़वां होने से हर व्यक्ति के फिंगरप्रिंट या आंखों की पहचान समान नहीं हो जाती। बायोमेट्रिक पहचान कई अलग-अलग विशेषताओं पर आधारित होती है और किसी विशेष मामले में प्रणाली द्वारा डुप्लीकेसी दिखने के कारणों की तकनीकी जांच जरूरी होती है। इसलिए अंतिम निष्कर्ष संबंधित अधिकारियों की जांच और सत्यापन के बाद ही सामने आएगा।
फिलहाल प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि दोनों बहनों की अलग-अलग पहचान को उचित दस्तावेजों और आवश्यक सत्यापन के साथ प्रमाणित करते हुए आधार अपडेट की समस्या का समाधान किया जाए। परिवार को उम्मीद है कि अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद दोनों छात्राओं का आधार संबंधी काम पूरा हो सकेगा और कक्षा 10 के पंजीकरण में आ रही परेशानी भी दूर होगी।
रामपुर का यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि यहां तकनीकी पहचान प्रणाली और जैविक समानता के बीच एक ऐसी स्थिति सामने आई है, जिसमें दो अलग-अलग व्यक्तियों की पहचान साबित करने के लिए सामान्य प्रक्रिया पर्याप्त साबित नहीं हुई। अब देखना होगा कि संबंधित अधिकारी किस तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए दोनों बहनों की पहचान अलग-अलग दर्ज कर इस समस्या का स्थायी समाधान निकालते हैं।
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