सोने और चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट ने सर्राफा बाजार में हलचल मचा दी है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शनिवार को सोने का भाव एक ही दिन में 3,200 रुपये टूटकर 1,42,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। वहीं चांदी की कीमत में भी 4,200 रुपये की बड़ी गिरावट दर्ज की गई और इसका भाव घटकर 1,86,000 रुपये प्रति किलोग्राम रह गया। वैश्विक बाजारों में कीमती धातुओं की भारी बिकवाली के कारण दोनों धातुओं की कीमतों पर दबाव देखने को मिला है। सोने की कीमत लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुई। इस गिरावट ने उन लोगों का ध्यान भी खींचा है, जो आने वाले दिनों में शादी-ब्याह या त्योहारों के लिए सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं।
अखिल भारतीय सर्राफा संघ के अनुसार, दिल्ली में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाला सोना शनिवार को 3,200 रुपये गिरकर सभी करों सहित 1,42,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इससे पहले शुक्रवार को सोने का भाव 1,45,200 रुपये प्रति 10 ग्राम था। इस तरह केवल एक कारोबारी सत्र में सोने की कीमत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बताया जा रहा है कि यह पिछले करीब दस महीनों का निचला स्तर है। इससे पहले 26 दिसंबर 2025 को सोना 1,42,300 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर बंद हुआ था।
चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट देखने को मिली। शनिवार को चांदी 4,200 रुपये टूटकर 1,86,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। शुक्रवार को इसका भाव 1,90,200 रुपये प्रति किलोग्राम था। इस तरह सोने के साथ-साथ चांदी में भी निवेशकों की बिकवाली का दबाव दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे घरेलू बाजार पर असर पड़ा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों ने महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति से जुड़ी टिप्पणियों के कारण ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर हुई हैं। जब ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की संभावना बनती है, तो निवेशकों के लिए सोने जैसी गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों का आकर्षण प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से कीमती धातुओं में बिकवाली का दबाव बढ़ा है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में शुक्रवार को हाजिर सोना 145.84 डॉलर यानी करीब चार प्रतिशत गिरकर 3,875.55 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुआ। यह एक साल से अधिक समय का इसका सबसे निचला स्तर बताया गया है। वहीं हाजिर चांदी भी 3.04 डॉलर यानी लगभग छह प्रतिशत टूटकर 49.12 डॉलर प्रति औंस पर आ गई। इस गिरावट का असर दुनिया के कई सर्राफा बाजारों में देखने को मिला।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और महंगाई का दबाव अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को प्रभावित कर सकते हैं। ब्याज दरें बढ़ने या लंबे समय तक ऊंची बने रहने की आशंका से निवेशक सोने और चांदी में अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं। इसके अलावा कृत्रिम मेधा से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में गिरावट के कारण भी कुछ निवेशकों ने नकदी जुटाने के लिए कीमती धातुओं की बिकवाली की है।
विश्लेषकों के अनुसार, चांदी की कीमतों में गिरावट का एक कारण इसका औद्योगिक इस्तेमाल भी है। चांदी का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और कई अन्य औद्योगिक क्षेत्रों में किया जाता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में निवेशकों की बिकवाली और औद्योगिक मांग से जुड़ी चिंताओं का असर इसकी कीमतों पर अधिक दिखाई दे सकता है। चीन के बाजार में भी निवेशकों द्वारा नकदी जुटाने के लिए सोना बेचने की खबरें सामने आई हैं, हालांकि इस कारण की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल सोने और चांदी की कीमतों में आई इस बड़ी गिरावट ने निवेशकों और खरीदारों के बीच नई चर्चा शुरू कर दी है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के आधार पर आगे भी कीमती धातुओं के भाव में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। इसलिए खरीदारी करने से पहले अपने शहर के ताजा सर्राफा भाव और आभूषणों पर लगने वाले अतिरिक्त शुल्क की जानकारी जरूर लेनी चाहिए।
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